Category: स्वास्थ्य

  • भराड़ीसैंण से सीएम धामी का संदेश: हर घर योग, हर जन निरोग”

    भराड़ीसैंण से सीएम धामी का संदेश: हर घर योग, हर जन निरोग”

    सीएम संग आठ देशों के प्रतिनिधियों ने भराड़ीसैंण में किया योगाभ्यास
    मुख्यमंत्री ने राज्य में योग नीति का किया शुभारंभ
    गैरसैंण की धरती से मुख्यमंत्री का उदघोष : उत्तराखंड को बनाएंगे योग और वेलनेस की वैश्विक राजधानी
    गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों में एक-एक स्पिरिचुअल इकोनॉमिक ज़ोन की होगी स्थापना

     

    भराड़ीसैंण। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को भराड़ीसैंण, गैरसैंण स्थित विधानसभा परिसर में 11वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।
    मुख्यमंत्री ने इस दौरान योग गुरु पद्मश्री स्वामी भारत भूषण एवं 8 देशों के डेलिगेट्स के साथ योग किया।
    योग कार्यक्रम का शुभारंभ शंखनाद एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शुरू हुआ।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने योग नीति पर आधारित पुस्तिका का विमोचन करते हुए राज्य में योग नीति का औपचारिक शुभारंभ भी किया। उन्होंने “एक वृक्ष, योग के नाम” कार्यक्रम के अंतर्गत विधानसभा परिसर में सेब का पौधा भी लगाया।

    सीएम

    इस दौरान मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य सरकार शीघ्र ही प्रदेश में आयुर्वेदिक एवं प्राकृतिक चिकित्सा, योग और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों में एक-एक स्पिरिचुअल इकोनॉमिक ज़ोन की स्थापना करेगी। उन्होंने कहा हम राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में दो नए नगर बसाने जा रहे हैं, जो योग, आयुर्वेद और अध्यात्म के केंद्र बनकर वैश्विक मानचित्र पर राज्य की विशेष पहचान स्थापित करेंगे। जिसमें सम्पूर्ण विश्व से वेलनेस के क्षेत्र में काम करने वाले बड़े ग्रुप्स, आध्यात्मिक गुरुओं, संस्थानों को यहाँ आमंत्रित किया जायेगा।

    सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य का केंद्र है भराड़ीसैंण

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 11वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सभी विदेशी मेहमानों के सान्निध्य ने इस आयोजन को वैश्विक पहचान मिलेगी।
    उन्होंने कहा भराड़ीसैंण, गीष्मकालीन राजधानी होने के साथ समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य का केंद्र भी है। उन्होंने कहा 8 मित्र राष्ट्रों के प्रतिनिधियों के साथ किया गया सामूहिक योगा– अभ्यास, देवभूमि उत्तराखंड को योग और अध्यात्म की वैश्विक राजधानी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

    सीएम
    उत्तराखंड को योग और वेलनेस की वैश्विक राजधानी बनाएगी योग नीति

    मुख्यमंत्री ने कहा उत्तराखंड देवभूमि के साथ योग और अध्यात्म की भूमि भी है। प्रधानमंत्री की प्रेरणा से राज्य सरकार ने देश की पहली योग नीति 2025 को राज्य में लागू किया है। योग नीति उत्तराखंड को योग और वेलनेस की वैश्विक राजधानी के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। जिसके तहत प्रदेश में योग एवं ध्यान केंद्र विकसित करने पर अधिकतम 20 लाख रुपए तक की सब्सिडी प्रदान की जा रही है। प्रदेश में योग, ध्यान और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देने हेतु 10 लाख रुपए तक के अनुदान का प्रावधान भी किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार का संकल्प है कि 2030 तक राज्य में पाँच नए योग हब की स्थापना की जाए और मार्च 2026 तक राज्य के सभी आयुष हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर में योग सेवाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाएगी।

    योग करता है एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार

    मुख्यमंत्री ने कहा कि योग हमारे मन, आत्मा और शरीर के बीच पूर्ण सामंजस्य स्थापित करता है। योग हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के साथ मानव जीवन को आंतरिक शांति, मानसिक संतुलन और आध्यात्मिक स्थिरता प्रदान करता है। योग के विभिन्न आसनों और प्राणायाम से शरीर और मन को तनाव से मुक्त कर सकते हैं। योग मन की एकाग्रता बढ़ाने के साथ जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का भी संचार होता है।

    सीएम
    योग ने किया विश्व को एक सूत्र में पिरोने का कार्य

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरा विश्व, योग को जीवन दर्शन के रूप में भी अपना रहा है। योग ने पूरे विश्व में जाति, भाषा, धर्म और भौगोलिक सीमाओं को पार कर मानव समाज को जोड़ने का काम किया है। योग वैश्विक एकता, समरसता और बंधुत्व का सेतु बनकर समस्त विश्व को एक सूत्र में पिरोने का कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री की दूरदर्शी सोच और प्रेरणादायक नेतृत्व ने योग को ग्लोबल कनेक्टिविटी और मानवता की सेहत का मंत्र बनाकर विश्वपटल पर एक नई पहचान दिलाई है।

    पलायन की समस्या के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है राज्य सरकार

    मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य में रोजगार सृजन और पलायन की समस्या के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य में स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। राज्य सरकार ने स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अधिक से अधिक साधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य में स्ट्रैटेजिक एडवाइजरी कमेटी का भी गठन किया है। ये कमेटी प्रदेश के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए नवाचार को बढ़ावा देने का कार्य करेगी। हम युवाओं को उनके कौशल के अनुरूप पहाड़ में ही रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य कर रहे हैं।

    विद्यार्थियों से मिलने उनके बीच पहुंचे मुख्यमंत्री

    भराड़ीसैंण में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में सम्मिलित होने से पहले मुख्यमंत्री विद्यार्थियों और स्थानीय लोगों के बीच पहुंचे। उन्होंने लोगों से संवाद कर उनका हालचाल जाना और छात्रों से भी मुलाकात की। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर छात्रों में विशेष उत्साह और उमंग देखने को मिला । मुख्यमंत्री ने सभी को योग के महत्व से अवगत कराया और स्वस्थ जीवन के लिए योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने का संदेश दिया।

    इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डॉ धन सिंह रावत, भारत में मैक्सिको के राजदूत फेडेरिको सालास, मेक्सिको दूतावास में आर्थिक मामलों के प्रमुख रिकार्डो डेनियल डेलगाडो, भारत में फिजी उच्चायोग के हाई कमिश्नर जगन्नाथ सामी, भारत में नेपाल के राजदूत डॉ शंकर प्रसाद शर्मा, भारत में सूरिनाम के राजदूत अरुणकोमर हार्डियन, भारत में मंगोलिया के राजदूत डंबाजाविन गैंबोल्ड, भारत में लातविया दूतावास में डिप्टी हेड ऑफ मिशन मार्क्स डीतॉन्स, भारत के श्रीलंका उच्चायोग के मिनिस्टर काउंसलर लक्ष्मेंद्र गेशन डिसनायके, रूसी दूतावास में प्रथम सचिव सुश्री क्रिस्टिना अनानीना एवं तृतीय सचिव सुश्री कैटरीना लज़ारेवा, विधायक अनिल नौटियाल, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. विनय रुहेला, सचिव दीपेन्द्र कुमार चौधरी, गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे, सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी, जिलाधिकारी चमोली संदीप तिवारी, पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

  • *योग के माध्यम से एकजुट हो रहा विश्व*– डा.रमेश पोखरियाल ‘निशंक’

    *योग के माध्यम से एकजुट हो रहा विश्व*– डा.रमेश पोखरियाल ‘निशंक’

    जब मन वश में होता है, इंद्रियाँ शांत होती हैं, और आत्मा परमात्मा का अनुभव करने के लिए भीतर की ओर मुड़ती है—वही योग की सच्ची अवस्था है।
    भारतीय दर्शन की अटूट परंपरा में, योग हमेशा से आत्मा की मुक्ति के उद्देश्य से की जाने वाली एक आध्यात्मिक प्रथा से कहीं अधिक रहा है। यह जीवन जीने का एक जीवंत, श्वास लेने वाला तरीका भी है जो दुनिया भर में शांति, स्वास्थ्य और सद्भाव को बढ़ावा देता है। जिस प्रकार पवित्र गंगा हिमालय से निकलकर पूरे भारत को पोषित करती है, उसी प्रकार योग भी भारत की ऋषि परंपरा से प्रवाहित होता है और अब अपनी कालातीत ज्ञान से पूरी दुनिया का पोषण कर रहा है।
    कुछ साल पहले, यूक्रेन के कीव में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाते हुए, राजदूत मनोज भारती के साथ मैंने सार्वजनिक रूप से कहा था, “आज, योग एक उत्सव है। कल, यह दुनिया भर में एक जन आंदोलन बन जाएगा।”
    कीव के उस खुले मैदान में खड़े होकर, जब सैकड़ों यूक्रेनी नागरिक भक्ति और आनंद के साथ योग अभ्यास में शामिल हुए, तो यह मेरे लिए स्पष्ट था कि योग जल्द ही सीमाओं, धर्मों और राजनीति को पार कर मानव एकता की एक सार्वभौमिक अभिव्यक्ति बन जाएगा।
    अंतर्ज्ञान का वह क्षण अब एक वैश्विक वास्तविकता बन गया है। जैसा कि हम 2025 में 11वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मना रहे हैं, योग का अभ्यास लगभग 200 देशों में किया जाता है, जिसमें 44 इस्लामिक राष्ट्र भी शामिल हैं। यह केवल एक शारीरिक अनुशासन का प्रसार नहीं है – यह भारत की आध्यात्मिक विरासत का दुनिया को एक उपहार के रूप में उदय है।
    इस असाधारण परिवर्तन के केंद्र में भारत के दूरदर्शी नेता – प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी हैं। उनकी अटूट प्रतिबद्धता, वैश्विक दूरदर्शिता और गहरी सांस्कृतिक गर्व ने योग को एक प्राचीन परंपरा से एक आधुनिक वैश्विक चेतना आंदोलन में बदल दिया।
    (वैदिक अग्नि अनुष्ठान), सामूहिक ध्यान, वैदिक मंत्रों का जाप, और आंतरिक शांति तथा वैश्विक सद्भाव के मार्ग के रूप में वैदिक ज्ञान की शिक्षाएँ। लक्ष्य केवल आध्यात्मिक अभ्यास नहीं है, बल्कि सामूहिक मानव चेतना का पुनरुद्धार है – जहाँ व्यक्ति प्रकृति और ब्रह्मांड के साथ तालमेल बिठाता है। यह आंदोलन उसी लौ को आगे बढ़ाता है जो योग ने पूरी दुनिया में प्रज्वलित की है।
    योग, आखिरकार, व्यक्ति तक ही सीमित नहीं है। इसके प्रभाव परिवारों, समुदायों, राष्ट्रों और अंततः पूरे ग्रह में फैलते हैं। यह संघर्ष पर करुणा, भोग पर आत्म-संयम, स्वार्थ पर सेवा सिखाता है। यही कारण है कि आज योग केवल व्यायाम का एक रूप नहीं है – यह वैश्विक चेतना का एक स्तंभ है।
    जब हम इस वर्ष के योग दिवस के विषय “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग” पर विचार करते हैं, तो हमें याद दिलाया जाता है कि योग आंतरिक शुद्धता और बाहरी स्थिरता के बीच का सेतु है। एक स्वस्थ पृथ्वी और एक स्वस्थ इंसान गहराई से जुड़े हुए हैं। योग वह कड़ी है जो इस संबंध को सामंजस्य बिठाती है, जीवन के लिए एक संतुलित, करुणामय और स्थायी दृष्टिकोण प्रदान करती है।
    प्राचीन हिमालयी गुफाओं से जहाँ संतों ने ध्यान किया था, संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक मंच तक, योग की यात्रा भारत की सॉफ्ट पावर की कहानी है – शांत, गहरी और परिवर्तनकारी।
    आज, योग और वेदों के माध्यम से, भारत एक बार फिर विश्वगुरु – एक वैश्विक शिक्षक – के रूप में उभर रहा है। यह केवल गर्व का क्षण नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी का आह्वान भी है। आइए हम केवल योग का जश्न न मनाएं – आइए हम इसे जिएं। आइए हम इसे आत्मसात करें। क्योंकि योग आसनों की एक श्रृंखला नहीं है, यह स्वयं से परम तक की एक मौन यात्रा है। वेद केवल ग्रंथ नहीं हैं बल्कि शांति और सार्वभौमिक बुद्धि की जीवंत कंपन हैं।
    प्रधान मंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व के कारण, भारत आज केवल एक तकनीकी और आर्थिक शक्ति नहीं है, बल्कि दुनिया के लिए एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक प्रकाश है। एक ऐसा प्रकाश जो बल से नहीं, बल्कि जागरण से मार्गदर्शन करता है – जो विजय से नहीं, बल्कि जुड़ाव से प्रेरित करता है।
    यह भारत का संदेश है – शाश्वत, निस्वार्थ और सार्वभौमिक।
    आइए दुनिया योग के माध्यम से उठे, श्वास ले और एकजुट हो।
    (लेखक भारत के पूर्व शिक्षा मंत्री और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हैं।)

