Category: स्वास्थ्य

  • राजकीय मेडिकल कॉलेजों में 140 असिस्टेंट प्रोफेसरों को मिली तैनाती

    राजकीय मेडिकल कॉलेजों में 140 असिस्टेंट प्रोफेसरों को मिली तैनाती

    विभागीय मंत्री डा. धन सिंह रावत ने तैनाती प्रस्ताव को दी मंजूरी

    कहा, फैकल्टी की कमी होगी दूर, शिक्षण व प्रशिक्षण कार्यों में होगी गुणात्मक वृद्धि

    देहरादून। प्रदेश के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में अब फैकल्टी की कमी आड़े नहीं आयेगी। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से विभिन्न संकायों में चयनित 140 असिस्टेंट प्रोफेसरों को प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में तैनाती दे दी गई है। सूबे के चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने चयनित असिस्टेंट प्रोफेसरों के तैनाती प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इन नियुक्तियों से मेडिकल कॉलेजों में शैक्षणिक वातावरण सुदृढ़ होगा तथा शिक्षण, प्रशिक्षण एवं शोधात्मक कार्यों को नई गति मिलेगी।

    राज्य सरकार प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा को उच्च मानकों के अनुरूप विकसित करने में निरंतर प्रयासरत है। सरकार मेडिकल कॉलेजों में जहां आधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध करा रही है वहीं विशेषज्ञ चिकित्सकों की भी बड़े स्तर पर तैनाती कर रही है। इसी क्रम में सूबे के चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से विभिन्न संकायों में चयनित 140 असिस्टेंट प्रोफेसरों के तैनाती प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके साथ ही इन चयनित संकाय सदस्यों को प्रदेश के विभिन्न राजकीय मेडिकल कॉलेजों में प्रथम तैनाती दे दी गई है। जिसमें राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में विभिन्न संकायों में 41 असिस्टेंट प्रोफेसरों को तैनाती दी गई है। इसी प्रकार राजकीय मेडिकल हरिद्वार में 12, राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में 33, राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में 24, राजकीय मेडिकल कॉलेज रूद्रपुर में 02 तथा राजकीय मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा में 28 असिस्टेंट प्रोफेसरों को प्रथम तैनाती दी गई है। मेडिकल कॉलेजों में दो दर्जन से अधिक संकायों में संकाय सदस्यों की नियुक्ति की गई है। जिसमें विशेष तौर पर एनेस्थीसिया संकाय में 15 असिस्टेंट प्रोफेसरों को तैनाती मिली है। इसी प्रकार एनाटॉमी व पीडियाट्रिक्स में 7-7, ब्लड बैंक, रेडियोथेरेपी व डर्मेटोलॉजी में 3-3, कम्युनिटी मेडिसिन व पैथोलॉजी 12-12, डेंटिस्ट्री 2, इमरजेंसी व फॉरेन्सिक मेडिसिन 1-1, जनरल मेडिसिन, जनरल सर्जरी, रेस्पीरेट्री मेडिसिन व फार्माकोलॉजी 5-5, माइक्रोबॉयोलॉजी व आर्थोपीडिक्स 9-9, ऑब्स्टेट्रीक एंड गायनी 8, ऑप्थैल्मोलॉजी 4 तथा ओटो-राइनो-लेरिंगोलॉजी, बॉयोकैमेस्ट्री, साईकाइट्री व फिजियोलॉजी संकाय में 6-6 असिस्टेंट प्रोफेसरों को तैनाती मिली है। मेडिकल कॉलेजों में मानकों के अनुरूप प्रत्येक संकाय में फैकल्टी की तैनाती से न केवल मेडिकल छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी बल्कि प्रशिक्षण व शोध कार्यों को भी गति मिलेगी। इसके साथ ही मेडिकल कॉलेजों से सम्बद्ध चिकित्सालयों में स्वास्थ्य सेवाएं और सुदृढ़ होगी जिससे वहां आने वाले रोगियों को बेहतर उपचार मिल सकेगा।

    बयान–
    प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा को उच्च मानकों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। इसके लिये राज्य सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक चिकित्सा उपकरणों के साथ ही अनुभवी व प्रशिक्षित फैकल्टी की भी तैनाती की जा रही है। इसी कड़ी में चयन बोर्ड से चयनित 140 असिस्टेंट प्रोफेसरों को विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में प्रथम तैनाती दे दी गई है। असिस्टेंट प्रोफसरों की नई नियुक्ति से कॉलेजों में फैकल्टी की कमी दूर होगी जिससे शिक्षण, प्रशिक्षण एवं शोध कार्यों में गुणात्मक सुधार होगी ही साथ ही सम्बद्ध चिकित्सालयों में स्वास्थ्य सुविधाएं भी और मजबूत होगी।– डॉ. धन सिंह रावत, चिकित्सा शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड।

  • पीएचसी शक्तिफार्म सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में उच्चीकृतः डॉ. धन सिंह रावत

    पीएचसी शक्तिफार्म सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में उच्चीकृतः डॉ. धन सिंह रावत

