Category: स्वास्थ्य

  • चारधाम यात्रा से पहले धामी सरकार का बड़ा कदम: उत्तराखंड में 45 विशेषज्ञ डॉक्टर नियुक्त

    चारधाम यात्रा से पहले धामी सरकार का बड़ा कदम: उत्तराखंड में 45 विशेषज्ञ डॉक्टर नियुक्त

    चारधाम यात्रा से पहले धामी सरकार का फैसला: उत्तराखंड में 45 विशेषज्ञ डॉक्टर तैनात

    एनेस्थीसिया, सर्जरी, स्त्री रोग, बाल रोग समेत विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ होंगे तैनात; पर्वतीय जिलों में स्वास्थ्य सेवाएं होंगी सशक्त, यात्रियों और स्थानीय जनता को मिलेगा लाभ

    देहरादून। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के शुभारंभ से पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त और उन्नत बनाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने प्रदेशभर के विभिन्न जिलों में 45 विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए हैं। यह निर्णय राज्य के विभिन्न अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सा सेवाओं को बेहतर बनाने और विशेष रूप से चारधाम यात्रा के दौरान बढ़े हुए श्रद्धालुओं के दबाव को संभालने के उद्देश्य से लिया गया है।

    आदेश संख्या 293157/2025 के तहत नियुक्त किए गए विशेषज्ञ डॉक्टरों को जिला चिकित्सालयों, उप जिला चिकित्सालयों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में अपनी सेवाएँ देने के लिए कहा गया है। इनमें प्रमुख विशेषज्ञताओं में सर्जरी, स्त्री एवं प्रसूति रोग (OBS & Gynae), एनेस्थीसिया, बाल रोग (Pediatrics), नेत्र रोग (Ophthalmology), कान-नाक-गला (ENT), फॉरेंसिक मेडिसिन और जनरल मेडिसिन के डॉक्टर शामिल हैं।

    स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार ने यह कदम उठाया है। इन विशेषज्ञ चिकित्सकों को विभाग द्वारा पोस्ट ग्रेजुएट (PG) प्रशिक्षण के बाद तैनात किया गया है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन्हें अपनी विशेषज्ञता के क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रशिक्षण और अनुभव प्राप्त हो।

    चारधाम यात्रा के मद्देनजर, जब लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड में आते हैं, यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की चिकित्सा आपातकाल स्थिति में स्थानीय स्तर पर त्वरित और उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हो सकें। इससे न केवल यात्रियों को लाभ होगा, बल्कि राज्य की स्थानीय जनता भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठा सकेगी।

    पर्वतीय जिलों में सुधार: स्वास्थ्य सचिव ने इस बात को भी स्पष्ट किया कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति से पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों के अस्पतालों को विशेष रूप से बड़ी राहत मिलेगी। अब तक, इन क्षेत्रों में कई अस्पतालों में विशेषज्ञ सेवाओं का अभाव था, जिससे मरीजों को इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। लेकिन अब सर्जरी, एनेस्थीसिया, स्त्री एवं प्रसूति रोग, बाल रोग और नेत्र रोग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विशेषज्ञ सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होंगी। इससे खासकर आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

    विशेषज्ञताओं के अनुसार नियुक्ति का विवरण इस प्रकार है:

    1. एनेस्थीसिया (Anaesthesiology): 12 डॉक्टर

    2. सर्जरी (General Surgery): 5 डॉक्टर

    3. बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrics): 4 डॉक्टर

    4. स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ (OBS & Gynae): 4 डॉक्टर

    5. कान-नाक-गला (ENT): 5 डॉक्टर

    6. नेत्र रोग विशेषज्ञ (Ophthalmology): 2 डॉक्टर

    7. फॉरेंसिक मेडिसिन (MD Forensic Medicine): 1 डॉक्टर

    8. जनरल मेडिसिन व अन्य: 10 डॉक्टर

    इन विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, चमोली, टिहरी गढ़वाल, अल्मोड़ा, चंपावत, बागेश्वर और हरिद्वार जैसे पहाड़ी जिलों में की गई है, जहां स्वास्थ्य सेवाओं की मांग सबसे ज्यादा होती है। इसके अलावा, उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हाई-एल्टीट्यूड मेडिसिन, कार्डियक इमरजेंसी और ट्रॉमा केयर के लिए भी अतिरिक्त प्रबंध किए गए हैं, ताकि इन इलाकों में आने वाली चिकित्सा आपातकाल की स्थिति से निपटा जा सके।

    स्वास्थ्य विभाग ने सभी नियुक्त चिकित्सकों को शीघ्र कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्यभार ग्रहण नहीं किया गया तो विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के नेतृत्व में उठाया गया यह कदम राज्य के स्वास्थ्य ढांचे में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह विशेष रूप से यात्रा काल के दौरान चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने और दूरदराज इलाकों में स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराने के लिए कारगर साबित होगा।

  • चारधाम यात्रा: उच्च हिमालयी चिकित्सा सेवा दल रवाना

    चारधाम यात्रा: उच्च हिमालयी चिकित्सा सेवा दल रवाना

     चारधाम यात्राओं में लगेंगे मेडिकल कैंप, तीर्थयात्रियों को मिलेगी त्वरित राहत

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को सिक्स सिग्मा हाई एल्टीट्यूड मेडिकल सर्विसेज की उच्च हिमालयी चिकित्सा सेवा का फ्लैग ऑफ किया। इस अवसर पर उन्होंने संजीवनी किट का भी शुभारम्भ किया।

    मुख्यमंत्री ने सिक्स सिग्मा की टीम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह सेवा चारधाम यात्रा के सफल संचालन में सहायक सिद्ध होगी।