  • राज्य के नर्सिंग कॉलेजों को बड़ी सौगात — 26 नये नर्सिंग ट्यूटरों की नियुक्ति

    राज्य के नर्सिंग कॉलेजों को बड़ी सौगात — 26 नये नर्सिंग ट्यूटरों की नियुक्ति

    नर्सिंग कॉलेजों को मिले 26 नर्सिंग ट्यूटर

    ‘कॉलेजों में मजबूत शैक्षणिक माहौल बनेगा’

    देहरादून। उत्तराखंड के चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित राजकीय नर्सिंग कॉलेजों को एक बड़ी सौगात मिली है। अब इन कॉलेजों में 26 नर्सिंग ट्यूटर्स की नियुक्ति से शैक्षणिक माहौल को मजबूती मिलेगी। राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से चयनित इन नर्सिंग ट्यूटरों को प्रदेश के विभिन्न राजकीय नर्सिंग कॉलेजों में प्रथम तैनाती प्रदान कर दी गई है। यह नियुक्तियां राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता का हिस्सा हैं, जिसके अंतर्गत प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने और मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इन ट्यूटरों की नियुक्ति से नर्सिंग कॉलेजों में शैक्षणिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी और छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण व व्यावहारिक प्रशिक्षण मिल सकेगा, जिससे राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को भी मजबूती मिलेगी।

    सरकार की मंशा है कि न केवल मेडिकल कॉलेज बल्कि नर्सिंग कॉलेज भी अत्याधुनिक संसाधनों और कुशल फैकल्टी से युक्त हों, ताकि आने वाले समय में प्रदेश को योग्य स्वास्थ्यकर्मी मिल सकें। इसी दिशा में कार्य करते हुए चिकित्सा शिक्षा विभाग ने राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड द्वारा चयनित 26 नर्सिंग ट्यूटरों को आठ राजकीय नर्सिंग कॉलेजों में प्रथम नियुक्ति दे दी है। इन कॉलेजों में राजकीय नर्सिंग कॉलेज अल्मोड़ा, बाजपुर, चमोली, चम्पावत, देहरादून, हल्द्वानी, पिथौरागढ़ और टिहरी शामिल हैं।

    चयन बोर्ड द्वारा नर्सिंग ट्यूटर पद पर चयनित अभ्यर्थियों को उनके कार्यक्षेत्र आवंटित कर दिए गए हैं। इसमें किरन को राजकीय नर्सिंग कॉलेज अल्मोड़ा में, स्वेता, सुरभी नेगी, राहुल राणा, ज्योति भनारी, अनुज कुमार और सुधांशु पटेल को बाजपुर में, अंकित तिवारी और अभिषेक नेगी को चमोली में, सौरभ कुमार, दिव्या चौहान, धीरेंद्र सिंह पंवार, रोहित सिंह, सुरिचा, मोहम्मद शहजाद, मानसी चौहान और नरेंद्र दत्त रतूड़ी को चम्पावत में, एकता उपाध्याय, मानसी दबोला, अंजली डिमरी, संदीप सिंह नेगी, दिग्विजयसिंह कठैत और प्रशांत रावत को देहरादून में, हेमलता को हल्द्वानी में, रश्मि कन्याल को पिथौरागढ़ में और जयदीप सिंह गुसाईं को टिहरी स्थित राजकीय नर्सिंग कॉलेज में प्रथम तैनाती दी गई है।

    चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इस नियुक्ति प्रक्रिया पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इन ट्यूटरों की तैनाती से न केवल राजकीय नर्सिंग कॉलेजों में शिक्षकों की कमी दूर होगी, बल्कि कॉलेजों में शैक्षणिक माहौल भी बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि नर्सिंग शिक्षा संस्थानों में छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण प्रदान किया जाए, जिससे वे भविष्य में समाज की स्वास्थ्य सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।

    डॉ. रावत ने सभी नवनियुक्त ट्यूटरों को शुभकामनाएं देते हुए यह भी आशा जताई कि वे समर्पण और निष्ठा के साथ कार्य करेंगे तथा राज्य की नर्सिंग शिक्षा को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तराखंड सरकार चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हेतु बहुआयामी कदम उठा रही है, जिनमें आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता, फैकल्टी की नियुक्ति, प्रशिक्षण कार्यक्रमों की गुणवत्ता में सुधार और शोध को प्रोत्साहन शामिल है।

    राज्य सरकार प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता को लगातार बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी संकल्प के तहत प्रदेश के विभिन्न राजकीय नर्सिंग कॉलेजों में 26 नवनियुक्त नर्सिंग ट्यूटरों को प्रथम तैनाती दी गई है। इससे न केवल फैकल्टी की कमी की पूर्ति होगी, बल्कि इससे कॉलेजों में शैक्षणिक गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी और नर्सिंग छात्र-छात्राओं को व्यावहारिक और गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्राप्त हो सकेगी।