    30 बेडेड सीएचसी के संचालन को विभिन्न संवर्ग में 32 पद स्वीकृत

    कहा, ऊधमसिंहनगर जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं को मिला विस्तार

    देहरादून । ऊधमसिंह नगर जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूती देते हुये राज्य सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र शक्तिफार्म को उच्चीकृत कर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बना दिया है। शासन स्तर से इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया गया है। इसके साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के संचालन के लिये आपईएचएस मानकों के अनुरूप विशेषज्ञ चिकित्सक, चिकित्साधिकारी, पैरामेडिकल स्टॉफ सहित प्राशसनिक संवर्ग के कुल 35 पदों का भी सृजन किया गया है। शक्तिफार्म पीएचसी का सीएचसी में उच्चीकरण से स्थानीय स्तर पर आम लोगों को बेहतर उपचार मिल सकेगा।

    चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अधिकारियों ने मीडिया को जारी बयान में बताया कि राज्य सरकार प्रदेश की सेहत को लेकर फिक्रमंद है। सरकार प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण एवं विस्तार के लिये लगातार काम कर रही है। इसी कड़ी में सरकार ने ऊधमसिंह नगर जनपद की स्वास्थ्य सेवाओं को विस्तार देते हुये प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र शक्तिफार्म (टाईप-ए) को 30 शैय्यायुक्त सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में उच्चीकृत कर दिया है। जिसके शासन स्तर से शासनदेश भी जारी कर दिये गये हैं। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रावत ने बताया कि 30 शैय्यायुक्त सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में आईपीएचएस मानकों के अनुरूप विशेषज्ञ चिकित्सकों, चिकित्सकों, नर्सिंग स्टॉफ, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन सहित अन्य मेडिकल स्टॉफ की तैनाती को कुल 32 पद सृजित किये गये हैं। जिसमें 20 नियमित तथा 12 आउटसोर्स के पद शामिल हैं। सरकार द्वारा नवसृजित पदों में चिकित्सा अधीक्षक, पब्लिक हेल्थ स्पेश्लिस्ट, जनरल सर्जन, फिजिशियन, स्त्रीरोग विशेषज्ञ, बालरोग विशेषज्ञ, निश्चेतक, दंत शल्यक के एक-एक पद शामिल हैं जबकि पीएचसी में पूर्व में सृजित चिकित्सा अधिकारी के एक पद को सीएचसी में समायोजित किया गया है। इसके अलावा पैरामेडिकल संवर्ग में 08, प्रशासनिक संवर्ग में 03, तथा 12 आउटसोर्स के पदों को सृजित किया गया है। डॉ. रावत ने बताया कि उच्चीकृत चिकित्सा इकाई में आईपीएचएस मानकों के अनुरूप आवश्यक चिकित्सकीय उपकरण मुहैया कराने एवं अवसंरचनात्मक कार्यों को नियत समय पर पूरा करने के लिये विभागीय अधिकारियों को निर्देश दे दिये गये हैं। डॉ. रावत ने बताया कि शक्तिफार्म में अस्पताल के उच्चीकरण होने से स्थानीय स्तर पर आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेगी साथ ही स्थानीय लोगों को निजी अस्पतालों में महंगे उपचार से राहत मिलेगी।

  • स्वास्थ्य, संचार, मीडिया और शिक्षा पर हुआ व्यापक व गहन मंथन

    स्वास्थ्य, संचार, मीडिया और शिक्षा पर हुआ व्यापक व गहन मंथन

    पीआरएसआई के 47वें राष्ट्रीय सम्मेलन

    विकसित भारत @ 2047 की दिशा तय करता संवाद

    देहरादून। भारत को वर्ष @ 2047 तक एक विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में प्रभावी संवाद, मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था, जिम्मेदार मीडिया और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सबसे अहम आधार बताया गया। पब्लिक रिलेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया (पीआरएसआई) के 47वें वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन “2047 तक भारत को किस तरह विकसित किया जा सकता है” विषय पर आयोजित विचार-विमर्श में प्रशासन, मीडिया, शिक्षा और जनसंचार क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने एक स्वर में कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब नीतियों के साथ-साथ उनका प्रभावी संप्रेषण भी सुनिश्चित किया जाएगा।

    सम्मेलन का दूसरा दिन विचारों के आदान-प्रदान, अनुभवों की साझेदारी और भविष्य की रणनीतियों को तय करने का सशक्त मंच बना। वक्ताओं ने कहा कि तकनीकी प्रगति, डिजिटल गवर्नेंस और जनभागीदारी को मजबूती देने में जनसंचार की भूमिका आने वाले वर्षों में और अधिक निर्णायक होगी।

    पहले सत्र में स्वास्थ्य, विज्ञान और सूचना पर फोकस

    दूसरे दिन के पहले सत्र में स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार, अपर सचिव मुख्यमंत्री, महानिदेशक सूचना एवं उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी तथा यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. दुर्गेश पंत ने अपने विचार रखे। सत्र का संचालन संजीव कंडवाल ने किया।
    इस मौके पर स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए मजबूत और सुलभ स्वास्थ्य व्यवस्था अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी और दुर्गम राज्य में टेलीमेडिसिन और डिजिटल हेल्थ सेवाएं एक क्रांतिकारी बदलाव लेकर आई हैं। इन माध्यमों से अब विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाएं दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा कि स्वस्थ समाज ही सशक्त राष्ट्र की नींव रखता है।

