Category: स्वास्थ्य

  • स्वास्थ्य विभाग को मिलेंगे 287 और नये चिकित्सक

    स्वास्थ्य विभाग को मिलेंगे 287 और नये चिकित्सक

    चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड ने जारी की भर्ती विज्ञप्ति

    देहरादून । स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को 287 और नये चिकित्सक मिलेंगे। राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड ने चिकित्सा अधिकारियों की सीधी भर्ती के लिये अभ्यर्थियों से आवेदन मांगे हैं। चयन बोर्ड ने उक्त भर्ती हेतु ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 10 दिसम्बर 2025 निर्धारित की है। उक्त पदों हेतु अभ्यर्थियों के लिये न्यूनतम आयु सीमा 21 वर्ष व अधिकतम 42 वर्ष सुनिश्चित की है।

    सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के निर्देश के उपरांत स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा संवर्ग के अंतर्गत साधारण ग्रेड चिकित्सा अधिकारियों के रिक्त 287 पदों सीधी भर्ती हेतु राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड को अधियाचन भेजा गया था, जिसमें 231 पद सीधी भर्ती और 56 बैकलॉग के पद शामिल हैं। उक्त के क्रम चयन बोर्ड ने आज चिकित्सा अधिकारियों रिक्त पदों को सीधी भर्ती से भरने हेतु भर्ती विज्ञप्ति जारी कर अभ्यर्थियों से आवेदन मांगे हैं। चयन बोर्ड द्वारा जारी भर्ती विज्ञप्ति में चिकित्सा अधिकारियों के इन पदों में अनारक्षित श्रेणी के कुल 141, अनुसूचित जाति 70, अनुसूचित जनजाति 11, अन्य पिछड़ा वर्ग 38, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के तहत 27 पद शामिल हैं। जिस हेतु ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया आगामी 20 नवम्बर 2025 से शुरू हो जायेगी, जबकि आवेदन की अंतिम तिथि 10 दिसम्बर 2025 को निर्धारित की गई है। चयन बोर्ड से चिकित्सकों के चयन के उपरांत उन्हें प्रदेश के दूरस्थ चिकित्सालयों में प्रथम तैनाती दी जायेगी, ताकि सुदूरवर्ती क्षेत्रों में आम लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिले सकेगी।

    बयान–
    राज्य सरकार का उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक अस्पताल में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है, ताकि आम जनता को स्थानीय स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सके। इसी दिशा में सरकार लगातार चिकित्सकों व पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती कर रही है। 287 नये चिकित्सकों की नियुक्ति भी इसी प्रयास का हिस्सा है, जिससे सुदूरवर्ती क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूती मिलेगी। – डॉ. धन सिंह रावत, स्वास्थ्य मंत्री, उत्तराखंड।

     

  • राजकीय मेडिकल कॉलेजों को मिले 28 नर्सिंग ऑफिसर

    राजकीय मेडिकल कॉलेजों को मिले 28 नर्सिंग ऑफिसर

    चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. रावत ने वितरित किये नियुक्ति पत्र

    स्टेट नर्सिंग कॉलेज में लैब व व्याख्यान कक्षों का किया लोकार्पण

    देहरादून । चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से चयनित 28 नर्सिंग अधिकारियों एवं 14 सीएमएसडी टैक्नीशियन को प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज नियुक्ति पत्र वितरित किये। इसके अलावा उन्होंने एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर (नर्सिंग) के सात अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति पत्र बांटे। डॉ. रावत ने कार्यक्रम के दौरान राजकीय स्टेट कॉलेज ऑफ नर्सिंग में रूपये 456.15 लाख की लागत से तैयार व्याख्यान कक्षों एवं लैब का भी लोकार्पण किया।

    राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में आज प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराने व प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिये प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर उन्होंने राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से चयनित 28 नर्सिंग अधिकारियों, 14 सीएमएसडी टैक्नीशियन एवं 06 एसोसिएट प्रोफेसर (नर्सिंग) व 01 प्रोफेसर (नर्सिंग) को नियुक्ति पत्र सौंपे। डॉ. रावत ने कहा कि नर्सिंग अधिकारी एवं सीएमएसडी टैक्नीशियन की नियुक्ति से राजकीय मेडिकल कॉलेजों से सम्बद्ध चिकित्सालयों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेगी, साथ ही मरीजों को उनकी बीमारियों से संबंधित पैथोलॉजी जांचे भी समय पर मिल सकेगी। जबकि राजकीय नर्सिंग कॉलेजों में एसोसिएट प्रोफेसर एवं प्रोफेसर की नियुक्ति होने से जहां सकाय सदस्यों की कमी दूर वहीं वहीं नर्सिंग छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षण-प्रशिक्षण मिलेगा।
    डॉ. रावत ने कहा कि राज्य सरकार की मंशा प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं के साथ-साथ उच्च गुणवत्तायुक्त चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराना है। इसके लिये सरकार निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि सरकार जहां स्वास्थ्य उपकेन्द्रों से लेकर जिला अस्पतालों में आधुनिक तकनीक युक्त चिकित्सा सुविधाएं व मानव संसाधन जुटा रही है। वहीं राजकीय मेडिकल कॉलेजों व नर्सिंग कॉलेजों में संकाय सदस्यों, नर्सिंग अधिकारियों सहित प्रशिक्षित कार्मिकों की निरंतर नियुक्ति की जा रही है। उन्होंने कहा कि अब तक राजकीय मेडिकल कॉलेजों में 1248 नर्सिंग अधिकारी नियुक्त किये जा चुके हैं जबकि 587 नर्सिंग अधिकारियों के पदों पर नियुक्ति हेतु अधियाचन चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड को भेजा जा चुका है। इसके अलावा 439 असिस्टेंट प्रोफेसरों के पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया प्रगति पर है। इसके अलावा मेडिकल कॉलेजों में 170 टैक्नीशियनों की नियुक्ति की जा चुकी है। जिसमें लैब, ओटी, ईसीजी एवं रेडियोग्राफिक टैक्नीशियन शामिल है।
    कार्यक्रम के दौरान डॉ. रावत ने राजकीय स्टेट कॉलेज ऑफ नर्सिंग देहरादून में रूपये 456.15 लाख की लागत से निर्मित व्याख्यान कक्षों व लैब का भी लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता में और अधिक सुधार के लिये सरकार आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता के साथ-साथ शिक्षकों की भी नियुक्ति कर रही है। डॉ. रावत ने सभी चयनित अभ्यर्थियों को बधाई देते हुये उम्मीद जताई कि सभी नव नियुक्त कार्मिक पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ अपने दायित्वों और कर्तव्यों का पालन कर सरकार का सहयोग करेंगे।

  • राजकीय नर्सिंग कॉलेजों को मिली सात नई फैकल्टी

    राजकीय नर्सिंग कॉलेजों को मिली सात नई फैकल्टी

    चयनित एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर को दी गई प्रथम तैनाती

    नई नियुक्ति से कालेजों में शैक्षणिक गतिविधियां होगी मजबूत

    देहरादून। सूबे के राजकीय नर्सिंग कॉलेजों में अब फैकल्टी की कमी दूर हो गई है। राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से चयनित सात फैकल्टी को विभिन्न कॉलेजों में प्रथम तैनाती दे दी गई है। जिसमें एक प्रोफेसर और छह एसोसिएट प्रोफेसर शामिल है। नर्सिंग कॉलेजों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को संकय सदस्य मिलने से उन्हें पठन-पाठन और प्रशिक्षण में कोई समस्या नहीं आयेगी।