    – डॉ. धन सिंह रावत, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड

  • 21 जून को भराड़ीसैंण में होगा योग दिवस का मुख्य आयोजन

    21 जून को भराड़ीसैंण में होगा योग दिवस का मुख्य आयोजन

    भराड़ीसैंण में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का भव्य आयोजन: सीएम धामी के साथ 10 देशों के राजदूत और 1000 प्रतिभागी होंगे शामिल
    सीएम के साथ 10 देशों के राजदूत सहित एक हजार प्रतिभागी होंगे शामिल

    देहरादून। आगामी 21 जून को पूरे देशभर की तरह उत्तराखंड में भी अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस बड़े ही भव्य और व्यापक स्तर पर मनाया जाएगा। इस बार राज्य स्तरीय मुख्य आयोजन चमोली जनपद स्थित भराड़ीसैंण विधानसभा परिसर में आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि इसमें उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के साथ-साथ 10 देशों के राजदूत भी प्रतिभाग करेंगे। यह पहली बार है जब भराड़ीसैंण में इतने बड़े स्तर का आयोजन हो रहा है, जिसमें देश-विदेश से सम्मानित अतिथि भाग लेंगे।

    इस आयोजन की तैयारियों की जानकारी देते हुए आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाएं निदेशालय के निदेशक डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस उत्तराखंड के सभी जनपदों, नगरों और गांवों में मनाया जाएगा, लेकिन मुख्य आयोजन स्थल भराड़ीसैंण में इसकी भव्यता और गरिमा विशेष रूप से देखने को मिलेगी। भराड़ीसैंण विधानसभा परिसर में आयोजित इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं योगाभ्यास में भाग लेंगे, साथ ही 10 देशों के राजदूत भी कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। इन सभी विशिष्ट अतिथियों के 20 जून की दोपहर तक भराड़ीसैंण पहुंचने की संभावना है।

    आयोजन में प्रतिभाग करने वालों की कुल संख्या लगभग एक हजार से अधिक होगी, जिनमें विभिन्न विभागों के अधिकारी, स्कूली छात्र, एनएसएस, एनसीसी, नेहरू युवा केंद्र के स्वयंसेवक, योग प्रशिक्षक और स्थानीय नागरिक शामिल होंगे। ऐसे बड़े आयोजन को सफल बनाने के लिए शासन और प्रशासन ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा, आवागमन, ठहरने, खानपान और योग प्रदर्शन की व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। संबंधित विभागों को अपनी जिम्मेदारियों का ब्योरा दे दिया गया है और सभी तैयारियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

    डॉ. जोगदंडे ने यह भी बताया कि 21 जून को प्रदेश के हर जिले, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर योग दिवस के कार्यक्रम आयोजित होंगे, जिसमें लाखों लोग योगाभ्यास करेंगे। योग के प्रचार-प्रसार के लिए पहले से ही विभिन्न संस्थाओं और स्कूलों में अभ्यास सत्र शुरू किए जा चुके हैं।

    उन्होंने कहा कि भारत ने योग के रूप में संपूर्ण विश्व को आरोग्य और स्वस्थ जीवन का मार्ग दिखाया है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने योग को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने की पहल की थी। उनके प्रयासों से आज पूरी दुनिया में योग की स्वीकार्यता और लोकप्रियता बढ़ी है। इसी क्रम में इस वर्ष का 11वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस उत्तराखंड में विशेष रूप से यादगार बनने जा रहा है, क्योंकि इसका मुख्य आयोजन राज्य के सुंदर और शांतिपूर्ण स्थान भराड़ीसैंण में हो रहा है।

    मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने इस आयोजन को लेकर प्रदेशवासियों से भी अपील की है कि वे इस दिन अधिक से अधिक संख्या में योग दिवस में भाग लें और स्वस्थ जीवन की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि यह मानसिक और आत्मिक शांति का भी माध्यम है। उत्तराखंड, जो ऋषियों और मुनियों की तपोभूमि रहा है, वहां से योग का यह संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचाना गर्व की बात है।

    इस आयोजन के माध्यम से उत्तराखंड न केवल योग की संस्कृति को प्रोत्साहन देगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान और महत्ता को भी स्थापित करेगा।

    इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार इस आयोजन को पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास से भी जोड़ने की दिशा में कार्य कर रही है। कार्यक्रम स्थल पर प्लास्टिक मुक्त वातावरण सुनिश्चित किया जाएगा और प्रतिभागियों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष संदेश दिए जाएंगे। साथ ही स्थानीय सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन भी किया जाएगा, जिससे योग के साथ-साथ प्रदेश की लोकसंस्कृति को वैश्विक मंच पर पहचान मिलेगी।

  • कोविड-19: स्वास्थ्य सचिव की अपील – अफवाहों से रहें सावधान

    कोविड-19: स्वास्थ्य सचिव की अपील – अफवाहों से रहें सावधान

    देहरादून। देशभर में कोविड–19 के मामलों में हालिया वृद्धि को देखते हुए उत्तराखंड सरकार सतर्क हो गई है।
    राज्य के सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, डॉ. आर. राजेश कुमार ने विभागीय उच्च अधिकारियों के साथ कोविड-19 प्रबंधन को लेकर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की।

    बैठक में उन्होंने अधिकारियों को किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखने और किसी भी स्तर पर कोताही न बरतने के निर्देश दिए। डॉ. कुमार ने कहा कि कोविड-19 प्रबंधन की सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह से सक्रिय और दुरुस्त रहनी चाहिए।

    बैठक में महानिदेशक चिकित्सा डॉ सुनीता टम्टा, निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ आशुतोष सयाना, असिस्टेंट डारेक्टर डॉ पंकज सिंह, सीएमओ देहरादून डॉ मनोज शर्मा, सीएमएस दून मेडिकल कॉलेज डॉ आरएस बिष्ट, सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