    अपर सचिव मुख्यमंत्री बंशीधर तिवारी ने* कहा कि सुशासन की सफलता प्रभावी, पारदर्शी और संवेदनशील संचार पर निर्भर करती है। सरकार की योजनाएं तभी सफल होती हैं जब उनकी सही और समय पर जानकारी जनता तक पहुंचे। उन्होंने डिजिटल सूचना प्रणाली और सोशल मीडिया के माध्यम से जनसंपर्क को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस मौके पर उन्होंने उत्तराखंड के 25 वर्ष के विकास की तस्वीर पेश की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में धार्मिक पर्यटन लगातार बढ़ा है। अकेले चारधाम में इस साल 50 लाख से भी अधिक श्रद्धालु आए हैं।

    चारधाम के अलावा आदि कैलास, जागेश्वर धाम और कैंची धाम के साथ ही मानस मंदिरमाला को भी विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हर साल लगभग सात-आठ करोड़ पर्यटक पहुंच रहे हैं। अपर सचिव मुख्यमंत्री बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय और जीडीपी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की दूरदर्शिता और मार्गदर्शन में अब पहाड़ों में रिवर्स माइग्रेशन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार की 35 नीतियां तैयार की गयी हैं। उन्होंने कहा कि मूलभूत सुविधाओं में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

    यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. दुर्गेश पंत ने कहा कि* विज्ञान, नवाचार और अनुसंधान विकसित भारत की आधारशिला हैं। उन्होंने युवाओं को वैज्ञानिक सोच अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि विज्ञान संचार के माध्यम से शोध को समाज से जोड़ा जाना चाहिए। यह नवाचार को जनआंदोलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    दूसरे सत्र में मीडिया, शिक्षा और लोकतंत्र पर संवाद

    सम्मेलन के दूसरे सत्र में लोक सूचना विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. नितिन उपाध्याय, सीआईएमएस कालेज के चेयरमैन ललित जोशी, एनडीटीवी नई दिल्ली के सीनियर एडिटर डा. हिमांशु शेखर, न्यूज 18 के एडिटर अनुपम त्रिवेदी तथा आईआईएमसी नई दिल्ली की प्रोफेसर डॉ. सुरभि दहिया ने सहभागिता की।

    इस सत्र में डा. नितिन उपाध्याय ने कहा कि सूचना का प्रभावी प्रसार शासन की सफलता की कुंजी है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से सरकारी योजनाओं और नीतियों को तेजी और पारदर्शिता के साथ आम जनता तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संचार प्रणाली को समय के अनुरूप लगातार अपडेट करना आवश्यक है।

    एडवोकेट ललित मोहन जोशी ने कहा कि शिक्षा और मीडिया का समन्वय समाज को जागरूक और सशक्त बनाता है। उन्होंने कहा कि प्रोफेशनल शिक्षा में नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी को शामिल करना जरूरी है, ताकि युवा राष्ट्र निर्माण में सकारात्मक भूमिका निभा सकें। उन्होंने युवा वर्ग को नशे से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि नशा देश के विकास में बड़ी बाधा है।

    डॉ. हिमांशु शेखर नेडिजिटल युग में फेक न्यूज़ को बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि मीडिया की सबसे बड़ी जिम्मेदारी सूचना की विश्वसनीयता बनाए रखना है। उन्होंने पत्रकारों से तथ्य, संवेदनशीलता और सामाजिक सरोकारों के साथ काम करने का आह्वान किया।

    वरिष्ठ पत्रकार अनुपम त्रिवेदी ने कहा कि* मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और इसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। खबरों की गति के साथ-साथ उनकी सटीकता और प्रभाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जनसंचार के माध्यम से सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन संभव है।

    डॉ. सुरभि दहिया ने कहा कि संचार शिक्षा का उद्देश्य केवल पेशेवर तैयार करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार और नैतिक नागरिक बनाना होना चाहिए। छात्रों को डिजिटल स्किल्स, नैतिक पत्रकारिता और सामाजिक समझ के साथ प्रशिक्षित करना समय की मांग है।

    संवाद से ही साकार होगा विकसित भारत का सपना

    सम्मेलन के दूसरे दिन यह स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया कि विकसित भारत @ 2047 का लक्ष्य केवल नीतियों या संसाधनों से नहीं, बल्कि प्रभावी संवाद, जिम्मेदार मीडिया, मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से ही हासिल किया जा सकता है। पीआरएसआई का यह राष्ट्रीय सम्मेलन विचारों के आदानदृप्रदान और भविष्य की दिशा तय करने में एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।

  • हेल्थ सेक्टर में नई उपलब्धि: 56 स्वास्थ्य सेवाओं को मान्यता

    हेल्थ सेक्टर में नई उपलब्धि: 56 स्वास्थ्य सेवाओं को मान्यता

    स्वास्थ्य शिक्षा में नई क्रांति की शुरुआत-10 श्रेणियों में  पैरामेडिकल शिक्षा को मिलेगा नया स्वरूप