    चारधाम यात्रा
    आदि कैलाश और चारधाम यात्राओं में लगेगा मेडिकल कैंप

    चारधाम यात्रा और आदि कैलाश यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से सिक्स सिग्मा हाई एल्टीट्यूड मेडिकल सर्विसेज द्वारा उच्च हिमालयी क्षेत्रों में विशेष चिकित्सा कैंप स्थापित किए जाएंगे। यह कैंप आदि कैलाश यात्रा, केदारनाथ यात्रा, बद्रीनाथ यात्रा, मध्यमहेश्वर यात्रा, तुंगनाथ यात्रा और रुद्रनाथ यात्रा के मार्गों पर लगाए जाएंगे, ताकि कठिन भूगोल और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी तीर्थयात्रियों को तत्काल और प्रभावी चिकित्सा सहायता मिल सके।

    इन चिकित्सा कैंपों में संजीवनी किट की भी व्यवस्था की गई है, जिसमें ऑक्सीजन सिलेंडर, आवश्यक जीवनरक्षक दवाइयाँ तथा पोर्टेबल आईसीयू उपकरण जैसे आधुनिक चिकित्सा संसाधन शामिल किए गए हैं। संजीवनी किट का उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में तीर्थयात्रियों को तुरंत राहत प्रदान करना और उनकी जान बचाने में सहायक बनना है।

    रविवार को आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा इस उच्च हिमालयी चिकित्सा सेवा का फ्लैग ऑफ किया गया और संजीवनी किट का औपचारिक शुभारंभ भी किया गया। इस अवसर पर विधायक खजान दास, सिक्स सिग्मा हाई एल्टीट्यूड मेडिकल सर्विसेज के सीईओ पुनीत मित्तल, डॉ. अनिता भारद्वाज, डॉ. परवेज, डॉ. भारत शर्मा सहित अनेक गणमान्य अतिथि भी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस पहल की सराहना की और इसे चारधाम यात्रा को सुरक्षित एवं सफल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

  • हर गांव तक पहुंचेगा योग अभियान

    हर गांव तक पहुंचेगा योग अभियान

    महिला शक्ति को अधिक से अधिक योग से जोड़ा जाएगा

    अंतरराष्ट्रीय योग दिवस – योग मेले, हरित योग और योग पर आधारित प्रतियोगिताओं का होगा आयोजन
    योग को रोजगार से जोड़ने के भी मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश

    देहरादून। ग्राम स्तर तक योग अभियान चलाया जाए। विद्यालयों और महाविद्यालयों में विशेष योग शिविरों का आयोजन किया जाए। योग पर निबंध, भाषण, पोस्टर और पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया जाय। योग और आयुष मेले के आयोजन के साथ ही हरित योग के कार्यक्रम भी किए जाएं। डिजिटल माध्यम से भी योग को प्रचारित किया जाए योग के क्षेत्र में जन जागरूकता लाने वालों को सम्मानित भी किया जाय। योग से साथ जनसहभागिता से नियमित स्वच्छता अभियान भी चलाया जाए।आगामी 21 जून को आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ये निर्देश अधिकारियों को दिए।

    योग

    मुख्यमंत्री ने कहा कि योग न केवल हमारी प्राचीन परंपरा है, बल्कि यह आज की जीवनशैली में संतुलन और स्वास्थ्य का प्रभावी माध्यम भी है। हमें युवाओं, विद्यार्थियों, सरकारी कर्मचारियों और आम जनता को इस आयोजन से जोड़ना होगा। योग दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले सभी कार्यक्रम भव्य, व्यवस्थित और जन-सहभागिता से किए जाएं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड, योग की पवित्र भूमि है, और यहां से पूरे विश्व को योग का संदेश गया है, इसलिए यहां के कार्यक्रमों की एक विशेष पहचान होनी चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मातृशक्ति को अधिकतम योग से जोड़ा जाय। योग और ध्यान के साथ ही वृक्षारोपण अभियान भी चलाया जाए। जनपदों में योग और आयुष मेले आयोजित किए जाएं। योग को रोजगार से भी जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि और योग भूमि के रूप में उत्तराखंड की वैश्विक स्तर पर अलग पहचान है। उन्होंने कहा कि योग का आध्यात्मिक रूप से भी प्रस्तुत किया जाए। राज्य के प्रमुख दैवीय स्थलों और पर्वतीय क्षेत्रों में भी बड़े स्तर पर योग के कार्यक्रम किए जाएं। मुख्यमंत्री ने आयुष विभाग, शिक्षा विभाग, युवा कल्याण विभाग, पर्यटन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, सूचना विभाग एवं जिला प्रशासन को समन्वय बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए हैं।

    बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर. के सुधांशु, आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगोली, रविनाथ रमन, सचिन कुर्वे, एडीजी ए. पी. अंशुमन, अपर सचिव विजय जोगदंडे और महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी उपस्थित थे।

  • डेंगू रोकथाम को माइक्रोप्लान पर काम करें अधिकारीः डॉ. धन सिंह रावत

    डेंगू रोकथाम को माइक्रोप्लान पर काम करें अधिकारीः डॉ. धन सिंह रावत

    निजी अस्पतलों को आईडीएसपी पोर्टल पर दर्ज करने होंगे डेंगू के आंकड़े
    कहा, रेखीय विभागों से समन्वय बनाकर संभावित क्षेत्रों पर रखें फोकस

    देहरादून। प्रदेश में डेंगू रोकथाम के लिये जनपद स्तर पर माइक्रो प्लान तैयार कर कार्य करने के निर्देश अधिकारियों को दिये गये हैं। इसके साथ ही रेखीय विभागों के साथ समन्वय बनाकर डेंगू संभावित/प्रभावित क्षेत्रों में विशेष फोकस करने को कहा गया है। प्रदेश के सभी निजी अस्पतालों को भी डेंगू मरीजों के आंकड़े आईडीएसपी पोर्टल पर दर्ज कराने होंगे, जिसकी मॉनिटिरिंग संबंधित जनपद के मुख्यचिकित्साधिकारी करेंगे। जनजागरूकता अभियान को तेज करने के लिये विभागीय कार्मिकों के साथ ही वालंटियर्स की टीम भी घर-घर जाकर लोगों को डेंगू के प्रति जागरूक करेगी।

    सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज स्वास्थ्य महानिदेशालय स्थित सभागार में डेंगू एवं चिकिनगुनिया के रोकथाम को लेकर समीक्षा बैठक की। जिसमें उन्होंने विभागीय अधिकारियों को जनपद स्तर पर माइक्रो प्लान तैयार कर डेंगू रोकथाम के लिये रेखीय विभागीय विभागों के साथ समन्वय बनाकर प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिये। डा. रावत ने कहा कि सूबे के निजी अस्पतालों को भी डेंगू मरीजों की जानकारी भारत सरकार के आईडीएसपी पोर्टल अनिवार्य रूप से दर्ज करनी होगी। जिसकी मॉनिटिरिंग संबंधित जनपद के मुख्य चिकित्साधिकारी करेंगे। इस संबंध में महानिदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण उत्तराखंड के स्तर से शीघ्र ही निर्देश जारी किये जायेंगे। डेंगू के दृष्टिगत संवेदनशील पांच जनपदों देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल व पौड़ी गढ़वाल के मुख्य चिकित्साधिकारियों को निर्देशित करते हुये विभागीय मंत्री ने कहा कि अधिकारी रेखीय विभागों के साथ समन्वय बनाकर जनजागरूकता अभियान में तेजी लायें। इसके लिये वॉलियंटियर्स की टीमों को हॉट स्पॉट क्षेत्रों में भेजा जाय। डॉ. रावत ने विभागीय अधिकारियों को कहा कि इस बात पर भी घ्यान दिया जाय कि प्रदेश में  जांच कर रही निजी पैथोलॉजी लैब भी भारत सरकार द्वारा अधिकृत टेस्ट किट का ही प्रयोग करे, इसके लिये संबंधित सीएमओ अपने जनपदों की निजी लैब्स को दिशा-निर्देश जारी करेंगे।
    विभागीय अधिकारियों ने प्रस्तुतिकरण देते हुये बताया कि वर्तमान में लोगों को डेंगू के प्रति जागरूक करने के लिये 220 वालंटियर्स तैनात किये गये हैं। जिनमे से देहरादून में 140, हरिद्वार 40, नैनीताल 20, ऊधमसिंहनगर व पौड़ी गढ़वाल में 10-10 शामिल हैं। जिनको आवश्यकता के अनुसार बढ़ाया जा सकता है। साथ ही विभागीय अधिकारियों ने बताया कि अभी तक जो डेंगू के जो 12 केस सामने आये हैं वह सभी देहरादून के दो निजी अस्पतालों में चिन्हित किये गये हैं, जबकि राज्य के सरकारी अस्पतालों में अभी तक डेंगू का कोई भी मरीज चिन्हित किया गया है।

    बैठक में स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार, अपर सचिव स्वास्थ्य अनुराधा पाल, एमडी एनएचएम स्वाति भदौरिया, महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. सुनीता टम्टा, निदेशक एनएचएम डॉ. मनु जैन, अपर निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. आर.एस. बिष्ट, सीएमओ देहरादून डॉ. मनोज शर्मा, सीएमओ हरिद्वार डा. आर.के. सिंह, स्टेट कोर्डिनेटर डेंगू (एनएचएम) डॉ. भास्कर सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे, जबकि अन्य जनपदों के सीएमओ ने वर्चुअल माध्यम से बैठक में प्रतिभाग किया।

  • सूबे के स्वास्थ्य विभाग को मिले 34 एक्स-रे टेक्नीशियन

    सूबे के स्वास्थ्य विभाग को मिले 34 एक्स-रे टेक्नीशियन

    राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड ने जारी किये परीक्षा परिणाम
    31 नर्सिंग ट्यूटर व 7 सोशल वर्कर का भी परिणाम घोषित

    देहरादून। सूबे के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को 34 नये एक्स-रे टैक्नीशियन मिल गये हैं। राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड से चयनित इन सभी एक्स-रे टैक्नीशियन को प्रदेश के पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों के विभिन्न चिकित्सा इकाईयों में तैनाती दी जायेगी। जिससे इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक सुदृढ़ हो सकेंगी। इसके अलावा चयन बोर्ड ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत 31 नर्सिंग ट्यूटर तथा 7 सोशल वर्कर के पदों पर भी भर्ती परिणाम घोषित कर दिये हैं। इनकी नियुक्ति राज्य के विभिन्न राजकीय नर्सिंग कॉलेजों व मेडिकल कॉलेजों में की जायेगी।

    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की प्रभारी महानिदेशक डॉ. सुनीता टम्टा ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की सक्रियता एवं निरंतर समीक्षा का प्रतिफल है कि विभाग में लम्बे समय से रिक्त पड़े पदों पर समयबद्ध तरीके से भर्ती आयोजित की जा रही है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड को 34 एक्स-रे टैक्नीशियन का अधियाचन भेजा गया था, जिसके क्रम में चयन बोर्ड द्वारा भर्ती का अंतिम चयन परिणाम जारी कर दिया गया है। इन सभी चयनित एक्स-रे टैक्नीशियनों को शीघ्र ही पर्वतीय एवं दुर्गम क्षेत्र के चिकित्सालयों में प्रथम तैनाती दी जायेगी। उन्होंने बताया कि एक्स-रे टेक्नीशियन की नियुक्ति से जहां चिकित्सा इकाईयों में एक्स-रे, अल्ट्रासाउण्ड व सीटी स्कैन जैसी महत्वपूर्ण जांच सेवाओं में सुधार होगा वहीं मरीजों को समय पर जांच रिपोर्ट भी मिल सकेगी। जिससे उन्हें निजी डायग्नोस्टिक सेंटर के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

    राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड द्वारा एक्स-रे टैक्नीशियन के अलावा चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत राजकीय नर्सिंग कॉलेजों के 31 नर्सिंग ट्यूटर तथा राजकीय मेडिकल कॉलेजों के 7 मेडिकल सोशल वर्कर के पदों का भी चयन परिणाम जारी कर दिया गया है। विभागीय निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना के बताया कि नर्सिंग ट्यूटर मिलने से नर्सिंग कॉलेजों में शिक्षकों की कमी दूर होगी, जिससे कॉलेजों में शैक्षणिक गतिविधियों में तेजी आयेगी। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही चयनित नर्सिंग ट्यूटरों को विभिन्न कॉलेजों तैनाती दी जायेगी। इसके साथ ही मेडिकल सोशल वर्कर को भी विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में नियुक्ति दी जायेगी।

    स्वास्थ्य

     

    बयान-

    चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में विभिन्न संवर्गों के 72 पदों पर राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड ने भर्ती परिणाम जारी कर दिया है। जिसमें एक्स-रे टैक्नीशियन के 34, नर्सिंग ट्यूटर 31 तथा मेडिकल सोशल वर्कर के 7 पद शामिल है। सभी चयनित अभ्यर्थियों शीघ्र तैनाती दी जायेगी। – डॉ. धन सिंह रावत, चिकित्सा स्वास्थ्य एंव चिकित्सा शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड।

     

  • चिकित्सकों की भूमिका मानवता के उत्थान में सर्वोपरि: नड्डा

    चिकित्सकों की भूमिका मानवता के उत्थान में सर्वोपरि: नड्डा

    चिकित्सकों द्वारा कई स्वास्थ्य सुविधाओं का उद्घाटन

    एम्स उन्नत चिकित्सा उपचार प्रदान कर रहा है- धामी

    दीक्षांत समारोह में 434 छात्रों को डिग्री प्रदान की गई

    ऋषिकेश। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज एम्स ऋषिकेश के पांचवें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता की। सभा को संबोधित करते हुए, जेपी नड्डा ने कहा कि ‘दीक्षांत समारोह एक विशेष अवसर है जो छात्रों की उपलब्धियों को मान्यता देता है।’ उन्होंने कहा कि देश के प्रत्येक गरीब व्यक्ति को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है।

    जेपी नड्डा ने देश भर के एम्स संस्थानों की चिकित्सा शिक्षा और सेवाओं में उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि ‘इस सदी की शुरुआत तक, भारत में केवल एक एम्स था, वहीं आज, देश में 22 एम्स संचालित हो रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि एम्स ऋषिकेश ने अपनी उत्कृष्ट सेवाओं के कारण स्वास्थ्य संस्थानों के बीच एक अद्वितीय पहचान बनाई है।उन्होंने नागरिकों के लिए विश्व-स्तरीय स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा, ‘सरकार ऐसी स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने पर केंद्रित है जो न केवल उपचारात्मक हो बल्कि निवारक, उपशामक और पुनर्वासिक भी हो।’

    चिकित्सकों

    स्वास्थ्य क्षेत्र में केंद्र सरकार की उपलब्धियों को उजागर करते हुए, नड्डा ने कहा, ‘‘आज, देश भर में 1.75 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित हो रहे हैं जो स्वास्थ्य और कल्याण से संबंधित विभिन्न सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। पिछले 10 वर्षों में मेडिकल कॉलेजों में 101 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, और अब देश भर में कुल 780 मेडिकल कॉलेज हैं। एमबीबीएस सीटों में 130 प्रतिशत और पीजी सीटों में 138 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।’’ उन्होंने आगे कहा, ‘इसी तरह, पैरामेडिक्स की जरूरतों को पूरा करने के लिए, 157 नर्सिंग कॉलेज भी स्थापित किए जा रहे हैं, जो मेडिकल कॉलेजों के साथ सह-स्थित होंगे।’

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने एम्स ऋषिकेश की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान ने हेलीकॉप्टर और ड्रोन सेवाओं का प्रभावी उपयोग करते हुए 309 गंभीर मरीजों को बचाया। वहीं टेलीमेडिसिन (ई-संजीवनी) जैसी डिजिटल सेवाओं का उपयोग करके राज्य के दूरदराज और अल्पसेवित क्षेत्रों में सेवा प्रदान करने में देश के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में से एक बना। नड्डा ने अपने संबोधन को समाप्त करते हुए छात्रों को करुणा, ईमानदारी और समर्पण के साथ अपने काम को बिना किसी स्वार्थ के करने के लिए प्रोत्साहित किया। केंद्रीय मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि सरकार प्रत्येक एमबीबीएस छात्र पर 30-35 लाख रुपये खर्च करती है, उन्होंने नए डॉक्टरों से आग्रह किया कि वे अपने पेशेवर करियर की शुरुआत में अधिक जिम्मेदारियां उठाएं। इस आयोजन के दौरान नड्डा ने संस्थान की चिकित्सा सेवाओं को बढ़ाने के लिए कई स्वास्थ्य सुविधाओं का उद्घाटन किया, जिनमें आयुष विभाग में एकीकृत चिकित्सा, न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग में पीईटी स्कैन मशीन, रेडियोलॉजी विभाग में पीएसीएस सुविधा और बाल चिकित्सा देखभाल में उन्नत बाल चिकित्सा केंद्र शामिल हैं।

    चिकित्सकों

    समारोह के दौरान, नड्डा ने एमबीबीएस, डीएम, एमएससी नर्सिंग, बीएससी नर्सिंग और बीएससी संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान कार्यक्रमों के 10 मेडिकल छात्रों को स्वर्ण पदक और डिग्री प्रदान की। दीक्षांत समारोह में कुल 434 छात्रों को डिग्री दी गई, जिनमें 98 एमबीबीएस छात्र, 95 बीएससी (ऑनर्स) नर्सिंग छात्र, 54 बीएससी संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान छात्र, 109 एमडी/एमएस/एमडीएस छात्र, 17 एमएससी नर्सिंग छात्र, 1 एमएससी मेडिकल संबद्ध छात्र, 12 मास्टर ऑफ पब्लिक हेल्थ छात्र, 40 डीएम/एमसीएच छात्र और 8 पीएचडी छात्र शामिल थे।