    स्वास्थ्य सचिव बोले: हर संभावित चुनौती के लिए हम तैयार

    “कोविड-19 के मामलों में देशभर में आई हालिया वृद्धि को देखते हुए उत्तराखंड राज्य सरकार पूरी तरह सतर्क है। राज्य में अभी स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन हमें किसी भी संभावित चुनौती के लिए तैयार रहना चाहिए। इस समय घबराने की नहीं, बल्कि सतर्कता बरतने और सजग रहने की आवश्यकता है। हमारा प्रयास है कि राज्य के हर अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र और मेडिकल कॉलेज में कोविड-19 से संबंधित सभी आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित रहे — चाहे वह आइसोलेशन बेड हों, ऑक्सीजन सप्लाई की व्यवस्था हो या प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता। इसके अलावा हम यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि सर्विलांस सिस्टम मजबूत हो, जांच व्यवस्था में कोई कमी न हो और जरूरत पड़ने पर तेजी से कार्रवाई की जा सके। हमारी रैपिड रिस्पांस टीमें प्रशिक्षित और तैयार हैं। मैं राज्य के नागरिकों से अपील करता हूं कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों से दूर रहें और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। कोविड-19 से बचाव के लिए मास्क पहनना, हाथों की स्वच्छता बनाए रखना, भीड़भाड़ से बचना और लक्षण होने पर समय पर डॉक्टर से परामर्श लेना बेहद जरूरी है।

    हम सभी को एकजुट होकर जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभानी है ताकि हम न केवल खुद को, बल्कि अपने परिवार और समाज को भी सुरक्षित रख सकें। यह समय अनुशासन और सहयोग का है, न कि लापरवाही का। राज्य सरकार हर स्तर पर आपके स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”

    चिकित्सालयों और मेडिकल कॉलेजों में पूर्ण व्यवस्थाओं के निर्देश

    राज्य के सभी सरकारी और निजी चिकित्सालयों व मेडिकल कॉलेजों को निर्देशित किया गया है कि वे कोविड मरीजों के उपचार के लिए आइसोलेशन बेड, ऑक्सीजन सिलेंडर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, बाइपैप मशीन, वेंटिलेटर, ICU बेड, ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट और आवश्यक दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करें।

    सर्विलांस और जांच व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश

    सभी जिलों को कोविड-19 के संभावित मामलों की निगरानी को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सभी जांच केंद्रों में रैपिड टेस्ट किट और आरटी-पीसीआर किट की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।

    ILI (इन्फ्लुएंजा जैसे लक्षण), SARI (गंभीर तीव्र श्वसन संक्रमण) और कोविड मामलों की अनिवार्य रिपोर्टिंग की जाएगी और इस पर निरंतर निगरानी रखी जाएगी। सभी सरकारी और निजी अस्पतालों एवं लैब को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि वे प्रतिदिन इन मामलों की रिपोर्ट इंटीग्रेटेड हेल्थ इन्फॉर्मेशन पोर्टल (IHIP) पर साझा करें।

    रैपिड रिस्पांस टीम पूरी तरह तैयार रहे

    IDSP कार्यक्रम के अंतर्गत गठित रैपिड रिस्पांस टीमों को किसी भी असामान्य परिस्थिति के लिए प्रशिक्षित और तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। कोविड लक्षणों वाले सभी रोगियों की जांच अनिवार्य रूप से की जाएगी और कोविड पॉजिटिव नमूनों को Whole Genome Sequencing (WGS) के लिए संबंधित प्रयोगशालाओं में भेजा जाएगा।

    जनजागरूकता और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी

    सभी स्वास्थ्य कर्मियों को कोविड-19 प्रबंधन और प्रतिक्रिया के लिए पुनः प्रशिक्षित किया जाएगा। साथ ही, जनता को सतर्क करने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा, जिसमें कोविड-19 से बचाव के लिए अपनाए जाने वाले व्यवहार (Do’s & Don’ts) के बारे में जानकारी दी जाएगी। राज्य सरकार कोविड-19 से बचाव के लिए पूरी तरह सतर्क और तैयार है, और जनता से अपील करती है कि वह जिम्मेदारी से उचित व्यवहार अपनाएं तथा अफवाहों से बचें।

    कोविड-19 से बचाव हेतु क्या करें और क्या न करें :-

    क्या करें:

    1. छींकते/खांसते समय नाक और मुंह को रूमाल या टिश्यू से ढकें।
    2. भीड़-भाड़ वाले स्थानों से बचें।
    3. हाथों को साबुन-पानी से बार-बार धोएं।
    4. पर्याप्त मात्रा में पानी व पौष्टिक आहार लें।
    5. लक्षण होने पर चिकित्सकीय परामर्श लें और उसी अनुसार दवा लें।
    6. संक्रमित होने की आशंका पर दूसरों से दूरी बनाए रखें।
    7. बच्चों, बुजुर्गों और गंभीर रोगियों का विशेष ध्यान रखें।

    क्या न करें :

    1. प्रयोग किए गए टिश्यू या रूमाल का दोबारा उपयोग न करें।
    2. हाथ मिलाने से बचें।
    3. लक्षणग्रस्त लोगों के संपर्क में न आएं।
    4. बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लें।
    5. बार-बार आंख, नाक और मुंह न छुएं।
    6. सार्वजनिक स्थानों पर थूकने से बचें।

  • एम्स ने रचा इतिहास: ओपीडी सेवाओं में ‘सिफर से शिखर’ तक का सफर

    एम्स ने रचा इतिहास: ओपीडी सेवाओं में ‘सिफर से शिखर’ तक का सफर

    एम्सः ओपीडी सेवाओं में सिफर से शिखर तक रचा इतिहास
    12 साल पहले हुई थी ओपीडी सेवाओं की शुरूआत
    मैनुअली नाम अंकित करने से लेकर ऑनलाईन अपाॅइंटमेंट तक का सफर

    56 लाख से अधिक रोगियों का हो चुका एम्स की ओपीडी में पंजीकरण

     

    ऋषिकेश। वर्ष 2013 में ओपीडी सेवाओं की शुरूआत करने के बाद से रोगियों का इलाज करने के मामले में एम्स ऋषिकेश साल दर साल सिरमौर साबित हुआ है। मैनुअली रजिस्टर में रोगी का नाम अंकित करने की व्यवस्था से शुरू हुआ ओपीडी सेवाओं का यह सफर आज ऑनलाईन अपाइंटमेंट लेने तक पूरी तरह तकनीक आधारित हो चुका है। संस्थान द्वारा उपलब्ध करवायी जा रही विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं पर आम लोगों के भरोसे का परिणाम है कि अब तक यहां 56 लाख से अधिक लोग स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठा चुके हैं।

