Category: स्वास्थ्य

  • प्रत्येक ब्लाॅक में लगाई जायेगी अल्ट्रासाउण्ड व एक्स-रे मशीनः डाॅ. धन सिंह रावत

    प्रत्येक ब्लाॅक में लगाई जायेगी अल्ट्रासाउण्ड व एक्स-रे मशीनः डाॅ. धन सिंह रावत

    चिकित्सा ईकाईयों में तैनात किये जायेंगे रेडियोलाॅजिस्ट व एक्स-रे तकनीशियन

    डाॅ. रावत ने विभागीय अधिकारियों को दिये निर्देश, छह माह में पूरा करें टारगेट

    देहरादून। सूबे में चिकित्सा सेवाओं को और अधिक उन्नत बनाने के लिये प्रत्येक विकासखण्ड में अल्ट्रासाउण्ड व एक्स-रे मशीन उपलब्ध कराई जायेगी, ताकि ब्लाॅक स्तर पर आम लोगों को अल्ट्रासाउण्ड व एक्स-रे की सुविधा मुहैया कराई जा सके। विभागीय अधिकारियों को छह माह के भीतर ब्लाॅक स्तर पर अल्ट्रासाउण्ड व एक्स-रे पहुंचाने का टारगेट दिया गया है। इसके साथ ही चिकित्सा इकाईयों में रेडियोलाॅजिस्ट व एक्स-रे तकनीशियनों की तैनाती के लिये भी अधिकारियों को निर्देश दे दिये गये हैं।

    सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने बताया कि राज्य सरकार प्रदेश में चिकित्सा सेवाओं को लगातार अपग्रेड करने में जुटी है ताकि आम लोगों को स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश की विषम भौगोलिक परिस्थति एवं मरीजों की समस्याओं को दृष्टिगत रखते हुये सरकार द्वारा विकासखंड स्तर पर अल्ट्रासाउण्ड व एक्स-रे की सुविधा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। जिसके तहत प्रत्येक ब्लाॅक में अल्ट्रासाउण्ड व एक्स-रे मशीन उपलब्ध कराई जायेगी। इसके लिये सभी जनपदों के मुख्य चिकित्साधिकारियों को विकासखण्ड स्तर पर उप जिला चिकित्सालय व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में अल्ट्रासाउण्ड व एक्स-रे मशीन के लिये प्रस्ताव बनाकर शीघ्र शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दे दिये गये हैं, साथ ही विभागीय अधिकारियों को प्रत्येक ब्लाॅक में अल्ट्रासाउण्ड व एक्स-रे मशीनों उपलब्ध कराने के लिये छह माह का टारगेट दिया गया है। डाॅ. रावत ने बताया कि वर्तमान में सभी 95 ब्लाॅक में 84 एक्स-रे मशीन व 47 अल्ट्रासाउण्ड मशीन उपलब्ध हैं। जिसमें अल्मोड़ा व नैनीताल जनपद में 8-8 एक्स-रे मशीन, बागेश्वर, रूद्रप्रयाग व चम्पावत में 3-3, चमोली, ऊधमसिंह नगर व पिथौरागढ़ 7-7, देहरादून, हरिद्वार व उत्तरकाशी 6-6, पौड़ी 11 तथा टिहरी के विभिन्न विकासखण्डों में 9 एक्स-रे मशीन उपलब्ध हैं। इसी प्रकार अल्मोड़ा व नैनीताल के विभिन्न विकासखण्डों की चिकित्सा इकाईयों में 3-3 अल्ट्रासाउण्ड मशीनें उपलब्ध हैं। जबकि पौड़ी व ऊधमसिंह नगर में 6-6, चमोली, टिहरी व पिथौरागढ़ में 5-5, उत्तरकाशी व देहरादून में 4-4, चम्पावत व रूद्रप्रयाग में 2-2 तथा बागेश्वर व हरिद्वार के विकासखण्डों में 1-1 अल्ट्रासाउण्ड मशीनें उपलब्ध हैं। विभागीय मंत्री डाॅ. रावत ने कहा कि चमोली जनपद के देवाल, घेस, नंदप्रयाग व थराली, देहरादून में चकराता व कालसी विकासखण्डों में जहां अल्ट्रसाउण्ड व एक्स-रे मशीनें नहीं हैं वहां आवश्यकतानुसार मशीने उपलब्ध कराई जायेगी। इसी प्रकार हरिद्वार जनपद के बहदराबाद, भगवानपुर, खानपुर, लक्सर व नारसन में अल्ट्रासाउण्ड मशीन उपलब्ध कराई जायेगी। पौड़ी के द्वारीखाल, एकेश्वर, कल्जीखाल, नैनीडांडा, पाबौं व रिखणीखाल में अल्ट्रासाउण्ड मशीन जबकि जयहरीखाल, खिर्सू, कोट तथा पोखड़ा में अल्ट्रासाउण्ड व एक्स-रे दोनों मशीन उपलब्ध कराई जायेगी। इसी प्रकार अन्य जनपदों के विकासखण्डों में भी अल्ट्रासाउण्ड व एक्स-रे मशीन पहुंचाई जायेगी। डाॅ. रावत ने कहा कि सभी विकासखण्डों के चिकित्सा इकाईयों में रेडियोलाॅजिस्ट व एक्स-रे तकनीशियनों की तैनाती की जायेगी, जिसके लिये विभागीय अधिकारियों को निर्देश दे दिये गये हैं।