    राज्य सरकार प्रदेश के राजकीय मेडिकल कॉलेजों के साथ ही नर्सिंग कॉलेजों में संकाय सदस्यों की कमी को दूर करने में जुटी है, ताकि मेडिकल और नर्सिंग की पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं को उच्च स्तरीय शिक्षण और प्रशिक्षण मिल सके। इसी कड़ी में चिकित्सा शिक्षा विभाग ने राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से प्रोफेसर व एसोसिएट प्रोफेसर (नर्सिंग) के पदों पर चयनित सात अभ्यर्थियों को प्रदेशभर के राजकीय नर्सिंग कॉलेजों में प्रथम तैनाती दे दी है। जिनमें प्रोफेसर (नर्सिंग) के पद पर चयनित चक्रपाणी चतुर्वेदी को राजकीय नर्सिंग कॉलेज चम्पावत में प्रथम तैनाती दी गई है। इसी प्रकार एसोसिएट प्रोफेसर (नर्सिंग) के पद पर चयनित रोजलिन लिली जैन को राजकीय नर्सिंग कॉलेज टिहरी, दीपिका शर्मा को चम्पावत, स्वेता को बाजपुर, आशुतोष कुंवर को पिथौरागढ़, मीना को पौड़ी और ज्योति गोदियाल को राजकीय नर्सिंग कॉलेज कोडगी रूद्रप्रयाग में प्रथम तैनाती दी गई है।

    चयन बोर्ड से चयनित फैकल्टी सदस्यों की तैनाती से नर्सिंग कॉलेजों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को पठन-पाठन एवं प्रशिक्षण में अब किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी। इससे न केवल शिक्षण व्यवस्था सुदृढ़ होगी बल्कि छात्र-छात्राओं को किताबी ज्ञान के साथ-साथ बेहतर प्रशिक्षण भी मिल सकेगा।

    बयान–
    राज्य सरकार राजकीय नर्सिंग कॉलेजों में गुणवत्तापरक शिक्षा सुनिश्चत करने के लिये संकल्पित है। इस दिशा में सरकार ने संकाय सदस्यों के शत-प्रतिशत पदों को भरने का निर्णय लिया है। जिसके क्रम में चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से चयनित प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर (नर्सिंग) के सात अभ्यर्थियों को प्रथम तैनाती दे दी है। इससे पहले नर्सिंग कॉलेजों में 26 नर्सिंग ट्यूटरों को प्रथम तैनाती दी जा चुकी है। – डॉ. धन सिंह रावत, चिकित्सा शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड

  • दंत चिकित्साधिकारियों को मिला एसडीएसीपी लाभ

    दंत चिकित्साधिकारियों को मिला एसडीएसीपी लाभ

    स्वास्थ्य सचिवने आदेश जारी किए

    देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने दंत चिकित्साधिकारियों (Dental Surgeons) के पक्ष में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए उन्हें एसडीएसीपी (Special Duty Allowance Cum Promotion) का लाभ देने की औपचारिक मंजूरी प्रदान की है।
    स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार द्वारा शुक्रवार, 31 अक्टूबर 2025 को जारी आदेश में कहा गया है कि प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग के दंत शल्य चिकित्साधिकारियों को एसडीएसीपी का लाभ अनुमन्य किया जाता है।

    यह निर्णय शासन के पूर्व आदेश संख्या-654 (जुलाई 2016) और संख्या-154 (4 फरवरी 2019) के आधार पर लिया गया है। स्क्रीनिंग कमेटी एवं चिकित्सा शिक्षा अनुभाग-1, देहरादून की संस्तुति को स्वीकार करते हुए यह लाभ प्रदान करने की अनुमति दी गई है।

    स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त एवं प्रभावी बनाने के लिए निरंतर सुधार कर रही है। दंत चिकित्साधिकारियों को एसडीएसीपी लाभ देने की मांग लंबे समय से लंबित थी। यह निर्णय न केवल वित्तीय रूप से उन्हें लाभान्वित करेगा, बल्कि विभागीय मनोबल को भी ऊँचा करेगा।

    स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस निर्णय से राज्यभर के दंत चिकित्साधिकारियों को पदोन्नति संबंधी लाभ के साथ-साथ विशेष भत्ते का आर्थिक फायदा भी मिलेगा। इससे ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में कार्यकुशलता और सेवा भावना को बल मिलेगा।