    ’पिछले 10 साल में देश में स्वास्थ्य सेवाओं का तेजी से हुआ है विस्तार- मुख्यमंत्री’

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा का स्वागत करते हुए कहा कि देश के स्वास्थ्य क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में अनेक कार्य हुए हैं। पिछले 10 साल में देश में स्वास्थ्य सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। देशभर में एम्स की स्थापना करना हो, राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति-2017 को लागू करना हो, आयुष्मान भारत योजना हो या फिर मेडिकल कॉलेजों में सीटों में बढ़ोतरी करना हो, अनेक योजनाओं एवं नीतियों केे माध्यम से भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था को एक नई उंचाई प्रदान की गई है। उत्तराखंड में स्वास्थ सेवाओं के विकास के लिए निरंतर सहयोग देने पर उन्होंने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री का आभार व्यक्त किया।

    ’हेली एंबुलेंस ने स्वास्थ्य क्षेत्र में नई उड़ान देने का किया कार्य।’

    मुख्यमंत्री ने कहा कि एम्स ऋषिकेश में ट्रॉमा सेंटर में पिक्चर आर्काइविंग एंड कम्युनिकेशन सिस्टम और सेंटर फॉर एडवांस्ड पीडियाट्रिक्स का लोकार्पण होने से स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि आज एम्स ऋषिकेश में अत्याधुनिक मेडिकल जांच और उपचार की व्यवस्था के साथ ही विशेषज्ञ डॉक्टर की टीम द्वारा विभिन्न प्रकार के रोगों का इलाज किया जा रहा है।

    चिकित्सकों

    इस संस्थान में अब रोबोटिक सर्जरी, घुटनों के प्रत्यारोपण की सुविधा, उन्नत न्यूरोसर्जरी और रेडिएशन थेरेपी जैसी सेवाएँ भी संचालित की जा रही हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने यहां पर हेली एंबुलेंस की शुरुआत कर उत्तराखंड के स्वास्थ्य क्षेत्र को एक नई उड़ान देने का कार्य किया। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उधम सिंह नगर जनपद में एम्स ऋषिकेश के सेटेलाइट सेंटर का निर्माण कार्य भी तेज गति के साथ चल रहा है।

    उत्तराखण्ड की 5 हजार से अधिक ग्राम सभाएं टी.बी मुक्त हो चुकी हैं

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और सहयोग से राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने के लिए तेजी से कार्य कर रही है। प्रत्येक जनपद में एक मेडिकल कॉलेज बनाने का लक्ष्य रखा गया। टेलीमेडिसिन नेटवर्क और जन औषधि केंद्रों के माध्यम से जनता को सस्ती दवाइयां और आवश्यक इलाज उपलब्ध कराने के प्रयास किये गये हैं। सरकारी अस्पतालों में 207 पैथोलॉजिकल जांच की सुविधा भी निःशुल्क दी जा रही है। अभी तक 29 लाख लोगों की निःशुल्क पैथोलॉजिकल जांच की जा चुकी हैं। राज्य में 14 लाख से अधिक लोगों का इलाज आयुष्मान भारत योजना के तहत हो चुका है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की 05 हजार से अधिक ग्राम सभाएं टी.बी मुक्त हो चुकी हैं। चारधाम यात्रा के दृष्टिगत नये अस्पतालों का संचालन भी किया जायेगा।

    इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, लोकसभा सांसद अजय भट्ट, विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खंडूरी भूषण, सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, स्वास्थ मंत्री डॉ धन सिंह रावत, सुबोध उनियाल, विधायक प्रेमचंद्र अग्रवाल, बृज भूषण गैरोला, अध्यक्ष एम्स ऋषिकेश प्रो. सिमरन नंदी, निदेशक प्रो. मीनू सिंह, प्रो. जया चतुर्वेदी, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

  • चारधाम यात्रा: डॉक्टरों की तैनाती को NMC से हरी झंडी

    चारधाम यात्रा: डॉक्टरों की तैनाती को NMC से हरी झंडी

    चारधाम तीर्थयात्रियों को मिलेंगे विशेषज्ञ चिकित्सक

    पीजी डॉक्टरों को मिलेगा डीआरपी प्रमाणपत्र

     

    देहरादून। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (National Medical Commission – NMC) ने राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग के उस प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है, जिसमें पोस्टग्रेजुएट मेडिकल ट्रेनी डॉक्टरों की स्वैच्छिक तैनाती की अनुमति मांगी गई थी। एनएमसी द्वारा दी गई स्वीकृति न केवल उत्तराखंड की तैयारी को मजबूती देती है, बल्कि यह भविष्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों के लिए भी एक मार्गदर्शक बन सकती है।

    यह निर्णय देश के भावी डॉक्टरों को समाजसेवा, प्रशिक्षण और अनुभव का एक दुर्लभ मंच प्रदान करेगा। स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत के दिशा निर्देशों पर स्वास्थ्य महकमा चारधाम यात्रा में उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं को मुहैया कराने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

    डीआरपी प्रमाणपत्र के लिए मिलेगा व्यावहारिक अवसर

    अब पहली बार, एमडी/एमएस/डीएनबी जैसे पोस्टग्रेजुएट डॉक्टर चारधाम यात्रा में सेवा देकर डिस्ट्रिक्ट रेजीडेंसी प्रोग्राम (DRP) प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकेंगे। एनएमसी ने स्पष्ट किया है कि यात्रा के दौरान दी गई सेवाएं क्लीनिकल रोटेशन या डीआरपी के अंतर्गत मान्य होंगी और डॉक्टरों को इसके लिए अलग से तीन माह की ट्रेनिंग नहीं करनी पड़ेगी।

    स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया, “यह निर्णय न केवल तीर्थयात्रियों के लिए उपयोगी है, बल्कि प्रशिक्षु डॉक्टरों को उच्च हिमालयी चिकित्सा और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने का व्यावहारिक अनुभव भी देगा। स्वास्थ्य विभाग सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करेगा ताकि यह पहल प्रभावी ढंग से लागू हो सके।”