  • आयुष्मान योजना से 17 लाख से अधिक लाभार्थियों को मिला मुफ्त उपचार

    आयुष्मान योजना से 17 लाख से अधिक लाभार्थियों को मिला मुफ्त उपचार

    योजना के तहत निःशुल्क उपचार पर खर्च हो चुके हैं 3300 करोड़

    क्हा, वय वंदना योजना के तहत 25 हजार वरिष्ठ नागरिकों बने कार्ड

    देहरादून। सूबे में आयुष्मान योजना के अंतर्गत अबतक 17 लाख से अधिक मरीजों का मुफ्त इलाज किया जा चुका है। जिस पर राज्य सरकार द्वारा 3300 करोड़ रूपये से अधिक की धनराशि खर्च की जा चुकी है। प्रधानमंत्री वय वंदना योजना के तहत राज्य में 25 हजार से अधिक वरिष्ठ नागरिकों के कार्ड बनाये गये हैं। उक्त योजना के तहत 11000 से अधिक वरिष्ठ नागरिकों द्वारा मुफ्त उपचार का लाभ उठाया गया है।

    सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने मीडिया को जारी बयान में बताया कि आम लोगों के स्वास्थ्य को लेकर राज्य सरकार संजीदा है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं की आसान उपलब्धता के कारण अधिक से अधिक लोग विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। यही वजह है कि राज्य में अबतक 17 लाख से अधिक मरीजों ने आयुष्मान योजना के तहत निःशुल्क उपचार कराया है, जिस पर सरकार ने 3300 करोड़ से अधिक की धनराशि खर्च कर दी है। उन्होंने बताया कि अल्मोड़ा जनपद में 57862 लाभार्थियों ने योजना के तहत मुफ्त उपचार कराया। इसी प्रकार बागेश्वर में 25133, चमोली 66005, चम्पावत 33274, देहरादून 418295, हरिद्वार 321509, नैनीताल 159242, पौड़ी 130701, पिथौरागढ़ 58786, रूद्रप्रयाग 39989, टिहरी 99191, ऊधमसिंह नगर 281995 तथा उत्तरकाशी में 55882 लाभार्थियों ने निःशुल्क उपचार कराया।

    डाॅ. रावत ने बताया कि आयुष्मान योजना के अलावा राज्य व स्वायतशासी निकायों के कार्मिकों व पेंशनरों के लिये राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना संचालित की जा रही है। जिसके अंतर्गत 4 लाख से अधिक लाभार्थियों ने कैशलेस उपचार का लाभ उठाया है। जिसमें 1.73 लाख लोगों ने आईपीडी व 2.31 लाख लोगों ने ओपीडी की कैशलेस सुविधाएं ली। उन्होंने बताया कि इस सुविधा पर सरकार द्वारा 641 करोड़ की धनराशि खर्च की जा चुकी है। विभागीय मंत्री ने बताया कि आयुष्मान योजना के तहत राज्य में 57 लाख जबकि एसजीएचएस के तहत 5 लाख से अधिक कार्ड बनाये जा चुके हैं। इसके अलावा 70 वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग के 25 हजार से अधिक वरिष्ठ नागरिकों के वय वंदना योजना के तहत कार्ड बनाये गये हैं। जिसके तहत 11000 लाभार्थियों ने मुफ्त उपचार का फायदा उठाया है। उक्त योजना पर सरकार ने करीब 30 करोड़ से अधिक की धनराशि व्यय की है।

    डाॅ. रावत ने कहा कि आयुष्मान योजना के सूचीबद्ध अस्पतालों में सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को भी निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। दुर्घटना में घायलों के उपचार हेतु 1.50 लाख रुपये तक की कैशलेस सुविधा केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सहयोग से दी जा रही है, जो पीड़ितों के लिए बड़ी राहत है।