    प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग से जुड़े कई दंत चिकित्सक पिछले कई वर्षों से इस लाभ की प्रतीक्षा कर रहे थे। एसडीएसीपी स्वीकृति के बाद उन्हें अब वित्तीय और पदोन्नति दोनों स्तरों पर समान अवसर प्राप्त होंगे। यह फैसला राज्य में चिकित्सकों की सेवा संतुलन व्यवस्था (Service Parity) की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

    दंत चिकित्सक समुदाय ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार ने वर्षों की प्रतीक्षा समाप्त कर दी है। यह फैसला स्वास्थ्य सेवाओं के लिए उत्साहवर्धक और प्रेरणादायी है।

  • विश्व शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित हुआ शिक्षक सम्मान समारोह

    विश्व शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित हुआ शिक्षक सम्मान समारोह

    राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह 2025 में कोटद्वार की शिक्षिका रश्मि उनियाल को “सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन सम्मान”
    पौड़ी जिले की नेहा मोहन और विकास कुमार को भी राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान

    कोटद्वार। शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली शिक्षिका रश्मि उनियाल को “राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह – 2025” में सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन सम्मान से नवाजा गया। यह सम्मान उन्हें उनके विद्यालय – विज्ञान विषय शिक्षिका, राजकीय उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय, ग्रास्टनगंज (कोटद्वार) – में उत्कृष्ट शिक्षण कार्य, नवीन शिक्षण विधियों के प्रयोग और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रदान किया गया।

    सम्मान समारोह का आयोजन चौधरी केहर सिंह एजुकेशनल ट्रस्ट द्वारा किया गया, जिसमें देशभर के विभिन्न राज्यों से शिक्षकों को आमंत्रित किया गया था। इस अवसर पर शिक्षाविदों, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्रों ने भाग लिया। समारोह में रश्मि उनियाल को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न और सम्मान पट्टिका भेंट की गई।

    रश्मि उनियाल ने अपने शिक्षण में तकनीकी और रचनात्मक तरीकों को अपनाकर विद्यार्थियों में सीखने की जिज्ञासा और आत्मविश्वास को बढ़ावा दिया है। उन्होंने विद्यालय में परियोजना आधारित शिक्षा, विज्ञान प्रयोगों के माध्यम से अवधारणाओं की स्पष्टता और टीमवर्क की भावना को विकसित करने पर विशेष जोर दिया है। उनके विद्यार्थियों ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर विद्यालय और क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

    सम्मान प्राप्त करने के बाद रश्मि उनियाल ने कहा—

    “यह सम्मान केवल मेरा नहीं, बल्कि मेरे विद्यार्थियों, अभिभावकों और पूरे विद्यालय परिवार की मेहनत का परिणाम है। यह मुझे और समर्पित होकर कार्य करने की प्रेरणा देता है ताकि शिक्षा को और अधिक प्रभावशाली और जीवनोन्मुख बनाया जा सके।”

    कार्यक्रम में पौड़ी गढ़वाल जिले से ही नेहा मोहन (राजकीय प्राथमिक विद्यालय, बड़गांव) और विकास कुमार (अ.उ.राजकीय इंटर कॉलेज, सिद्धपुर) को भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया। दोनों शिक्षकों को ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने और विद्यार्थियों में अनुशासन, रचनात्मकता तथा सामाजिक मूल्यों के विकास के लिए उनके प्रयासों के लिए सराहा गया।

    ट्रस्ट के अध्यक्ष ने कहा कि ऐसे शिक्षक समाज की नींव को मजबूत बनाते हैं और नई पीढ़ी को मूल्य-आधारित शिक्षा की दिशा में प्रेरित करते हैं। समारोह में देशभर के लगभग सौ शिक्षकों को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया, जिनमें विज्ञान, गणित, कला, प्राथमिक शिक्षा और विशेष शिक्षा के क्षेत्र के शिक्षक शामिल थे।