    नए विषयों से बढ़ेगा युवाओं का दायरा, मजबूत होगी स्वास्थ्य सेवाएँ, पैरामेडिकल तथा Allied Health शिक्षा में आएगी एकरूपता, पंजीकरण एवं लाइसेंसिंग प्रक्रिया होगी सरल और पारदर्शी

    हमारा लक्ष्य है कि उत्तराखंड गुणवत्ता–आधारित स्वास्थ्य शिक्षा और हेल्थकेयर स्किल डेवलपमेंट का मॉडल बनकर उभरे- डॉ. आर. राजेश कुमार

     

    देहरादून। उत्तराखंड में स्वास्थ्य शिक्षा को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आधुनिक, पारदर्शी और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में आज एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट निर्देशों और दूरदर्शी नेतृत्व और स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय सहबद्ध और स्वास्थ्य देखरेख वृत्ति आयोग अधिनियम–2021 (National Commission for Allied and Healthcare Professions Act – 2021) के तहत उत्तराखंड राज्य सहबद्ध एवं स्वास्थ्य देखरेख परिषद के गठन की प्रक्रिया को तेजी देने हेतु सचिवालय में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने की।

    बैठक की शुरुआत में स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय और आपदा–संवेदनशील राज्य में आधुनिक, प्रशिक्षित और प्रमाणित allied health workforce का विकास अत्यंत आवश्यक है। परिषद के गठन से न केवल शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता बढ़ेगी बल्कि देशभर में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने में उत्तराखंड अग्रणी भूमिका निभाएगा।

    परिषद गठन पर विस्तृत चर्चा, चयन समिति के गठन का निर्णय

    बैठक में परिषद के गठन, उसकी संरचना, भविष्य की आवश्यकताओं और कार्य प्रणालियों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। यह तय किया गया कि परिषद के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के लिए “तलाश–सह–चयन समिति” बनाई जाएगी, जो निर्धारित योग्यताओं और अनुभवों के आधार पर नामों का चयन करेगी। स्वास्थ्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परिषद के सुचारू संचालन के लिए प्रारंभिक बजट, कार्यालय संरचना, तकनीकी सहायता और मानव संसाधन की उपलब्धता तुरंत सुनिश्चित की जाए, ताकि परिषद अपने दायित्वों का निर्वहन शीघ्र आरंभ कर सके।

    वर्तमान में राज्य में पैरामेडिकल शिक्षा उत्तराखंड पैरामेडिकल अधिनियम–2009 और स्टेट मेडिकल फैकल्टी के माध्यम से संचालित होती है। यहाँ स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर 22 विषयों के पाठ्यक्रम चल रहे हैं। राष्ट्रीय अधिनियम लागू होने के बाद इन सभी पाठ्यक्रमों को और अधिक मानकीकृत, रोजगारोन्मुख, और कौशल आधारित बनाया जाएगा। नए अधिनियम में कुल 10 श्रेणियों में 56 प्रकार की स्वास्थ्य सेवाओं को मान्यता दी गई है। इससे विद्यार्थियों को न सिर्फ व्यापक करियर अवसर प्राप्त होंगे, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग्यता को उच्च पहचान मिलेगी।

    मजबूत होगी स्वास्थ्य सेवाएँ

    बैठक में विशेषज्ञों ने बताया कि अधिनियम के तहत कई नए और महत्वपूर्ण विषय शामिल होंगे—
    पोषण विज्ञान, स्वास्थ्य सूचना प्रबंधन, क्लिनिकल साइकोलॉजी, डायलिसिस तकनीशियन, एनेस्थीसिया एवं ऑपरेशन थिएटर तकनीशियन, आपातकालीन चिकित्सा तकनीशियन आदि।

    इन विषयों के शामिल होने से राज्य के युवाओं को विस्तृत करियर विकल्प, निजी और सरकारी क्षेत्र में बेहतर प्लेसमेंट, तथा शोध और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं में अवसर मिलेंगे। अधिकारियों ने कहा कि यह कदम उत्तराखंड को स्वास्थ्य शिक्षा और allied health services के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करेगा और भविष्य में राज्य एक “हेल्थ एजुकेशन हब” के रूप में स्थापित होगा।

     

    उत्तराखंड सरकार स्वास्थ्य शिक्षा को सुदृढ़, सुगठित और राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सहबद्ध एवं स्वास्थ्य देखरेख परिषद का गठन हमारे लिए परिवर्तनकारी कदम साबित होगा। इससे पैरामेडिकल तथा allied health शिक्षा में एकरूपता आएगी, पाठ्यक्रमों का मानकीकरण होगा और पंजीकरण एवं लाइसेंसिंग प्रक्रिया बेहद सरल और पारदर्शी बनेगी। नए अधिनियम के तहत कई उभरते विषय और विशेषज्ञताएँ शामिल होंगी, जिससे युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने का अवसर मिलेगा। हमारा लक्ष्य है कि उत्तराखंड गुणवत्ता–आधारित स्वास्थ्य शिक्षा और हेल्थकेयर स्किल डेवलपमेंट का मॉडल राज्य बनकर उभरे।