    एम्स

    27 मई 2013 को जब एम्स ऋषिकेश के अस्पताल में रोगियों का इलाज शुरू किया गया था तो उस दौर में ओपीडी पर्चा बनवाने के लिए कम्पयूटर आधारित व्यवस्था नहीं हुआ करती थी। तब रजिस्टर पर रोगी का नाम, उम्र और पता लिखकर पेशेन्ट देखे जाते थे और अस्पताल द्वारा मुद्रित करवाए गए एक सादे कागज पर ही डाॅक्टरों द्वारा स्वास्थ्य परामर्श लिख दिया जाता था। ओपीडी सेवाएं भी बमुश्किल एक दर्जन विभागों की ही संचालित होती थीं। समय आगे बढ़ता गया तो ओपीडी सेवाओं और रोगियों के पंजीकरण के मामले में भी तकनीक आधारित बदलाव होता चला गया। स्वास्थ्य क्षेत्र में नित नए साफ्टवेयर विकसित होने और उच्च तकनीकों के इस्तेमाल से वर्तमान में न केवल रोगियों का पंजीकरण करने में आसानी हुई बल्कि अब लोग घर बैठे भी पंजीकरण और अपांइटमेंट सुविधा का लाभ उठा रहे हैं। वर्तमान में राज्य के इस सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान में उत्तराखण्ड के अलावा हिमाचल, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली एनसीआर, हरियाणा, बिहार और नेपाल तक के रोगियों को भी इलाज उपलब्ध हो रहा है। आंकड़े गवाह हैं कि वर्ष 2013 के बाद से अब तक 12 वर्षों के दौरान 30 अप्रैल 2025 तक 55 लाख 86 हजार 639 लोग एम्स की ओपीडी द्वारा स्वास्थ्य लाभ ले चुके हैं। इस महीने 15 मई तक ओपीडी की यह संख्या 56 लाख से अधिक हो चुकी थी। मौजूदा समय में संस्थान में 36 से अधिक विभागों की ओपीडी संचालित हो रही हैं। इनमें जनरल ओपीडी के अलावा विभिन्न विभागों की सुपर स्पेशिलिटी ओपीडी सेवाएं भी शामिल हैं।

    एम्स

    वर्ष 2013 के दौर से ही संस्थान में चिकित्सीय सेवाएं प्रदान कर रहे सीटीवीएस के विभागाध्यक्ष प्रो0 अंशुमान दरबारी बताते हैं कि शुरूआत में पिडियाट्रिक, गायनी, आर्थो, जनरल मेडिसिन, ईएनटी, पल्मोनरी, जनरल सर्जरी, नेत्र रोग और मनोचिकित्सा विभाग आदि जनरल ओपीडी के अलावा सीटीवीएस कार्डियक सर्जरी, पिडियाट्रिक सर्जरी और न्यूरो सर्जरी जैसी कुछ चुनिन्दा सुपर स्पेशिलिटी ओपीडी सेवाएं ही संचालित होती थीं। उन्होंने बताया कि पंजीकरण का सभी कार्य मैनुअली था लेकिन वर्ष 2017 में ई-हाॅस्पिटल साफ्टवेयर आने के बाद तकनीक आधारित पंजीकरण, स्वास्थ्य जांचें और इलाज की बेहतर सुविधाएं विकसित होती चली गयी। नतीजा यह है कि आज हम दैनिक तौर पर हजारों लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने में सक्षम हैं।

    ’’ओपीडी सेवाओं के माध्यम से हम राज्य में सबसे अधिक स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं। शुरूआती पहले वर्ष 2013 में एम्स में 37 हजार 886 रोगी पंजीकृत हुए थे। साल दर साल यह संख्या बढ़ती गयी। वर्ष 2019 में यंहा 8 लाख 65 हजार 333 लोगों ने स्वास्थ्य लाभ उठाया। हांलाकि उसके बाद अगले 2 वर्ष कोविड संक्रमण होने की वजह से ओपीडी सेवाएं बाधित रहीं और रोगियों के आंकड़े भी कम पंजीकृत हुए। वर्ष 2022 से ओपीडी सेवाओं ने फिर जोर पकड़ा और रोगियों की संख्या बढ़ने लगी। पिछले वर्ष 2024 में यहां 7 लाख 42 हजार 963 लोगों ने ओपीडी सेवाओं का लाभ उठाया। वर्ष 2013 से अब तक 12 वर्षों के दौरान एम्स में कुल 56 लाख से अधिक लोग स्वास्थ्य लाभ उठा चुके हैं। ’’
    प्रो. बी. सत्याश्री, चिकित्सा अधीक्षक, एम्स ऋषिकेश

    ’’संस्थान की ओपीडी सेवाएं रोगी केन्द्रित स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के संस्थान के मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हमारे उच्च प्रशिक्षित और विभिन्न विशेषज्ञताओं के अनुभवी डाॅक्टर दैनिक तौर पर हजारों रोगियों को स्वास्थ्य परामर्श और इलाज प्रदान कर रहे हैं। इसके अलावा सर्वश्रेष्ठ डाॅक्टरों की देखरेख में हम चौबीसों घण्टे ट्राॅमा इमरजेन्सी और मेडिसिन इमरजेन्सी की सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं। संस्थान द्वारा संचालित टेलीमेडिसिन ओपीडी सेवाओं के माध्यम से भी लोग स्वास्थ्य परामर्श प्राप्त कर सकते हैं। हमारा उद्देश्य रोगियों को व्यापक और रोगी केन्द्रित स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना है।’’

  • डॉ. के. एस. नपलच्याल ने कार्यवाहक रजिस्ट्रार का संभाला पद

    डॉ. के. एस. नपलच्याल ने कार्यवाहक रजिस्ट्रार का संभाला पद

    डॉ. के. एस. नपलच्याल ने कार्यवाहक रजिस्ट्रार का संभाला पद

    देहरादून। उत्तराखंड आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाओं के संयुक्त निदेशक डॉ. के. एस. नपलच्याल ने भारतीय चिकित्सा परिषद, उत्तराखण्ड के कार्यवाहक रजिस्ट्रार का कार्यभार औपचारिक रूप से ग्रहण कर लिया है। डॉ. नपलच्याल लंबे समय से आयुर्वेदिक चिकित्सा क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और उनका कार्य अनुभव तथा प्रशासनिक कुशलता इस नई जिम्मेदारी को निभाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उनके कार्यभार ग्रहण करने से न केवल परिषद के कामकाज में नई ऊर्जा का संचार होगा, बल्कि इससे आयुर्वेदिक चिकित्सा क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी।