    इस अवसर पर शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, डिजिटल शिक्षण, और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावों पर भी एक परिचर्चा आयोजित की गई, जिसमें विशेषज्ञों ने शिक्षक प्रशिक्षण और विद्यालयी सुधारों पर अपने विचार साझा किए।

  • स्वास्थ्य सेवाओं को बल, 220 नये चिकित्सकों की पर्वतीय क्षेत्रों में तैनाती

    स्वास्थ्य सेवाओं को बल, 220 नये चिकित्सकों की पर्वतीय क्षेत्रों में तैनाती

    स्वास्थ्य विभाग में 220 नये चिकित्सक तैनात

    पर्वतीय व दूरस्थ क्षेत्रों में मजबूत होंगी स्वास्थ्य व्यवस्थाएं : डॉ. धन सिंह रावत

    देहरादून। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 220 नये चिकित्सकों को पहली तैनाती दे दी है। इनमें से अधिकांश चिकित्सकों को राज्य के पर्वतीय व दूरस्थ क्षेत्रों की चिकित्सा इकाइयों में भेजा गया है, जहां वर्षों से चिकित्सक पद रिक्त चल रहे थे।

    स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने जानकारी दी कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को नजदीक में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना है। इसी क्रम में चयनित चिकित्सकों को पर्वतीय जिलों के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, उप-केन्द्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में तैनात किया गया है।

    इन क्षेत्रों को मिली तैनाती

    तैनात चिकित्सकों को खासतौर पर चमोली, उत्तरकाशी, टिहरी, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, पिथौरागढ़, चम्पावत, बागेश्वर, अल्मोड़ा और नैनीताल जिलों के सुदूरवर्ती स्वास्थ्य केन्द्रों में भेजा गया है। इनमें देवाल, ग्वालदम, थराली, गैरसैंण, हर्षिल, गंगोत्री, मोरी, चिनियालीसैड़, जानकीचट्टी, फाटा, गुप्तकाशी, अदालीखाल, बूंगीधार, थल, धारचूला, मुनस्यारी, बेरीनाग, कपकोट, बैजनाथ, लमगड़ा, भिकियासैण, द्वाराहाट, मुक्तेश्वर आदि क्षेत्र शामिल हैं।

    लोगों को मिलेगा बड़ा लाभ

    डॉ. रावत ने कहा कि नये चिकित्सकों की नियुक्ति से सुदूर गांवों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच मजबूत होगी। अब स्थानीय लोगों को उपचार के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। साथ ही सरकार के “अंतिम गांव तक स्वास्थ्य सुविधा” पहुंचाने के संकल्प को भी बल मिलेगा।

  • पूर्व सैनिक परिवारों के लिए निःशुल्क डेंटल कैंप शुरू

    पूर्व सैनिक परिवारों के लिए निःशुल्क डेंटल कैंप शुरू

     देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने मंगलवार को मिलिट्री डेंटल सेंटर, देहरादून में पूर्व सैनिकों एवं उनके परिजनों के लिए आयोजित तीन दिवसीय निःशुल्क डेंटल कैंप का शुभारंभ किया। यह शिविर 19 से 21 अगस्त तक मुख्यालय उत्तराखण्ड सब एरिया के तत्वावधान में आयोजित हो रहा है।

    इस कैंप का उद्देश्य पूर्व सैनिकों एवं उनके आश्रितों को मौखिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और आवश्यक दंत चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम का आयोजन उत्तराखण्ड सब एरिया और मिलिट्री डेंटल सेंटर के संयुक्त प्रयास से किया गया, जिसमें स्टेशन यूनिट्स, ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक देहरादून व क्लेमेंट टाउन के डेंटल अफसरों एवं पैरा-डेंटल स्टाफ ने सक्रिय सहयोग दिया।

    कैंप शुभारंभ के अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि यह डेंटल कैंप हमारे वीर पूर्व सैनिकों और उनके परिजनों के अच्छे स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने की दिशा में एक अत्यंत सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों एवं उनके परिजनों को गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना हमारा दायित्व है।