    स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार

  • सुरसिंहधार नर्सिंग कॉलेज को पीजी मान्यता प्राप्त

    सुरसिंहधार नर्सिंग कॉलेज को पीजी मान्यता प्राप्त

    एमएससी नर्सिंग की 15 सीटें मंज़ूर

    टिहरी को मिली नई सौगात—सुरसिंहधार नर्सिंग कॉलेज अब बनेगा उच्च स्तरीय पीजी संस्थान

    देहरादून। धामी सरकार ने टिहरी जनपद को बड़ी सौगात दी है। सुरसिंहधार नर्सिंग कॉलेज को पीजी की मान्यता के साथ एमएससी नर्सिंग में 15 सीटों की स्वीकृति दी है।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के क्रम में स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने विभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक ली।

    बैठक में टिहरी जनपद के सुरसिंहधार स्थित राजकीय नर्सिंग कॉलेज को पीजी कॉलेज के रूप में विकसित किए जाने से संबंधित सभी बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

    स्वास्थ्य सचिव ने अधिकारियों से प्रगति विवरण, उपलब्ध अवसंरचना, वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृतियों की स्थिति तथा निरीक्षण रिपोर्ट की जानकारी लेते हुए कहा कि मुख्यमंत्री घोषणाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिया कि नर्सिंग शिक्षा को सुदृढ़ बनाने, विशेषज्ञ नर्सिंग जनशक्ति तैयार करने और पर्वतीय जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने हेतु इस प्रोजेक्ट को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। साथ ही शासन स्तर पर आवश्यक कार्यवाही शीघ्र पूर्ण कर प्रस्ताव को समय पर आगे बढ़ाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    सुरसिंहधार नर्सिंग कॉलेज को पीजी मान्यता

    स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि मुख्यमंत्री घोषणा के अनुपालन में शासन द्वारा 14 अगस्त 2026 को वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृतियाँ जारी की जा चुकी हैं। इसके साथ ही टिहरी जनपद के चंबा क्षेत्र स्थित सुरसिंहधार नर्सिंग कॉलेज को पीजी कॉलेज का दर्जा प्रदान कर दिया गया है तथा आवश्यक सभी औपचारिकताएँ पूर्ण कर ली गई हैं।

    उन्होंने बताया कि 12 नवंबर 2025 को जारी पत्र के तहत राजकीय नर्सिंग कॉलेज नई टिहरी की स्थिति के मूल्यांकन हेतु एक निरीक्षण समिति का गठन किया गया था, जिसे परिसर का भौतिक सत्यापन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।

    निरीक्षण रिपोर्ट में अवसंरचना को उपयुक्त पाया गया

    समिति ने 14 नवंबर 2025 को स्थलीय निरीक्षण कर अपनी व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में बताया गया कि कॉलेज में भवन, कक्षाएँ, प्रयोगशालाएँ, पुस्तकालय, मल्टीपरपज़ हॉल तथा एमएससी नर्सिंग कार्यक्रम हेतु आवश्यक अतिरिक्त कक्षाएँ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।
    समिति ने यह भी बताया कि कॉलेज के पास जिला चिकित्सालय बौराड़ी (100 बेड) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नरेंद्रनगर (50 बेड) क्लीनिकल पोस्टिंग हेतु उपलब्ध हैं, जो प्रशिक्षण की अनिवार्य शर्तों को पूरा करते हैं।

    निरीक्षण में यह पाया गया कि कॉलेज के पास कुल 71,900.33 वर्गफुट क्षेत्र उपलब्ध है, जिसमें 32,452.97 वर्गफुट शैक्षणिक क्षेत्र तथा 39,447.36 वर्गफुट हॉस्टल क्षेत्र शामिल है। समस्त अवसंरचना मानकों के अनुरूप पाई गई, जिसके आधार पर कॉलेज को पीजी मान्यता प्रदान कर दी गई है।

    एमएससी नर्सिंग की 15 सीटों की स्वीकृति

    स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि निरीक्षण के आधार पर समिति ने राजकीय नर्सिंग कॉलेज नई टिहरी में एमएससी नर्सिंग कार्यक्रम प्रारंभ करने हेतु 15 सीटों की संस्तुति की है। रिपोर्ट में उल्लेख है कि संस्थान में उच्च स्तरीय नर्सिंग शिक्षा हेतु आवश्यक संसाधन, स्टाफ, कक्षाएँ और प्रशिक्षण ढांचा उपलब्ध है, जिससे पर्वतीय क्षेत्रों की नर्सिंग शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में महत्वपूर्ण वृद्धि होगी।

    उन्होंने कहा कि यह निर्णय मुख्यमंत्री घोषणा की पूर्ति के साथ-साथ टिहरी जनपद में विशेषज्ञ स्वास्थ्य मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि सिद्ध होगा। समीक्षा बैठक में डॉ. ए.के. आर्य, निदेशक चिकित्सा शिक्षा; डॉ. रविन्द्र सिंह बिष्ट, अपर निदेशक चिकित्सा शिक्षा; मनीषा ध्यानी, रजिस्ट्रार सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