  • महिलाओं में गर्भाशय कैंसर अब नहीं होगा लाइलाजः डाॅ. धन सिंह रावत

    महिलाओं में गर्भाशय कैंसर अब नहीं होगा लाइलाजः डाॅ. धन सिंह रावत

    प्रदेश में 14 वर्ष की शत-प्रतिशत बालिकाओं को लगेगा एचपीवी टीका

    *कहा, 28 फरवरी को पीएम मोदी करेंगे एचपीवी वैक्सीनेशन का शुभारम्भ

    देहरादून । सूबे के स्वास्थ्य मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने कहा कि महिलाओं में गर्भाशय कैंसर अब लाइलाज नहीं है। उन्होंने बताया कि महिलाओं में तेजी से फैलने वाली इस गंभीर बीमारी की रोकथाम के लिये भारत सरकार द्वारा राष्ट्रव्यापी वैक्सीनेशन अभियान संचालित किया जा रहा है। जिसका शुभारम्भ आगामी 28 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अजमेर से करेंगे। राज्य सरकार ने भी एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) वैक्सीनेशन के लिये प्रदेशभर में व्यापक स्तर पर तैयारियां कर दी है।

    डाॅ. रावत ने बताया कि सूबे की महिलाओं को गर्भाशय ग्रीवा कैंसर जैसे गंभीर रोग के खतरे से सुरक्षित करने के लिये प्रदेशभर में वृहद स्तर पर एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान संचालित किया जायेगा। जिसके तहत 14 वर्ष आयु वर्ग की शत-प्रतिशत बालिकाओं को एचपीवी का निःशुल्क टीका लगाया जायेगा। अभी तक यह टीका निजी अस्पतालों में 4 हजार प्रति डोज की कीमत पर उपलब्ध था लेकिन भारत सरकार द्वारा अब इसे पात्र बालिकाओं को पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।

    डाॅ. रावत ने बताया कि टीकाकरण कार्यक्रम को लेकर प्रदेशभर के सभी जिला एवं ब्लॉक स्तर पर पुख्ता तैयारियां कर दी गई है। जिसके तहत डॉक्टरों, नर्सों, एएनएम, आशा कार्यकर्ताओं और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया है। उन्होंने बताया कि विभागीय अधिकारियों को वैक्सीन की उपलब्धता, कोल्ड-चेन व्यवस्था और रिपोर्टिंग सिस्टम को सुदृढ़ करने के निर्देश दे दिये गये हैं, ताकि टीकाकरण पूरी तरह सुरक्षित, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण तरीके से संपन्न हो सके। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के प्रथम चरण में प्रदेशभर की चिकित्सा इकाइयों में 155 टीकाकरण केन्द्र चिन्हित किये गये हैं, जहां पर 14 वर्ष की सभी पात्र बालिकाओं को निःशुल्क टीका लगाया जायेगा।
    स्वास्थ्य मंत्री ने अभिभावकों, शिक्षकों, स्कूल प्रबंधन, पंचायत प्रतिनिधियों, महिला समूहों और समाज के सभी जागरूक नागरिकों से अपील की कि वे अभियान में सक्रिय सहयोग कर हर पात्र बालिका के टीकाकरण को सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाये। साथ ही उन्होंने सभी जनपदों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को अपने-अपने जनपदों में टीकाकारण को लेकर व्यापक स्तर पर जन-जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश भी दिये, ताकि प्रदेश की हर बेटी इस महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच से लाभान्वित हो सके।

  • केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री से मिले कैबिनेट मंत्री डाॅ. रावत

    केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री से मिले कैबिनेट मंत्री डाॅ. रावत

    चार धाम यात्रा में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर की चर्चा

    नई दिल्ली/देहरादून। गुजरात दौरे से लौटते हुये प्रदेश के कैबिनेट मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने आज नई दिल्ली में केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान डाॅ. रावत ने केन्द्रीय मंत्री से चार धाम यात्रा में स्वास्थ्य सुविधाओं के लेकर विस्तृत चर्चा की। मुलाकात के दौरान डाॅ. रावत ने उन्हें आगामी चार धाम यात्रा पर आने का न्योता दिया। जिसे केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने सहर्ष स्वीकार किया।

    कैबिनेट मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने बताया कि उन्होंने गुजरात दौरे से लौटते समय नई दिल्ली में केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी नड्डा से मुलाकात कर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान डाॅ. रावत ने चार धाम यात्रा में तीर्थयात्रियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने को लेकर विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की। डाॅ. रावत ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री को यात्रा को लेकर राज्य सरकार द्वारा की जा रही तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा केदारनाथ एवं बदरीनाथ धाम में आधुनिक चिकित्सा इकाई स्थापित कर दी गई है। जिनका शुभारम्भ इसी यात्रा सीजन में किया जायेगा। उन्होंने बताया कि चार धाम यात्रा मार्गों पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती के साथ ही चिकित्सकों का पूल भी तैयार किया जा रहा है। जिसमें राज्य की विभिन्न चिकित्सा इकाईयों में तैनात चिकित्सकों के साथ ही राज्य मेडिकल काॅलेज, एम्स ऋषिकेश के चिकित्सकों के साथ देशभर के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के चिकित्सकों की सेवाएं ली जायेगी। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिये एम्स ऋषिकेश, राजकीय मेडिकल काॅलेज श्रीनगर व देहरादून की सेवा ली जायेगी। उन्होंने बताया कि यात्रा में 108 आपातकालीन सेवा, एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस के साथ ही कार्डिक एम्बुलेंस सेवा की त्रिस्तरीय व्यवस्था सुविधाएं रहेगी। इसके अलावा डाॅ. रावत ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राज्य की ओर भेजी गई पीआईपी में प्रस्तावित नई कार्यक्रमों के संचालन के लिये अतिरिक्त बजट उपलब्ध कराने की भी मांग केन्द्रीय स्वासथ्य मंत्री से की। जिस पर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने सकारात्मक आश्वासन दिया। इस दौरान डाॅ. रावत ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री को आगामी चार धाम यात्रा पर आने का न्योता भी दिया, जिसे केन्द्रीय मंत्री ने सहर्ष स्वीकार किया।