    सैनिक

    राज्यपाल ने कहा कि आज का यह शिविर दंत स्वास्थ्य को समर्पित है। अक्सर हम दांतों और मुँह की स्वच्छता को छोटा विषय मानकर अनदेखा कर देते हैं, परंतु सच्चाई यह है कि ‘‘ओरल हेल्थ ही ओवरऑल हेल्थ’’ की कुंजी है। मुँह को शरीर का द्वार कहा गया है। यदि यह द्वार अस्वस्थ हो, तो पूरा शरीर बीमारियों का शिकार हो सकता है। उन्होंने पूर्व सैनिकों को इस शिविर का अधिकाधिक लाभ लेने का आह्वान किया।

    इस अवसर पर जीओसी सब एरिया मेजर जनरल एमपीएस गिल ने कहा कि यह कैंप पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति आभार और सेवा का प्रतीक है, जो उनके साथ हमारी प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है। डॉ. हिमांशु ऐरन ने दंत स्वास्थ्य से संबंधित पहलुओं पर महत्वपूर्ण जानकारियां उपस्थित लोगों को दी।

    इस दौरान कमांडेंट मिलिट्री हॉस्पिटल ब्रिगेडियर परीक्षित सिंह, स्टेशन कमांडर देहरादून ब्रिगेडियर आर एस थापा, ब्रिगेडियर प्रभाकरन, डिप्टी जीओसी, गोल्डन की डिवीजन क्लेमेंट टाउन, अध्यक्ष यूकेईएसएल, मेजर जनरल (से नि) एम.एल. असवाल, निदेशक सैनिक कल्याण ब्रिगेडियर अमृत लाल(से नि) सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी और पूर्व सैनिक उपस्थित रहे।

  • नवोदय विद्यालयों के छात्रों को मिलेगा पौष्टिक भोजन, अब मैन्यू तय करेगा शिक्षा निदेशालय

    नवोदय विद्यालयों के छात्रों को मिलेगा पौष्टिक भोजन, अब मैन्यू तय करेगा शिक्षा निदेशालय

    नवोदय विद्यालयों के छात्रों को मिलेगा पौष्टिक भोजन, अब मैन्यू तय करेगा शिक्षा निदेशालय

    छात्रों को पौष्टिक और गुणवत्ता युक्त भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अब प्रदेश के राजीव गांधी नवोदय विद्यालयों में शिक्षा निदेशालय स्वयं छात्रों के लिए भोजन का मैन्यू तय करेगा। यह निर्णय शिक्षा मंत्री के निर्देश पर लिया गया है।

    शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने बताया कि शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नवोदय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को ऐसा भोजन मिले जो न केवल पौष्टिक हो, बल्कि गुणवत्ता में भी सर्वोत्तम हो। उन्होंने कहा कि पहले भोजन मद में प्रति दिन प्रति छात्र 75 रुपये की व्यवस्था थी, जिसे बढ़ाकर 150 रुपये कर दिया गया। इसके बावजूद टेंडर कम दरों पर होने के कारण कई बार छात्रों को पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध न होने की शिकायतें सामने आ रही थीं।

    इन्हीं शिकायतों और समस्याओं को देखते हुए अब यह निर्णय लिया गया है कि शिक्षा निदेशालय स्तर से ही सभी विद्यालयों के लिए मानक मैन्यू तैयार किया जाएगा। इस मैन्यू में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि छात्रों को संतुलित आहार के रूप में पर्याप्त पोषण मिले। साथ ही भोजन की गुणवत्ता और मात्रा पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    शिक्षा निदेशक ने यह भी बताया कि मैन्यू के अनुसार भोजन व्यवस्था की समय-समय पर निगरानी की जाएगी। इसके लिए जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ) और संबंधित ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) को निरीक्षण की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, ताकि विद्यालयों में किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो सके और छात्र-छात्राओं को समय पर पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन मिलता रहे।