    हिमालयी चिकित्सा का प्रशिक्षण और सेवाभाव का अनुभव

    एनएमसी के सचिव डॉ. राघव लांगर ने कहा कि यह एक बेहतरीन उदाहरण है, जहां शैक्षणिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र का समन्वय समाजहित में उपयोगी सिद्ध हो रहा है। चारधाम यात्रा के दौरान अत्यधिक भीड़, मौसम की प्रतिकूलता और भौगोलिक कठिनाइयों के बीच चिकित्सकों का योगदान महत्वपूर्ण रहेगा।

    राज्य सरकार करेगी लॉजिस्टिक सपोर्ट की व्यवस्था

    उत्तराखंड सरकार इन डॉक्टरों के लिए समुचित आवास, खानपान, प्रशिक्षण, सेवा प्रमाणपत्र और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था करेगी। यात्रा मार्गों पर विशेष चिकित्सा इकाइयों को सुदृढ़ किया जाएगा ताकि श्रद्धालुओं को त्वरित और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवा मिल सके।

    देशभर से मिल रही है भागीदारी की इच्छा

    एनएमसी की स्वीकृति के बाद देशभर के मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों से प्रशिक्षु डॉक्टरों की भागीदारी के लिए सकारात्मक प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। युवा डॉक्टर इस पहल को सेवाभाव और करियर विकास दोनों के लिहाज से एक महत्वपूर्ण अवसर मान रहे हैं।

    यह पहल संघीय शासन के सिद्धांतों पर आधारित एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरी है, जहां राज्य और केंद्र सरकार मिलकर एक धार्मिक यात्रा को सुरक्षित और सुचारु बनाने के लिए नवाचार और भागीदारी आधारित समाधान विकसित कर रहे हैं।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का संदेश : “चारधाम यात्रा हो सुरक्षित, सुगम और संतुलित”

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा, “हमारी सरकार का संकल्प है कि चारधाम यात्रा न केवल श्रद्धा की यात्रा हो, बल्कि सुरक्षा और सुविधा की दृष्टि से भी एक मिसाल बने। एनएमसी द्वारा दी गई स्वीकृति हमारे लिए ऊर्जा का स्रोत है और यह दर्शाता है कि प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर जनता के हित में निर्णायक कार्य कर रही हैं। यह पहल न केवल तीर्थयात्रियों को सशक्त स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करेगी, बल्कि युवा डॉक्टरों को सेवाभाव के साथ प्रशिक्षण का अद्वितीय अवसर भी देगी।”

  • हरिद्वार जेल से चौंकाने वाला खुलासा: 23 कैदी एचआईवी पॉजिटिव

    हरिद्वार जेल से चौंकाने वाला खुलासा: 23 कैदी एचआईवी पॉजिटिव

    2021 से मार्च 2025 के बीच एचआईवी पॉजिटिव बंदियों की पहचान हुई

    सात अप्रैल को जेल में लगे हेल्थ शिविर में सिर्फ टीबी की जांच हुई-जेल अधीक्षक

    जेल अधीक्षक ने आई जी जेल को लिखे पत्र में दी जानकारी

    हरिद्वार। जिला जेल में 23 कैदी एचआईवी संक्रमित हैं। यह जानकारी जेल के वरिष्ठ अधीक्षक मनोज आर्य ने आईजी कारागार प्रशासन को दी है।

    यह कैदी 2021 से मार्च 2025 के मध्य हुई जांच में एचआईवी पॉजिटिव पाए गए। इस बीच, मीडिया में 15 कैदियों के एचआईवी पॉजिटिव होने की खबरों के सामने आने के बाद जेल अधीक्षक ने साफ किया कि 7 अप्रैल के हेल्थ शिविर में कोई भी नया कैदी एचआईवी पॉजिटिव नहीं पाया गया। सात अप्रैल को सिर्फ टीबी की जॉच हुई थी।

    पत्र में मीडिया में वॉयरल उन खबरों का खंडन किया है जिसमें 7 अप्रैल के स्वास्थ्य शिविर में 15 (पन्द्रह) बंदियों के एचआईवी पॉजिटिव पाये जाने की जानकारी दी गयी है।

    पत्र में इन खबरों को भ्रामक बताते हुए कहा है कि जेल में लगे हेल्थ शिविर में टीबी की जॉच की गई थी न कि HIV पॉजिटिव की।

    पत्र में यह भी कहा तय है कि
    वर्तमान समय में जिला कारागार, हरिद्वार में 23 बंदी एचआईवी पॉजिटिव है, जिनका एआरटी सेंटर से उपचार किया जा रहा है।

    पत्र के साथ HIV पॉजिटिव कैदियों की सूची संलग्न की गई है। इस सूची में कैदी किस तारीख पर एचआईवी पॉजिटिव पाए गए ,यह भी जिक्र किया गया है।

    कुछ कैदी जेल में लाये जाने से पहले ही एचआईवी पॉजिटिव थे। बहरहाल, हरिद्वार जेल में भारी संख्या में एचआईवी पॉजिटिव कैदियों की खबर सामने आने से हड़कंप मच गया है।

    देखें जेल अधीक्षक का पत्र-

    एचआईवी
    एचआईवी
    एचआईवी

    सेवा में,

    महानिरीक्षक,

    कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवा विभाग, उत्तराखण्ड।

    विषयः-

    जिला कारागार, हरिद्वार में निरूद्ध बंदियों को एच०आई०वी० पॉजिटिव पाये जाने के सम्बन्ध में।

    महोदय,

    उपर्युक्त विषयक मुख्यालय के पत्र संख्या-310/बंदी चिकित्सा/2025 दिनांक 09.04.2025 का सन्दर्भ ग्रहण करने की कृपा करें, जिसके द्वारा जिला कारागार, हरिद्वार में निरूद्ध 15 (पन्द्रह) बंदियों के एच०आई०वी० पॉजिटिव पाये जाने की जानकारी मीडिया के माध्यम से मुख्यालय के संज्ञान में आने के सन्दर्भ में उक्त बंदियों की करायी गयी जांच एवं उनके उपचार के सम्बन्ध में आख्या मुख्यालय को उपलब्ध कराये जाने हेतु निर्देशित किया गया है।