  • आभा आईडी से दून अस्पताल की ओपीडी हुई डिजिटल, लंबी कतारों से मिली राहत

    आभा आईडी से दून अस्पताल की ओपीडी हुई डिजिटल, लंबी कतारों से मिली राहत

    70 प्रतिशत तक ऑनलाइन पंजीकरण

    घर बैठे पर्चा, बिना लाइन उपचार; डिजिटल व्यवस्था से मरीजों को बड़ी राहत

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत जिला प्रशासन द्वारा राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में लागू की गई आभा आईडी प्रणाली मरीजों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है। जनवरी माह से शुरू इस डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से मरीज घर बैठे आभा आईडी ऐप से ऑनलाइन पंजीकरण (पर्चा) बना सकते हैं।

    दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में ओपीडी मरीजों की आवक को देखते हुए यह प्रणाली लंबी कतारों से राहत दिलाने में प्रभावी साबित हो रही है। इससे न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि पंजीकरण प्रक्रिया भी अधिक सरल और सुव्यवस्थित हुई है। विगत एक माह में अस्पताल में कुल पंजीकरण का लगभग 60 से 70 प्रतिशत आभा आईडी के माध्यम से किया जा रहा है।

    दूर-दराज क्षेत्रों से उपचार के लिए आने वाले मरीजों, विशेषकर महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह व्यवस्था काफी सुविधाजनक सिद्ध हो रही है। आभा आईडी के माध्यम से पंजीकरण कराने वाले मरीज सीधे संबंधित ओपीडी तक पहुंच रहे हैं, जिससे अनावश्यक प्रतीक्षा और असुविधा से राहत मिल रही है। हालांकि, अस्पताल में ऑफलाइन पंजीकरण की व्यवस्था भी पूर्व की तरह जारी है, जिससे सभी मरीजों को उपचार सुविधा उपलब्ध हो रही है।

    जिला प्रशासन के सहयोग से संचालित इस डिजिटल पहल से न केवल पंजीकरण प्रक्रिया आसान हुई है, बल्कि मरीजों का मेडिकल रिकॉर्ड भी डिजिटल रूप में सुरक्षित हो रहा है। इससे मरीजों को हर बार अपनी जानकारी दोबारा दर्ज कराने की आवश्यकता नहीं पड़ती और जांच रिपोर्ट तथा दवाइयों का विवरण भी ऐप पर उपलब्ध रहता है।

    ओपीडी में उपचार कराने आई मरीज संगीता बडोला ने बताया कि ऑनलाइन पर्चा बनाने की सुविधा से उनका समय बच रहा है और उन्हें निर्धारित समय पर उपचार मिल रहा है। उन्होंने सरकार और अस्पताल प्रशासन का आभार जताया।
    राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. रविंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आभा आईडी के माध्यम से मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री डिजिटल रूप में सुरक्षित की जा रही है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में ओपीडी मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण ऑनलाइन पंजीकरण से व्यवस्था अधिक सुगम हुई है। वर्तमान में प्रतिदिन 60 से 70 प्रतिशत पंजीकरण आभा आईडी के माध्यम से हो रहे हैं, जिससे मरीजों को त्वरित और बेहतर उपचार सुविधा मिल रही है।

  • नन्हीं बहन ने दिया जीवनदान, डेढ़ साल की उम्र में बनी सबसे कम उम्र की डोनर

    नन्हीं बहन ने दिया जीवनदान, डेढ़ साल की उम्र में बनी सबसे कम उम्र की डोनर

    पांच वर्षीय बच्ची का सफल बोनमैरो ट्रांसप्लांट

    डोईवाला। रियायती दरों पर गुणवत्तापरक स्वास्थ्य सेवाओं को समर्पित हिमालयन इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (हिम्स) जौलीग्रांट ने एक और कीर्तिमान स्थापित किया है।