     

     

  • पतंजलि गाय घी गुणवत्ता जांच में फेल

    पतंजलि गाय घी गुणवत्ता जांच में फेल

    कोर्ट ने लगाया 1.40 लाख रुपये का जुर्माना

    पिथौरागढ़ में 2020 में लिए गए नमूने दोनों लैबों में पाए गए मानकों से नीचे

    स्वास्थ्य पर पड़ सकते थे दुष्प्रभाव

    पिथौरागढ़। सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद का गाय का घी गुणवत्ता जांच में फेल पाया गया है।

    चार साल पुराने मामले में न्याय निर्णायक अधिकारी/एडीएम पिथौरागढ़ के न्यायालय ने गुरुवार को कंपनी और संबंधित कारोबारियों पर कुल 1 लाख 40 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। घी के नमूने वर्ष 2020 में लिए गए थे, जिनकी जांच राज्य और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर असफल रही।

    अधिकारियों का कहना है कि मानकों से नीचे गुणवत्ता वाले इस घी के सेवन से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते थे। खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन पिथौरागढ़ के असिस्टेंट कमिश्नर आरके शर्मा ने बताया कि नमूनों की जांच रुद्रपुर की राज्य प्रयोगशाला और उसके बाद गाजियाबाद स्थित राष्ट्रीय खाद्य प्रयोगशाला में कराई गई। दोनों जांचों में घी मानकों पर खरा नहीं उतरा। विभागीय अधिकारियों ने सबूतों सहित पूरा मामला अदालत में प्रस्तुत किया, जिसके बाद यह कार्रवाई हुई।

    दो साल तक कंपनी की प्रतिक्रिया नहीं, अपील पर दोबारा जांच भी रही फेल

    अधिकारियों के अनुसार पतंजलि आयुर्वेद को 2021 में पहली रिपोर्ट की सूचना दे दी गई थी, लेकिन कंपनी की ओर से काफी समय तक कोई जवाब नहीं आया।

    बाद में 15 अक्टूबर 2021 को पतंजलि ने नमूने की दोबारा जांच कराने की अपील की और सेंट्रल लैब जांच के लिए 5,000 रुपये निर्धारित शुल्क भी जमा कराया। 16 अक्टूबर 2021 को राष्ट्रीय खाद्य प्रयोगशाला गाजियाबाद में पुन: जांच कराई गई, लेकिन वहां भी घी मानक पर खरा नहीं उतर सका। 26 नवंबर 2021 को आई रिपोर्ट में भी स्पष्ट रूप से गंभीर त्रुटियां पाई गईं। इसके बाद विस्तृत अध्ययन और सुनवाई के उपरांत मामला अदालत में चला।

    कहां से लिया गया था नमूना?

    20 अक्टूबर 2020 को खाद्य सुरक्षा अधिकारी दिलीप जैन ने पिथौरागढ़ के कासनी स्थित करन जनरल स्टोर से पतंजलि गाय के घी का नमूना लिया था। रुटीन चेकिंग के दौरान उठाए गए इस सैंपल की जांच में कई पैरामीटर मानक से कम पाए गए।

    कितनी कंपनियों पर लगा कितना जुर्माना?

    पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड (निर्माता) : 1,00,000 रुपये
    ब्रह्म एजेंसी (डिस्ट्रिब्यूटर) : 25,000 रुपये
    करन जनरल स्टोर (विक्रेता) : 15,000 रुपये
    कुल जुर्माना: 1,40,000 रुपये

    कब-कब क्या हुआ?

    20 अक्टूबर 2020 : कासनी से घी का नमूना लिया गया
    2021 (रुद्रपुर लैब रिपोर्ट) : घी मानकों पर फेल
    15 अक्टूबर 2021 : पतंजलि ने दोबारा जांच की अपील की
    16 अक्टूबर 2021 : गाजियाबाद राष्ट्रीय लैब में दूसरी जांच
    26 नवंबर 2021 : दूसरी रिपोर्ट में भी घी असफल
    17 फरवरी 2022 : मामला कोर्ट में प्रस्तुत
    27 नवंबर 2025 : अदालत ने सुनाया फैसला, जुर्माना लगाया

  • सीएम धामी ने यूकेडी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक  दिवाकर भट्ट का हालचाल लिया

    सीएम धामी ने यूकेडी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक दिवाकर भट्ट का हालचाल लिया

    सीएम धामी ने दिवाकर भट्ट के उपचार को लेकर दिए आवश्यक निर्देश

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महंत इंद्रेश हॉस्पिटल में भर्ती उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक दिवाकर भट्ट से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना।

    दिवाकर भट्ट इन दिनों स्वास्थ्य कारणों से अस्पताल में भर्ती हैं। मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों से उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और उपचार से संबंधित सभी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
    मुख्यमंत्री ने दिवाकर भट्ट से भेंट कर उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

    इस दौरान अस्पताल प्रशासन, चिकित्सकगण और संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