    2-अवगत कराना है कि कुछ समाचार चैनल एवं सोशल मीडिया ग्रुप में यह खबर प्रसारित हो रही है कि दिनांक 07.04.2025 को जिला कारागार, हरिद्वार में आयोजित हेल्थ कैम्प में 15 बंदी एच०आई०वी० पॉजिटिव निकले। उक्त खबर तथ्यहीन एवं भ्रामक है। जिला कारागार, हरिद्वार में दिनांक 07.04.2025 को आयोजित हेल्थ कैम्प में टी०बी० की जांच हुई थी, न कि एच०आई०वी० की।
    इसी क्रम में यह भी उल्लेखनीय है कि कारागार में निरूद्ध होने वाले समस्त बंदियों की कारागार चिकित्सालय में स्थित एफ०आई०सी०टी०सी० में स्क्रीनिंग की जाती है तथा स्क्रीनिंग में एच०आईवी० पॉजीटिव पाये जाने वाले बंदियों की काउंसलिंग की जाती है व संक्रमित बंदियों को ए०आर०टी० सेन्टर के माध्यम से उपचार प्रदान किया जाता है। वर्तमान समय में जिला कारागार, हरिद्वार में 23 बंदी एच०आई०वी० पॉजिटिव है, जिनका ए०आर०टी० सेंटर से उपचार किया जा रहा है। उक्त एच०आई०वी० पॉजिटिव बंदियों की सूची मय टेस्टिंग डेट के संलग्न कर प्रेषित की जा रही है।

    अतः उपरोक्तानुसार आख्या प्रेषित है।

    संलग्नकः उपरोक्तानुसार ।

    भवदीय,

    (मनोज कुमार आर्य) वरिष्ठ अधीक्षक, जिला कारागार, हरिद्वार।

  • एम्स ऋषिकेश में विश्व स्वास्थ्य दिवस पर नवाचारों के माध्यम से जनस्वास्थ्य सुदृढ़ करने पर चर्चा

    एम्स ऋषिकेश में विश्व स्वास्थ्य दिवस पर नवाचारों के माध्यम से जनस्वास्थ्य सुदृढ़ करने पर चर्चा

    डिजिटल हेल्थ, टेलीमेडिसिन और समन्वित प्रयासों से दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा सुदृढ़ करने पर ज़ोर

    ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभाग के तत्वावधान में विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में “उत्तराखंड राज्य के संदर्भ में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में नवाचारों के लिए नीति एवं योजनाएं” विषय पर गहन विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तराखंड की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए एक समावेशी, नवाचार आधारित और सुलभ जनस्वास्थ्य प्रणाली की संभावनाओं का मूल्यांकन करना था।

    कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेतु आयोग, उत्तराखंड के उपाध्यक्ष डॉ. राजशेखर जोशी ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में पारंपरिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ तकनीकी नवाचारों का समावेश अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म, टेलीमेडिसिन सेवाएं, और स्मार्ट हेल्थकेयर सिस्टम जैसे उपाय राज्य के सुदूरवर्ती और दुर्गम क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने के लिए अनिवार्य हो चुके हैं।

    डॉ. जोशी ने यह भी साझा किया कि सेतु आयोग, एम्स ऋषिकेश के साथ साझेदारी कर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के सशक्तिकरण हेतु विस्तृत कार्य योजनाएं तैयार कर रहा है। इनमें हेलीएम्बुलेंस सेवा, दूरदराज़ क्षेत्रों के लिए टेली-कंसल्टेशन नेटवर्क, और मोबाइल हेल्थ यूनिट्स जैसे नवाचार शामिल होंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नीति निर्माण और जमीनी कार्यान्वयन के बीच जो असमानता है, वह तभी दूर हो सकती है जब विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो।

    एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. मीनू सिंह ने अपने उद्घाटन संबोधन में राज्य की भौगोलिक जटिलताओं का हवाला देते हुए कहा कि यहां तकनीक आधारित स्वास्थ्य समाधानों की न केवल आवश्यकता है बल्कि यह राज्य के विकास का आधार बन सकते हैं। उन्होंने एम्स ऋषिकेश की हेलीएम्बुलेंस सेवा को स्वास्थ्य क्षेत्र में “गेमचेंजर” करार देते हुए कहा कि इससे आपातकालीन स्थिति में जीवन रक्षक सेवाएं सुलभ हो सकेंगी।

    सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. वर्तिका सक्सेना ने अपने वक्तव्य में विभाग द्वारा किए जा रहे शैक्षणिक, अनुसंधानात्मक एवं सेवा कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने राज्य के लिए एक समग्र और क्रियाशील पब्लिक हेल्थ पॉलिसी की आवश्यकता जताई, जो स्थानीय जरूरतों के अनुरूप हो तथा वैज्ञानिक विश्लेषण और नवीनतम तकनीक पर आधारित हो।

    स्वास्थ्य

    नीति और व्यवहार के बीच की खाई: पैनल चर्चा

    कार्यक्रम की एक विशेष कड़ी के रूप में “नीति और व्यवहार में अंतराल” विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसमें देश के विभिन्न पब्लिक हेल्थ विशेषज्ञों ने भाग लिया। पैनल में प्रो. सुरेखा किशोर, प्रो. मीनाक्षी धर, प्रो. रंजीता कुमारी, प्रो. अनिद्य दास, डॉ. प्रदीप अग्रवाल, डॉ. दीपा जोसेफ और डॉ. रूबी कटारिया जैसे विशेषज्ञ शामिल रहे।

    चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि नीति निर्माण के बावजूद जब उसका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पाता, तो नीतियों का लाभ जनता तक नहीं पहुंचता। उन्होंने इस अंतराल के पीछे संसाधनों की कमी, प्रशिक्षित मानव संसाधन का अभाव, विभागीय समन्वय की कमी, और नवाचारों के प्रति धीमी गति से अपनापन को प्रमुख कारण बताया।