  • उत्तराखंड में आयुष्मान का लाभ यूपी के मरीजों को अब केवल इस कार्ड के साथ मिलेगा

    उत्तराखंड में आयुष्मान का लाभ यूपी के मरीजों को अब केवल इस कार्ड के साथ मिलेगा

    उत्तराखंड में यूपी के मरीजों के लिए आयुष्मान योजना का लाभ अब श्रमिक कार्ड पर निर्भर, फर्जीवाड़े पर लगी लगाम

    देहरादून। उत्तराखंड के अस्पतालों में अब उत्तर प्रदेश से आने वाले मरीजों को आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज तभी मिलेगा, जब उनके पास श्रमिक कार्ड होगा। यह नई व्यवस्था प्रदेश के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में प्रभावी रूप से लागू कर दी गई है। बिना श्रमिक कार्ड के मरीजों को आयुष्मान योजना के अंतर्गत इलाज की सुविधा नहीं दी जाएगी और उन्हें निजी खर्च पर उपचार कराना होगा।

    फर्जी कार्डों से अस्पतालों को हुआ नुकसान

    यह निर्णय पिछले कुछ वर्षों में सामने आए आयुष्मान योजना से जुड़ी गड़बड़ियों और फर्जीवाड़ों के चलते लिया गया है। उत्तराखंड के कई अस्पतालों में यह पाया गया कि उत्तर प्रदेश से आने वाले कई मरीजों ने फर्जी आयुष्मान कार्ड का उपयोग कर योजना का अनुचित लाभ उठाया। इससे अस्पतालों को निर्धारित भुगतान नहीं मिल पाया और सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।

    इस स्थिति के चलते कुछ सरकारी और निजी अस्पतालों ने यूपी के मरीजों के लिए आयुष्मान योजना के तहत इलाज देना बंद कर दिया था। केवल आपातकालीन मामलों में ही छूट दी जाती रही। अब इन समस्याओं के समाधान और योजनागत पारदर्शिता के लिए श्रमिक कार्ड को अनिवार्य कर दिया गया है।

    दून अस्पताल में हर दिन आते हैं यूपी से मरीज

    दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आर.एस. बिष्ट ने बताया कि अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 65 से 70 मरीज आयुष्मान योजना के तहत भर्ती होते हैं, जिनमें करीब 10 मरीज उत्तर प्रदेश से आते हैं। अब इन मरीजों को पहले से यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके पास वैध श्रमिक कार्ड हो, क्योंकि सॉफ़्टवेयर में योजना की मंज़ूरी तभी मिलती है जब कार्ड की जानकारी पोर्टल पर अपडेट हो।

    डॉ. बिष्ट ने कहा कि यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश सरकार के स्तर पर तय की गई है और अब मरीजों का डाटा तभी स्वीकृत होता है जब वह सत्यापित और पंजीकृत हो। इससे फर्जी कार्डों के प्रयोग की गुंजाइश नहीं रहेगी।

    देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर पर सबसे अधिक प्रभाव

    उत्तराखंड के देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर और पौड़ी जैसे ज़िले यूपी से सटे हैं, जहां उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते हैं। पहले इन्हें आयुष्मान योजना के अंतर्गत इलाज में कोई अड़चन नहीं होती थी, लेकिन अब श्रमिक कार्ड की अनिवार्यता के कारण उन्हें अपनी पात्रता प्रमाणित करनी होगी।

    सुव्यवस्था और पारदर्शिता की दिशा में कदम

    नए दिशा-निर्देशों का उद्देश्य न केवल योजना के दुरुपयोग को रोकना है, बल्कि वास्तव में पात्र और ज़रूरतमंद श्रमिकों को इस सुविधा का लाभ देना है। आयुष्मान योजना गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए एक महत्त्वपूर्ण स्वास्थ्य सुरक्षा कवच है, जिसे पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ लागू करना आवश्यक है।

  • उत्तराखंड में बिना रजिस्ट्रेशन डॉक्टरों की प्रैक्टिस पर सख्ती, जल्द होगी कार्रवाई