  • राजकीय मेडिकल कॉलेजों को मिले 142 स्थाई असिस्टेंट प्रोफेसर

    राजकीय मेडिकल कॉलेजों को मिले 142 स्थाई असिस्टेंट प्रोफेसर

    उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड ने घोषित किया परीक्षा परिणाम

    चयनित विशेषज्ञ चिकित्सकों को कॉलेजों में शीघ्र दी जायेगी तैनाती

    देहरादून । उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड ने राजकीय मेडिकल कॉलेजों के अंतर्गत विभिन्न संकायों के 142 असिस्टेंट प्रोफेसर का परीक्षा परिणाम विषयवार घोषित कर दिया है। चयन आयोग द्वारा चयनित इन संकाय सदस्यों को शीघ्र ही प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में प्रथम तैनाती दी जायेगी। असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति से मेडिकल कॉलेजों में जहां फैकल्टी की कमी दूर होगी वहीं छात्र-छात्राओं को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा और सम्बद्ध चिकित्सालयों में मरीजों को भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ होंगी।

    सूबे के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर की स्थाई नियुक्ति के लिये विभागीय मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के निर्देश पर चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड को असिस्टेंट प्रोफेसर के रिक्त 439 पदों पर सीधी भर्ती के लिये अधियाचन भेजा गया था। जिसके क्रम में चयन बोर्ड के द्वारा उक्त पदों पर निर्धारित मानकों के तहत भर्ती प्रक्रिया आयोजित कर चयनित अभ्यर्थियों का अन्तिम परीक्षा परिणाम विषयवार घोषित कर दिया है। चयन बोर्ड द्वारा दो दर्जन से अधिक संकायों के लिये 142 विशेषज्ञ चिकित्साकों का चयन किया गया है। जिसमें एनेस्थीसिया संकाय में 16 असिस्टेंट प्रोफेसर का चयन हुआ है। इसी प्रकार एनाटॉमी, पीडियाट्रिक्स व बॉयोकैमेस्ट्री में 7-7, ब्लड बैंक, रेडियोथेरेपी व डर्मेटोलॉजी में 3-3, कम्युनिटी मेडिसिन व पैथोलॉजी 12-12, डेंटिस्ट्री 2, इमरजेंसी व फॉरेन्सिक मेडिसिन 1-1, जनरल मेडिसिन, जनरल सर्जरी, रेस्पीरेट्री मेडिसिन व फार्माकोलॉजी 5-5, माइक्रोबॉयोलॉजी व आर्थोपीडिक्स 9-9, ऑब्स्टेट्रीक एंड गायनी 8, ऑप्थैल्मोलॉजी 4 तथा ओटो-राइनो-लेरिंगोलॉजी, साईकाइट्री व फिजियोलॉजी संकाय में 6-6 असिस्टेंट प्रोफेसर का चयन हुआ है। इन सभी चयनित असिस्टेंट प्रोफेसर को शीघ्र ही प्रदेशभर के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में प्रथम तैनाती दी जायेगी। इनकी नियुक्ति से मेडिकल कॉलेजों में शिक्षण व प्रशिक्षण कार्यों में गुणात्मक वृद्धि होगी, जिसका फायदा मेडिकल छात्र-छात्राओं को मिलेगी ही साथ ही सम्बद्ध अस्पतालों में उपचार को आये मरीजों को भी बेहतर इलाज मिल सकेगा।

    बयान–
    उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड ने राजकीय मेडिकल कॉलेजों के अंतर्गत दो दर्जन से अधिक संकायों में 142 असिस्टेंट प्रोफेसर का चयन परिणाम घोषित कर दिया है। इन चयनित फैकल्टी को शीघ्र ही मेडिकल कॉलेजों में नियुक्ति दी जायेगी। स्थाई फैकल्टी मिलने से मेडिकल कॉलेजों में शिक्षण, प्रशिक्षण एवं शोधात्मक कार्यों में गुणात्मक वृद्धि होगी, जिसका फायदा मेडिकल छात्र-छात्राओं को मिलेगी।- डॉ. धन सिंह रावत, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड।

  • राजकीय मेडिकल कॉलेजों को मिलेंगे 587 नये नर्सिंग अधिकारी

    राजकीय मेडिकल कॉलेजों को मिलेंगे 587 नये नर्सिंग अधिकारी

    उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड ने जारी की भर्ती विज्ञप्ति

    रंग ला रही है विभागीय मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की पहल

    देहरादून । चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित राजकीय मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग अधिकारियों के रिक्त 587 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड ने इसके लिये भर्ती विज्ञापन जारी कर अभ्यर्थियों से ऑनलाइन आवेदन मांगे हैं। उक्त भर्ती हेतु ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 17 दिसम्बर 2025 निर्धारित की है।