    प्रोफेसर किशोर ने कहा कि मातृ और शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में नीतिगत प्रयास तो हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर जागरूकता और पहुंच की कमी है। वहीं प्रो. अनिद्य दास ने कहा कि ट्रॉमा केयर और इमरजेंसी सेवाओं में तकनीकी सहायता और त्वरित सेवाएं ही किसी भी राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली को सक्षम बनाती हैं।

    पैनल में यह भी सुझाव आया कि ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को नवीनतम तकनीकों के साथ नियमित प्रशिक्षण और सहयोगात्मक मार्गदर्शन मिलना चाहिए।

    नीति-निर्माण में समावेशिता और क्रियान्वयन में समन्वय ज़रूरी

    पैनल चर्चा का संचालन विभागाध्यक्ष प्रो. वर्तिका सक्सेना और सेतु आयोग की सलाहकार डॉ. भावना शिंदे द्वारा किया गया। चर्चा में इस बात पर विशेष ज़ोर दिया गया कि स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती सिर्फ नीति निर्माण से नहीं, बल्कि समन्वित, साक्ष्य-आधारित और व्यवहारिक दृष्टिकोण से संभव हो सकती है।

    कार्यक्रम में एम्स ऋषिकेश की डीन एकेडेमिक प्रो. जया चतुर्वेदी, अस्पताल अधीक्षक प्रो. सत्या श्री, सामुदायिक चिकित्सा विभाग के संकाय सदस्य प्रो. रंजीता कुमारी, डॉ. स्मिता सिन्हा, डॉ. मीनाक्षी खापरे, डॉ. महेंद्र सिंह, डॉ. अजीत सिंह सहित सीनियर व जूनियर रेजीडेंट, एम.पी.एच. छात्र-छात्राएं, इंटर्न चिकित्सक और अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।

    कार्यक्रम ने न केवल स्वास्थ्य सेवा में नवाचार की दिशा में सोचने का अवसर दिया, बल्कि एक राज्य–स्तरीय नीति संवाद को भी जन्म दिया, जो भविष्य में उत्तराखंड के जनस्वास्थ्य क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

  • 36 लाख से ज्यादा बच्चों को मिलेगी एल्बेंडाजॉल दवा

    36 लाख से ज्यादा बच्चों को मिलेगी एल्बेंडाजॉल दवा

    राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस

    देहरादून। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा 8 अप्रैल 2025 को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का आयोजन राजकीय बालिका इण्टर कॉलेज, राजपुर में किया गया। इसका उद्देश्य बच्चों को कृमि संक्रमण से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से बचाना है।

    स्वाति एस भदौरिया, मिशन निदेशक एनएचएम ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य बच्चों और किशोरों के पोषण स्तर, संज्ञानात्मक विकास और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना है। कृमि संक्रमण बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डालता है, जिससे उनके समग्र विकास में बाधा आती है। एल्बेंडाजॉल दवा को कृमि नियंत्रण हेतु एक प्रभावी और सुरक्षित उपाय माना जाता है।

    लाख

    राज्यभर के शिक्षण संस्थानों, बस्तियों और आंगनवाड़ियों को शामिल किया गया
    इस अभियान के अंतर्गत निजी स्कूलों, तकनीकी संस्थानों, कोचिंग सेंटरों, आंगनवाड़ी केंद्रों और शहरी पीएचसी के अंतर्गत आने वाली मलिन व अगम्य बस्तियों में रह रहे बच्चों को दवा दी जाएगी। स्कूल न जाने वाले बच्चों को आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से दवा लेने के लिए प्रेरित किया जाएगा। सभी शिक्षण संस्थानों में बच्चों की पूर्ण उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

    झरना कमठान, महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा ने बताया कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम बच्चों को कृमि संक्रमण से मुक्त करने की एक समग्र रणनीति है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ बचपन समाज और देश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    स्कूल व आंगनवाड़ी में पंजीकृत न होने वाले बच्चों को शहरी विकास विभाग, आईसीडीएस और आशा कार्यकर्ताओं की सहायता से चिन्हित कर आउटरीच कैंप के माध्यम से दवा दी जाएगी। यह पहल देहरादून, नैनीताल, हरिद्वार, उधमसिंह नगर और पौड़ी जिलों में विशेष रूप से लागू की जा रही है।

    लाख

    8 अप्रैल को कृमि मुक्ति दिवस और 16 अप्रैल को मॉप-अप दिवस आयोजित किया जाएगा। मॉप-अप दिवस उन बच्चों के लिए है जो 8 अप्रैल को दवा नहीं ले सके। राज्य के 13 जिलों में 1 से 19 वर्ष की आयु के 36 लाख से अधिक बच्चों को एल्बेंडाजॉल 400 मिलीग्राम की खुराक दी जाएगी।

    यह कार्यक्रम एनीमिया मुक्त भारत अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और राष्ट्रीय पोषण नीति तथा स्वच्छ भारत अभियान के साथ समन्वय में चल रहा है। इसके तहत सभी संबंधित कार्यकर्ताओं और शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया है।

    एल्बेंडाजॉल से प्रतिकूल प्रभाव बहुत कम होते हैं और मुख्यतः गंभीर संक्रमण वाले बच्चों में देखे जाते हैं। किसी भी प्रतिकूल घटना की स्थिति में आरबीएसके की मोबाइल टीमें, 104 व 108 हेल्पलाइन सक्रिय रखी गई हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

    कार्यक्रम में स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग से कई अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे, जिनमें डॉ. मनोज उप्रेती, डॉ. मनु जैन, डॉ. मनोज शर्मा, डॉ. पल्लवी, डॉ. अर्चना ओझा, डॉ. अजय नगरकर, प्रेम लता बौडाई, पंकज सिंह और डॉ. ऑचल प्रमुख रहे।