    उत्तराखंड में बिना रजिस्ट्रेशन डॉक्टरों की प्रैक्टिस पर सख्ती, जल्द होगी कार्रवाई

    बिना पंजीकरण या नवीनीकरण के प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टरों का इलाज होगा– डॉ. आर. राजेश कुमार

    उत्तराखंड सरकार ने राज्य में चिकित्सा सेवा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने और आम जनता की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब प्रदेश के किसी भी चिकित्सक, चाहे वह सरकारी सेवा में हो या निजी क्षेत्र में कार्यरत बिना पंजीकरण या नवीनीकरण के प्रैक्टिस नहीं कर सकेगा। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इस संबंध में एक सख्त आदेश जारी किया है। सभी जनपदों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में कार्यरत सभी डॉक्टरों की सूची तैयार करें और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी बिना पंजीकरण प्रैक्टिस न कर रहा हो। जिन डॉक्टरों ने अब तक नवीनीकरण नहीं कराया है उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

    डॉक्टरों

    नेशनल मेडिकल कमीशन एक्ट 2019
    स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार द्वारा हस्ताक्षरित आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह कदम नेशनल मेडिकल कमीशन एक्ट 2019 (पूर्ववर्ती इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट 1956) के प्रावधानों के अंतर्गत उठाया गया है। यह अधिनियम देशभर में चिकित्सा सेवा को नियंत्रित करता है और इसके तहत केवल वैध रूप से पंजीकृत चिकित्सक ही प्रैक्टिस कर सकते हैं। स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने को लेकर गंभीर है। उन्होंने कहा कि कई चिकित्सक वर्षों से बिना पंजीकरण प्रैक्टिस कर रहे हैं, जिससे सेवाओं की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लग रहे थे। साफ कर दिया है कि किसी भी स्थिति में बिना वैध पंजीकरण प्रैक्टिस नहीं चलने दी जाएगी।

    जनता के विश्वास को भी मज़बूत करेगा
    स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया राज्य में ऐसी कई शिकायतें मिली थीं कि कुछ लोग डॉक्टर के नाम पर सेवा दे रहे हैं, जबकि उनके पास वैध डिग्री या पंजीकरण नहीं है। यह आदेश न केवल ऐसे लोगों पर रोक लगाएगा बल्कि जनता के विश्वास को भी मज़बूत करेगा।

    पंजीकरण प्रक्रिया होगी सरल और तेज़
    राज्य में बिना पंजीकरण प्रैक्टिस कर रहे हैं डॉक्टर या नवीनीकरण नहीं कराया है। अब सभी को कार्रवाई के दायरे में लाया जाएगा। चिकित्सा परिषद को डॉक्टरों की अद्यतन सूची जनपदों को भेजने और बिना पंजीकरण प्रैक्टिस करने वालों की सूची सार्वजनिक करने के निर्देश दिए गए हैं। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को भी सरल और ऑनलाइन बनाया जा रहा है।

    जनस्वास्थ्य और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान
    स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि यह निर्णय औपचारिकता नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य की सुरक्षा और सेवा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने का प्रयास है। शासन की मंशा है कि कोई भी मरीज बिना पंजीकरण प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर से इलाज न कराए।

    निर्देशों का पालन न करने पर होगी कार्रवाई
    सीएमओ को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे डॉक्टरों की प्रमाणपत्रों की जांच कर सुनिश्चित करें कि कोई भी बिना पंजीकरण प्रैक्टिस न कर रहा हो। निर्देशों की अवहेलना पर संबंधित डॉक्टरों को सेवा से पृथक करने या नोटिस जारी करने को कहा गया है। जनपदवार प्रगति रिपोर्ट साप्ताहिक रूप से शासन को भेजी जाएगी।

    स्वास्थ्य सचिव ने कहा राज्य में मरीजों को केवल पंजीकृत और प्रमाणित चिकित्सकों से इलाज मिलेगा। चिकित्सा परिषद की भूमिका और डॉक्टरों की जिम्मेदारी दोनों ही अब और अहम होंगी।