    सूबे के चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने मीडिया को जारी बयान में बताया कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण व विस्तारीकरण को लेकर खासी संजीदा है। सरकार आम लोगों को उच्च गुणवत्तायुक्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिये न सिर्फ आधुनिक चिकित्सा संसाधन उपलब्ध करा रही है बल्कि मानव संसाधनों की भी तीव्र गति से पूर्ति कर रही है। उन्होंने बताया कि बीते एक सप्ताह के भीतर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत 287 चिकित्सकों तथा 180 स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (महिला) के रिक्त पदों पर राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से सीधी भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। इसी क्रम में आज (सोमवार) चयन बोर्ड ने राजकीय मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग अधिकारियों के रिक्त 587 पदों पर भर्ती विज्ञप्ति जारी कर अभ्यर्थियों से आवेदन मांगे हैं। जिसमें राजकीय मेडिकल कॉलेज हरिद्वार व पिथौरागढ़ के रिक्त 480 पद तथा बैकलॉग के 107 पद शामिल हैं।

    विभागीय मंत्री ने बताया कि नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती के लिये ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 27 नवम्बर 2025 से शुरू होगी जबकि आवेदन की अंतिम तिथि 17 दिसम्बर 2025 निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि उक्त भर्ती के तहत नर्सिंग अधिकारी (महिला) डिप्लोमाधारक के लिये 336 पद निर्धारित किये गये हैं। इसी प्रकार नर्सिंग अधिकारी (महिला) डिग्रीधारक के लिये 144 पद जबकि नर्सिंग अधिकारी (पुरूष) डिप्लोमाधारक 75 तथा नर्सिंग अधिकारी (पुरूष) डिप्लोमाधारक के लिये 32 पद विज्ञापित किये गये हैं।

    डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि नर्सिंग अधिकारियों के 587 पदों पर नियुक्ति से राजकीय मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य सुविधाएँ और अधिक सुदृढ़ होंगी। इससे उपचार प्रक्रियाएँ न केवल तत्पर और प्रभावी बनेंगी, बल्कि मरीजों की देखभाल में भी उल्लेखनीय सुधार होगा।

  • उत्तराखंड को आयुर्वेद–प्राकृतिक चिकित्सा का विश्व केंद्र बनाएंगे: धामी

    उत्तराखंड को आयुर्वेद–प्राकृतिक चिकित्सा का विश्व केंद्र बनाएंगे: धामी

    हल्द्वानी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को नैनीताल जिले के भुजियाघाट स्थित काया आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन PGICON-2025 का शुभारंभ किया।

    पाल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट, हल्द्वानी द्वारा WHO कोलेबोरेटिंग सेंटर फॉर इमरजेंसी एंड ट्रॉमा केयर, JPNATC, एम्स नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित इस तीन दिवसीय सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की प्राचीन चिकित्सा प्रणाली आयुर्वेद केवल उपचार की पद्धति नहीं, बल्कि निरोगी और संतुलित जीवन का दर्शन है। उन्होंने कहा कि हमारे ऋषि-मुनियों ने स्वास्थ्य को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन की अवस्था बताया था, और यही आयुर्वेद का मूल उद्देश्य है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में आयुष मंत्रालय की स्थापना के बाद से आयुर्वेद को नई वैश्विक पहचान मिली है। उत्तराखंड सरकार भी इसी दिशा में राज्य को Global Centre of Ayurveda and Wellness के रूप में विकसित करने के लिए कार्य कर रही है।

    उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड सदैव से योग, औषधियों और जड़ी-बूटियों की भूमि रही है। यहां की पर्वतीय वनस्पतियों ने आयुर्वेद को मजबूत आधार प्रदान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य राज्य को वेलनेस टूरिज़्म और प्राकृतिक चिकित्सा का प्रमुख केंद्र बनाना है। इसके लिए आयुर्वेदिक कॉलेजों, अनुसंधान संस्थानों और योग ग्रामों को सशक्त किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर यह घोषणा भी की कि राज्य में दो इकोनामिक स्प्रिच्वल जोन एक गढ़वाल मंडल में और एक कुमाऊँ मंडल में स्थापित किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि इन केंद्रों के माध्यम से योग, आयुर्वेद, ध्यान, आध्यात्मिक पर्यटन और पारंपरिक चिकित्सा से जुड़े उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल राज्य को आध्यात्मिक और वेलनेस अर्थव्यवस्था के नए मॉडल के रूप में विकसित करेगी, जिससे स्थानीय युवाओं को भी रोजगार और उद्यमिता के अवसर प्राप्त होंगे।

    सांसद अजय भट्ट ने कहा कि आयुर्वेद हमारी सांस्कृतिक धरोहर है और इसे जन-जन तक पहुंचाना हमारा दायित्व है।

    विधायक बंशीधर भगत ने कहा कि आयुर्वेद केवल चिकित्सा का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय जीवन पद्धति और ज्ञान परंपरा का अभिन्न हिस्सा है।

    कार्यक्रम में विधायक नैनीताल श्रीमती सरिता आर्या, विधायक भीमताल राम सिंह कैड़ा, मंडी परिषद अध्यक्ष अनिल कपूर (डब्बू), दर्जा राज्य मंत्री शंकर कोरंगा, नवीन वर्मा, आयुक्त कुमाऊँ दीपक रावत, आईजी कुमाऊँ श्रीमती रिद्धिम अग्रवाल, जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल मंजूनाथ टी.सी. सहित पाल ग्रुप के प्रतिनिधि अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।