    इस अवसर पर राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ, उत्तराखंड (पंजीकृत) के प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ. डी. सी. पसबोला ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. नपलच्याल की नियुक्ति से पूरे आयुर्वेदिक चिकित्सक समुदाय में हर्ष का वातावरण है। उन्होंने बताया कि वर्षों बाद किसी वरिष्ठ और अनुभवी आयुर्वेदिक चिकित्सक को भारतीय चिकित्सा परिषद जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में रजिस्ट्रार जैसे महत्वपूर्ण और उत्तरदायित्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया गया है, जो न केवल चिकित्सा समुदाय के लिए गौरव की बात है, बल्कि इससे आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली को भी और अधिक मान्यता व सम्मान प्राप्त होगा।

    डॉ. पसबोला ने यह भी कहा कि आयुर्वेदिक चिकित्सकों की लंबे समय से यह मांग रही थी कि परिषद के शीर्ष पदों पर उन्हीं विशेषज्ञों की नियुक्ति हो जो इस परंपरागत चिकित्सा पद्धति की गहराई से जानकारी रखते हों और उसकी मूल भावना को समझते हों। डॉ. नपलच्याल की नियुक्ति इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    गौरतलब है कि परिषद के वर्तमान अध्यक्ष डॉ. जे. एन. नौटियाल भी एक पंजीकृत आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं, जिन्होंने वर्षों से इस क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवाएं दी हैं। अब परिषद के दोनों शीर्ष पदों – अध्यक्ष और रजिस्ट्रार – पर आयुर्वेदिक पृष्ठभूमि के चिकित्सकों की तैनाती से न केवल इस चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि इससे आयुर्वेदिक शिक्षा, अनुसंधान और चिकित्सकीय सेवाओं के क्षेत्र में व्यापक विकास की संभावनाएं भी और अधिक मजबूत होंगी।

    इस नई संरचना से उम्मीद की जा रही है कि परिषद अधिक प्रभावी, पारदर्शी और चिकित्सकों के अनुकूल कार्यशैली अपनाएगी, जिससे न केवल वर्तमान प्रणाली को सुधारने में मदद मिलेगी बल्कि आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा मिलेगी। आयुर्वेदिक चिकित्सकों और इससे जुड़े संगठनों ने इस कदम की सराहना करते हुए भविष्य में और अधिक सकारात्मक परिवर्तनों की आशा जताई है।

  • देहरादून के तीन प्रमुख निजी अस्पतालों में गोल्डन कार्ड से इलाज की सुविधा पहले की तरह जारी रहेगी

    देहरादून के तीन प्रमुख निजी अस्पतालों में गोल्डन कार्ड से इलाज की सुविधा पहले की तरह जारी रहेगी

    तीन प्रमुख निजी अस्पतालों में गोल्डन कार्ड की सुविधा जारी रहेंगी

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट निर्देशों के अनुपालन में उत्तराखण्ड के स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए स्पष्ट किया है कि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत गोल्डन कार्ड धारकों को देहरादून के तीन प्रमुख निजी अस्पतालों में संपूर्ण रूप से इलाज की सुविधाएं पूर्ववत और पूरी तरह से जारी रहेंगी। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत जॉली ग्रांट हॉस्पिटल, श्री महंत इन्द्रेश हॉस्पिटल और ग्राफिक एरा हॉस्पिटल जैसे प्रमुख और विश्वसनीय निजी अस्पतालों में गोल्डन कार्ड धारकों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाएं नियमित रूप से पूर्व की भांति संचालित होती रहेंगी और इन अस्पतालों में आने वाले प्रत्येक पात्र मरीज को आवश्यक सभी चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन सेवाओं में किसी प्रकार की कोई रुकावट नहीं आने दी जाएगी।

    स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने यह भी कहा कि राज्य सरकार की यह प्राथमिकता है कि उत्तराखण्ड के प्रत्येक पात्र नागरिक को समय पर, गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ कराई जाएं, ताकि किसी भी व्यक्ति को उपचार के अभाव में कठिनाई का सामना न करना पड़े। आयुष्मान भारत योजना इस दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है, जिसके माध्यम से प्रदेश के लाखों गरीब, वंचित और जरूरतमंद परिवारों को पूर्णतः नि:शुल्क इलाज की सुविधा दी जा रही है। सरकार इस महत्वाकांक्षी योजना को पूरी तत्परता और प्रतिबद्धता के साथ सफलतापूर्वक क्रियान्वित करने के लिए लगातार प्रयासरत है।

    स्वास्थ्य सचिव ने यह भी कहा कि आने वाले समय में आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत गोल्डन कार्ड से मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़, प्रभावी और व्यापक बनाया जाएगा, ताकि राज्य के हर कोने में रहने वाले नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के समान रूप से बेहतर और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त हो सकें। इस दिशा में राज्य सरकार द्वारा सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और निजी अस्पतालों के साथ समन्वय बनाकर इस योजना के प्रभाव को और भी अधिक व्यापक बनाया जा रहा है।

    उन्होंने दोहराया कि अपने प्रत्येक नागरिक को ससमय, सुलभ, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना उत्तराखण्ड राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य और सर्वोच्च दायित्व है। प्रदेश की जनता के स्वास्थ्य की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। हमारी सरकार इस दिशा में पूरी निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है और विशेषकर निर्धन और जरूरतमंद वर्ग को आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाएं निशुल्क उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह संकल्पबद्ध है।

    राज्य सरकार का हर प्रयास नागरिकों की भलाई और स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। आयुष्मान भारत योजना गरीबों के लिए एक संजीवनी के रूप में कार्य कर रही है और सरकार इसे निरंतर सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।….पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड

  • 11वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर भव्य आयोजन की जोरदार तैयारी

    11वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर भव्य आयोजन की जोरदार तैयारी