    हिम्स के चिकित्सकों ने अप्लास्टिक एनीमिया से ग्रसित पांच वर्षीय बच्ची श्रुति का सफलतापूर्वक बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया है। विशेष बात यह है कि श्रुति के लिए उसकी डेढ़ वर्षीय छोटी बहन खुशी बोन मैरो डोनर बनी, जिसने उत्तराखंड व पश्चिम उत्तर प्रदेश में सबसे कम उम्र की बोन मैरो डोनर बनने का कीर्तिमान बनाया है।

    बहन ने बहन को दिया नया जीवन

    श्रुति को जन्म से ही सर्दी, बुखार और त्वचा संक्रमण जैसी बीमारियां घेरती रहती थीं। परिजन उपचार के लिए उसे हिम्स जौलीग्रांट लाए, जहां वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आवृत्ति बवेजा ने विस्तृत जांच कर अप्लास्टिक एनीमिया की पुष्टि की। चिकित्सीय टीम ने बोन मैरो ट्रांसप्लांट का निर्णय लिया और छोटी बहन खुशी के स्टेम सेल्स लेकर प्रत्यारोपण किया गया। प्रक्रिया के बाद श्रुति और खुशी दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं।

    “राज्य में ही अब संभव हुआ उन्नत उपचार”

    स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू) के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माना ने इस उपलब्धि पर अस्पताल की मेडिकल टीम को बधाई दी और कहा कि “हिमालयन अस्पताल ने एक बार फिर यह साबित किया है कि हम न सिर्फ गुणवत्तापरक बल्कि सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अब उत्तराखंड के मरीजों को उन्नत उपचार के लिए राज्य से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है।”

    पहले सिर्फ बड़े शहरों में थी यह सुविधा

    बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा पहले केवल दिल्ली, मुंबई, और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों के अस्पतालों में ही उपलब्ध थी। अब हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट ने यह सुविधा उत्तराखंड में उपलब्ध कराकर एक नई मिसाल कायम की है। यह राज्य का पहला और एकमात्र अस्पताल है जहां बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा मौजूद है। उत्तराखंड का पहला सफल बोनमैरोट ट्रांसप्लांट भी हिम्स जौलीग्रांट में हुआ है।

    क्या होता है बोन मैरो ट्रांसप्लांट

    बोन मैरो ट्रांसप्लांट में शरीर के क्षतिग्रस्त या खराब बोन मैरो को स्वस्थ स्टेम सेल्स से प्रतिस्थापित किया जाता है। यह प्रक्रिया ब्लड कैंसर, बोन मैरो फेल्योर और अन्य रक्त संबंधी बीमारियों के इलाज में की जाती है।

    सफलता के पीछे समर्पित टीम

    इस जटिल प्रक्रिया को सफल बनाने में डॉ. अंकित बत्रा सहित बीएमटी नर्सिंग इंचार्ज रुबिता, नीरज, अंजलि, पल्लवी, कमला, महिमा और कल्पा की विशेष भूमिका रही। एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. प्रिया, नेफ्रोलॉजी से डॉ. शहबाज अहमद, ब्लड बैंक से डॉ. यशस्वी, और हेमेटोपैथॉलॉजी विभाग से डॉ. मानसी ने भी उपचार प्रक्रिया में अहम योगदान दिया।

  • सूबे में 365 मेडिकल फैकल्टी की होगी भर्ती: डाॅ. धन सिंह रावत

    सूबे में 365 मेडिकल फैकल्टी की होगी भर्ती: डाॅ. धन सिंह रावत

    चिकित्सा शिक्षा विभाग ने शासन को भेजा भर्ती प्रस्ताव

    मेडिकल काॅलेजों में दूर होगी असिस्टेंट प्रोफेसर की कमी

    देहरादून। सूबे के चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित राजकीय मेडिकल काॅलेजों में शीघ्र ही 365 असिस्टेंट प्रोफेसर की और भर्ती होगी। विभाग ने संकायवार रोस्टर सहित भर्ती प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। शीघ्र ही शासन स्तर से शीघ्र ही उक्त पदों पर सीधी भर्ती के लिये अधियाचन उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड को भेज दिया जायेगा।

    सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने मीडिया को जारी बयान में बताया कि राज्य सरकार का लक्ष्य सभी राजकीय मेडिकल काॅलेजों में शत-प्रतिशत स्थाई फैकल्टी की नियुक्ति करना है, जिसके क्रम में सरकार निरंतर ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि राजकीय मेडिकल काॅलेजों श्रीनगर, हल्द्वानी, देहरादून, अल्मोड़ा, हरिद्वार, रूद्रपुर तथा पिथौरागढ़ में कुल 27 संकायों के अंतर्गत असिस्टेंट प्रोफेसरों के रिक्त 365 पदों पर शीघ्र भर्ती की जायेगी। विभाग द्वारा तैयार संकायवार रोस्टर में बैकलाॅक के रिक्त पदों को भी शामिल किया गया है। जिसमें अनुसूचित जाति के 115, अनुसूचित जनजाति 10, अन्य पिछड़ा वर्ग 67, आर्थिक रूप से कमजोर 37 तथा अनारक्षित के 136 पद शामिल है। उक्त भर्ती प्रस्ताव को विभाग द्वारा शासन को भेज दिया गया है। शीघ्र ही शासन स्तर से असिस्टेंट प्रोफेसर की सीधी भर्ती हेतु अधियाचन उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड को भेजा जायेगा, इसके लिये विभागीय अधिकारियों को निर्देश दे दिये गये हैं। डाॅ. रावत ने बताया कि वर्तमान में राजकीय मेडिकल काॅलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के कुल 567 पद स्वीकृत हैं, जिसके सापेक्ष कुल 202 स्थाई असिस्टेंट प्रोफेसर कार्यरत है जबकि 365 पद रिक्त हैं। उक्त रिक्त पदों पर चयन बोर्ड द्वारा शीघ्र ही भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी जायेगी। डाॅ. रावत ने कहा कि नये असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति से राजकीय मेडिकल काॅलेजों में संकाय सदस्यों की कमी दूर होगी तथा अध्ययनरत छात्रों को अनुभवी एवं योग्य फैकल्टी का लाभ मिलेगा। जिससे चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता में और सुधार होगा।

     

    इन विभागों में होगी मेडिकल फैकल्टी की भर्ती

    प्रदेश के सात राजकीय मेडिकल काॅलेजों में विभिन्न संकायों में 365 असिस्टेंट प्रोफेसरों की शीघ्र ही भर्ती होगी। जिसमें एनाटाॅमी, बायोकैमिस्ट्री, ब्लड बैंक व फोरेंसिक मेडिसिन विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के रिक्त कुल 8 पदों पर भर्ती होगी। इसी प्रकार फिजियोलाॅजी में 13, पैथोलाॅजी 18, माइक्रोबायोलाॅजी व डमेटोलाॅजी 6-6, फार्माकोलाॅजी 12, कम्युनिटी मेडिसिन 21, जनरल मेडिसिन 49, टीबी एण्ड चेस्ट व आॅप्थलमोलाॅजी 5-5, साइकेट्री व डेंटिस्ट्री 3-3, पीडियाट्रिक्स 19, जनरल सर्जरी 44, आॅर्थोपेडिक्स व रेडियोडायग्नोसिस 17-17, ईएनटी, ईमरजेंसी मेडिसिन, फिजिकसल मेडिसिन एंड रिहैब्लिटेशन व वायरोलाॅजी 7-7, आॅब्स एंड गायनी 37, रेडियोथेरेपी 8, एनेस्थीसियोलाॅजी 20 तथा स्टेटिशियन विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के रिक्त 2 पदों पर सीधी भर्ती होगी।

  • दून व रूद्रपुर मेडिकल कॉलेज को मिले एक दर्जन विशेषज्ञ चिकित्सक

    दून व रूद्रपुर मेडिकल कॉलेज को मिले एक दर्जन विशेषज्ञ चिकित्सक

    मेडिकल कॉलेजों में शत प्रतिशत होगी संकाय सदस्यों की नियुक्ति

    कॉलेजों में शैक्षिक, शोध व क्लीनिकल गुणवत्ता में होगा सुधार

    देहरादून। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज व पं0 रामसुमेर शुक्ल राजकीय मेडिकल कॉलेज रूद्रपुर में विभिन्न संकायों में एक दर्जन विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति को राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्तिय से मेडिकल कॉलेज में संकाय सदस्यों की कमी दूर होगी साथ ही मेडिकल छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा व प्रशिक्षण मिलेगा। इसके साथ ही कॉलेजों में शोधात्मक कार्यों को भी बढ़ावा मिलेगा और सम्बद्ध चिकित्सालयों में मरीजों को और बेहतर उपचार मिल सकेगा।

    चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित प्रदेशभर के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में राज्य सरकार द्वारा निरंतर विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती की जा रही है, ताकि मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत छात्रों को उच्च स्तरीय पढ़ाई के साथ बेहतर प्रशिक्षण दिया जा सके। जिसके लिये सरकार ने हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति की अध्यक्षता में एक साक्षात्कार समिति का गठन किया है, जो वॉक-इन-इंटरव्यू के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सकों का चयन कर रही है। इसी क्रम में चयन समिति ने एक दर्जन विशेषज्ञ चिकित्सकों का चयन किया है। जिनकी नियुक्ति की मंजूरी राज्य सरकार ने दे दी है। जिनमें से 8 विशेषज्ञ चिकित्सकों को राजकीय दून मेडिकल कॉलेज तथा 4 विशेषज्ञ चिकित्सकों को रूद्रपुर मेडिकल कॉलेज में नियुक्ति दी गई है। साक्षात्कार समिति द्वारा दून मेडिकल कॉलेज में रेडियो डायग्नोसिस विभाग में प्रोफेसर पद पर डॉ. ब्रजेन्द्र नाथ त्रिपाठी का चयन किया है, जबकि माइक्रोबायोलॉजी विभाग में डॉ. मनीष कुमार, बल्ड बैंक में डॉ. सनोबर शमीम, आर्थोपीडिक्स में डॉ. मयंक सिंघल, एन्टीनेटल चाइल्ड केयर में डॉ. सारा गुलेरिया, मेटरनिटी चाइल्ड हैल्थ केयर में डॉ. रूचि कर्नाटक, एनेस्थिसिया में डॉ. पूजा सांगोले व डॉ. इशिता बहुखण्डी का चयन असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर हुआ है। इसी प्रकार रूद्रपुर मेडिकल कॉलेज में आब्स एंड गायनी विभाग में डा. प्रेरणा छाबड़ा, ईएनटी में डॉ. ललित सिंह पोखरिया, माइक्रोबायोलॉजी में डॉ. मयूरी श्रीवास्तव तथा स्किन रोग विभाग में डॉ. चिराग सैनी का असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर चयन किया गया है। इन सभी चयनित विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति संविदा के माध्यम से आगामी तीन वर्ष अथवा उक्त पदों पर नियमित नियुक्ति होने तक जो भी पहले हो के लिये की गई है। चयनित विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती से मेडिकल कॉलेजों में शैक्षणिक गतिविधियों सहित शोध व क्लीनिकल सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। जिसका लाभ कॉलेजों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को मिलेगा साथ ही अस्पतालों में आने वाले मरीजों को बेहतर उपचार भी मिल सकेगा।

    बयान-
    राजकीय दून मेडिकल कॉलेज व रूद्रपुर मेडिकल कॉलेज में एक दर्जन और विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति कर दी है। संकाय सदस्यों की नियुक्ति न केवल चिकित्सा छात्रों को उच्चस्तरीय शिक्षण प्राप्त होगा बल्कि कॉलेजों में रिसर्च और क्लीनिकल सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। – डॉ. धन सिंह रावत, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड सरकार।

  • आयुष्मान भारत योजना को लेकर लाभार्थियों को किया गया जागरूक

    आयुष्मान भारत योजना को लेकर लाभार्थियों को किया गया जागरूक

    राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने चलाया जागरूकता अभियान

    आयुष्मान योजना के उपचार को लेकर किसी भी तरह की भ्रम की स्थितियों से सावधान रहने की लोगों से की अपील

    देहरादून। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण की ओर से देहरादून जनपद के विभिन्न सरकारी व निजी चिकित्सा संस्थानों में आयुष्मान जागरूकता कार्यक्रम चलाया गया। इस अवसर पर अस्पताल में भर्ती मरीज, उनके तीमारदार व ओपीडी में आए लोगों को आयुष्मान व एबीडीएम की विभिन्न जानकारियों से रूबरू कराया गया। साथ ही उन्होंने आयुष्मान योजना की जानकारियों से युक्त पंपलेट व अन्य प्रचार सामाग्री वितरित की गई।

    राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के चेयरमैन अरविंद सिंह ह्यांकी व मुख्य कार्यकारी अधिकारी रीना जोशी के निर्देशों के अनुपालन में आयुष्मान योजना व आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की महत्वपूर्ण जानकारियों को जन-जन तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्राधिकरण के सहायक प्रबंधक आईईसी नवीन शुक्ला, नवीन चमोली व एबीडीएम के प्रणव शर्मा द्वारा राजधानी के विभिन्न सरकारी व निजी चिकित्सा संस्थानों में जागरूकता अभियान चलाया।

    कार्यक्रम में आयुष्मान के प्रचार के साथ ही विशेषतौर पर 70 वर्ष या उससे अधिक आयुवर्ग के लोगों के लिए संचालित वय वंदना कार्ड के बारे में विस्तार से समझाया गया। जिन लोगों को आयुष्मान कार्ड नहीं बने उनसे कार्ड बनाने की अपील की गई। ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें योजना का लाभ मिल सके। साथ ही सड़क हादसे में घायल हुई पीड़ितों को डेढ लाख या एक सप्ताह तक जो भी पहले हो के तत्काल उपचार के बारे में जानकारियां दी गई।

    एबीडीएम के तहत आभा आईडी के महत्व, स्वास्थ्य रिकार्ड का डिजिटलाइजेशन व स्कैन एंड शेयर की व्यवस्था के लाभ व किसी जानकारी, सुझाव शिकायत के निस्तारण के लिए जारी टोल फ्री नंबर के बारे में भी बताया गया।
    इस मौके पर अस्पतालों में आयुष्मान योजना को लेकर मरीजों को भ्रमित करने वाले तत्वों से सावधान रहने की अपील करती व योजना की गुणवत्ता व सार्वभौमिकता युक्त प्रचार सामाग्री भी कार्यक्रम वितरित की गई।