    योग दिवस पर भव्य आयोजन की तैयारी जोरों पर

    आयुर्वेद विभाग ने बनाई विस्तृत कार्ययोजना
    मई से जून तक चलेंगे कार्यक्रम

    देहरादून। 11वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून 2025) के अवसर पर जनपद देहरादून में आयुर्वेद विभाग द्वारा विविध कार्यक्रमों के आयोजन हेतु एक विस्तृत रूपरेखा तैयार की गई है। जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. जी.सी.एस. जंगपांगी द्वारा निदेशक, आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाएं, उत्तराखंड शासन के निर्देशों के क्रम में यह योजना बनाई गई है।
    1 मई से 21 जून 2025 तक योग से संबंधित अनेक गतिविधियाँ संचालित की जाएंगी।

    इस संबंध में जानकारी देते हुए आईटी सेल प्रभारी डॉ. डी.सी. पसबोला ने बताया कि योग दिवस को सफल बनाने हेतु जिले में अनेक गतिविधियों की योजना बनाई गई है।

    आईसी टीम का गठन

    एनजीओ, निजी योग केंद्रों व संस्थानों का चिन्हीकरण

    योग सत्रों के आयोजन हेतु स्थलों एवं प्रभारी अधिकारियों का चयन

    अस्पतालों में क्यूआर कोड युक्त सेल्फी पॉइंट की स्थापना

    ‘योग संगम’ – 21 जून को जनपद स्तरीय सामूहिक योग

    एक पार्क को ‘योग पार्क’ के रूप में विकसित करना

    ‘हरित योग’ – प्राकृतिक स्थलों जैसे ट्रैकिंग रूट्स व नदी तटों पर योग

    ‘योग महाकुंभ’ – 15 से 21 जून तक विभिन्न योग गतिविधियाँ

    ऑनलाइन योग सत्रों का प्रसारण एवं सोशल मीडिया प्रचार

    ‘योग प्रभाव’ – जन जागरूकता हेतु सर्वेक्षण

    ‘नमस्ते योग’ एवं ‘योग ब्रेक’ ऐप्स का प्रचार-प्रसार

  • स्वास्थ्य तंत्र की रीढ़ है  एक्स-रे तकनीशिय : डॉ. धन सिंह रावत

    स्वास्थ्य तंत्र की रीढ़ है एक्स-रे तकनीशिय : डॉ. धन सिंह रावत

    नियुक्ति पत्र मिलते ही खिल उठे चयनित तकनीशियनों के चेहरे
    तकनीकी संवर्ग के विभिन्न रिक्त पदों पर होगी भर्ती

    देहरादून। उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से चयनित 34 एक्स-रे तकनीशियनों को प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने नियुक्ति पत्र वितरित किये। नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के अवसर पर डॉ. रावत ने कहा कि एक्स-रे तकनीशियन स्वास्थ्य तंत्र की रीढ़ है। इनकी नियुक्ति से चिकित्सा इकाईयों में मरीजों की बीमारी से सम्बंधित एक्स-रे आसानी से होंगे, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में डॉक्टरों को भी सहायता मिल सकेगी।

    चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सभागार में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज 34 एक्स-रे टेक्नीशियनों को नियुक्ति पत्र सौंपे। इस अवसर पर डॉ. रावत ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुलभ करने के प्रति प्रतिबद्ध है। इसके लिये सरकार द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों से लेकर जिला अस्पतालों तक आधुनिक तकनीक युक्त चिकित्सा उपकरणों सहित प्रशिक्षित कार्मिकों, विशेषज्ञ चिकित्सकों, नर्सिंग अधिकारियों और पैरामेडिकल स्टॉफ की निरंतर नियुक्ति की जा रही है। इसी कड़ी में उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से चयनित 34 एक्स-रे तकनीशियनों को नियुक्ति की गई हैं।

    तकनीशिय

    डॉ. रावत ने कहा कि सभी चयनित एक्स-रे टेक्नीशियनों को प्रथम तैनाती पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों की चिकित्सा इकाईयों की जायेगी, जिससे चार धाम यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्रियों एवं पर्वतीय क्षेत्रों में आम जनमानस को समुचित चिकित्सा सुविधा मिलेगी। विभागीय मंत्री ने कहा कि एक्स-रे तकनीशियन स्वास्थ्य तंत्र की रीढ़ है, इनकी नियुक्ति से दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों की चिकित्सा इकाईयों में आम जनमानस को एक्स-रे संबंधी दिक्कतों से नहीं जूझना पड़ेगा, साथ ही स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में डॉक्टरों को भी सहायता मिल सकेगी। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर लोगों को हड़्डी फ्रैक्चर, संक्रमण, गठिया जैसी समस्याओं का पता लागने के साथ ही चोटों के उपचार, सर्जरी में एक्स-रे तकनीशियनों की मदद मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत तकनीकी संवर्ग के विभिन्न रिक्त पदों को आईपीएचएस मानकों के अनुरूप भरने का निर्णय लिया है। इसके लिये विभागीय अधिकारियों को सभी औपचारिकताएं पूर्ण करने के निर्देश दे दिये गये हैं ताकि प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, उप जिला चिकित्सालयों व जिला चिकित्सालयों में तकनीशियनों की कमी को दूर किया जा सके।

    इस अवसर पर डॉ. रावत ने सभी चयनित एक्स-रे तकनीशियनों को बधाई दी साथ ही उम्मीद जताई कि सभी एक्स-रे तकनीशियन पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ अपने दायित्वों और कर्तव्यों का पालन कर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण में सरकार का सहयोग करेंगे। वहीं नियुक्ति पत्र मिलने पर एक्स-रे तकनीशियनों के चेहरे खिल उठे। नियुक्ति पत्र पाने वाले सभी एक्स-रे तकनीशियनों ने विभागीय मंत्री डॉ. रावत के प्रति आभार प्रकट किया।

    नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. सुनीता टम्टा, निदेशक डॉ. मनोज उप्रेती, निदेशक एनएचएम डॉ. मनू जैन, प्रभारी निदेशक डॉ. एच.सी.एस. मार्तोलिया सहित अन्य विभागीय अधिकारी व नव नियुक्त एक्स-रे तकनीशियन उपस्थित रहे।