  • मेडिकल शिक्षा को बढ़ावा, राजकीय मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त

    मेडिकल शिक्षा को बढ़ावा, राजकीय मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त

    फैकल्टी की कमी होगी दूर, शिक्षण व प्रशिक्षण कार्यों में होगी गुणात्मक वृद्धि

    देहरादून। प्रदेश के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में अब फैकल्टी की कमी आड़े नहीं आयेगी। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से विभिन्न संकायों में चयनित 140 असिस्टेंट प्रोफेसरों को प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में तैनाती दे दी गई है। सूबे के चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने चयनित असिस्टेंट प्रोफेसरों के तैनाती प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इन नियुक्तियों से मेडिकल कॉलेजों में शैक्षणिक वातावरण सुदृढ़ होगा तथा शिक्षण, प्रशिक्षण एवं शोधात्मक कार्यों को नई गति मिलेगी।

    राज्य सरकार प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा को उच्च मानकों के अनुरूप विकसित करने में निरंतर प्रयासरत है। सरकार मेडिकल कॉलेजों में जहां आधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध करा रही है वहीं विशेषज्ञ चिकित्सकों की भी बड़े स्तर पर तैनाती कर रही है। इसी क्रम में सूबे के चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से विभिन्न संकायों में चयनित 140 असिस्टेंट प्रोफेसरों के तैनाती प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके साथ ही इन चयनित संकाय सदस्यों को प्रदेश के विभिन्न राजकीय मेडिकल कॉलेजों में प्रथम तैनाती दे दी गई है। जिसमें राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में विभिन्न संकायों में 41 असिस्टेंट प्रोफेसरों को तैनाती दी गई है। इसी प्रकार राजकीय मेडिकल हरिद्वार में 12, राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में 33, राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में 24, राजकीय मेडिकल कॉलेज रूद्रपुर में 02 तथा राजकीय मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा में 28 असिस्टेंट प्रोफेसरों को प्रथम तैनाती दी गई है। मेडिकल कॉलेजों में दो दर्जन से अधिक संकायों में संकाय सदस्यों की नियुक्ति की गई है। जिसमें विशेष तौर पर एनेस्थीसिया संकाय में 15 असिस्टेंट प्रोफेसरों को तैनाती मिली है। इसी प्रकार एनाटॉमी व पीडियाट्रिक्स में 7-7, ब्लड बैंक, रेडियोथेरेपी व डर्मेटोलॉजी में 3-3, कम्युनिटी मेडिसिन व पैथोलॉजी 12-12, डेंटिस्ट्री 2, इमरजेंसी व फॉरेन्सिक मेडिसिन 1-1, जनरल मेडिसिन, जनरल सर्जरी, रेस्पीरेट्री मेडिसिन व फार्माकोलॉजी 5-5, माइक्रोबॉयोलॉजी व आर्थोपीडिक्स 9-9, ऑब्स्टेट्रीक एंड गायनी 8, ऑप्थैल्मोलॉजी 4 तथा ओटो-राइनो-लेरिंगोलॉजी, बॉयोकैमेस्ट्री, साईकाइट्री व फिजियोलॉजी संकाय में 6-6 असिस्टेंट प्रोफेसरों को तैनाती मिली है। मेडिकल कॉलेजों में मानकों के अनुरूप प्रत्येक संकाय में फैकल्टी की तैनाती से न केवल मेडिकल छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी बल्कि प्रशिक्षण व शोध कार्यों को भी गति मिलेगी। इसके साथ ही मेडिकल कॉलेजों से सम्बद्ध चिकित्सालयों में स्वास्थ्य सेवाएं और सुदृढ़ होगी जिससे वहां आने वाले रोगियों को बेहतर उपचार मिल सकेगा।

    बयान-

    प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा को उच्च मानकों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। इसके लिये राज्य सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक चिकित्सा उपकरणों के साथ ही अनुभवी व प्रशिक्षित फैकल्टी की भी तैनाती की जा रही है। इसी कड़ी में चयन बोर्ड से चयनित 140 असिस्टेंट प्रोफेसरों को विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में प्रथम तैनाती दे दी गई है। असिस्टेंट प्रोफसरों की नई नियुक्ति से कॉलेजों में फैकल्टी की कमी दूर होगी जिससे शिक्षण, प्रशिक्षण एवं शोध कार्यों में गुणात्मक सुधार होगी ही साथ ही सम्बद्ध चिकित्सालयों में स्वास्थ्य सुविधाएं भी और मजबूत होगी।– डॉ. धन सिंह रावत, चिकित्सा शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड।