उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हटाया पंचायत चुनावों पर लगा स्टे

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हटाया पंचायत चुनावों पर स्टे, चुनाव आयोग को तय कार्यक्रम के अनुसार चुनाव कराने के निर्देश

नैनीताल, 27 जून: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों पर लगी रोक (स्टे) को हटा दिया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने सोमवार को सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया। अब राज्य निर्वाचन आयोग पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पंचायत चुनाव करा सकेगा। इसके साथ ही राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर अपना पक्ष लिखित रूप से प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया गया है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला बागेश्वर निवासी गणेश दत्त कांडपाल द्वारा दायर की गई याचिका से जुड़ा है, जिसमें पंचायत चुनावों में आरक्षण व्यवस्था को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता शोभित सहारिया ने दलील दी कि पंचायत चुनावों में आरक्षण का निर्धारण असंगत है।

लगभग 40 याचिकाओं पर हुई सुनवाई

कोर्ट में पंचायत चुनावों के आरक्षण, क्षेत्र निर्धारण और आरक्षित सीटों को लेकर दायर करीब 40 याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई हुई। इनमें हर्ष प्रीतम सिंह, गंभीर सिंह चौहान, कवींद्र इस्तवाल, रामेश्वर, सोबेन्द्र सिंह पड़ियार, विक्कार सिंह बाहेर, धर्मेंद्र सिंह, पंकज कुमार सहित कई याचिकाकर्ता शामिल थे। सभी याचिकाओं को बीरेंद्र सिंह बुटोला और गणेश दत्त कांडपाल की मूल याचिका के साथ जोड़कर सुना गया।

डोईवाला सीट पर भी उठे सवाल

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता आदित्य सिंह ने डोईवाला विधानसभा क्षेत्र में ग्राम पंचायत सीटों में 63 प्रतिशत आरक्षण पर आपत्ति जताई। उनका तर्क था कि यह प्रतिशत निर्धारित सीमा से अधिक है। हालाँकि, कोर्ट ने सामान्य महिला आरक्षण को सामान्य वर्ग में शामिल मानने की दलील खारिज कर दी और इस याचिका को निरस्त कर दिया।

आरक्षण नियमों पर न्यायालय की स्पष्टता

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:

  • SC/ST/OBC के लिए आरक्षण तय है।

  • शेष सीटें सामान्य वर्ग के लिए होंगी।

  • प्रत्येक वर्ग में महिलाओं को 33% आरक्षण का प्रावधान है।

मुख्य न्यायाधीश का वक्तव्य

मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र ने कहा:
“हम मेरिट के आधार पर सभी पक्षों को सुनेंगे।”
इसके साथ ही 23 जून को जारी स्टे को समाप्त कर दिया गया और राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए।

चुनावी कार्यक्रम में बदलाव

  • नोमिनेशन फाइल करने की अंतिम तिथि 3 दिन बढ़ाई गई।

  • पूरा चुनावी कार्यक्रम भी 3 दिन आगे बढ़ाया गया।

सरकार को मिली राहत

राज्य सरकार को चुनाव प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति मिल गई है। कोर्ट ने सरकार को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने का अवसर भी प्रदान किया है। इससे सरकार को बड़ी राहत मिली है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

🔹 उत्तराखंड कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा:
“कांग्रेस चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है। निर्वाचन आयोग निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराए।”

🔹 बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा:
“हम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं और चुनाव कराने को पूरी तरह तैयार हैं।”

उत्तराखंड में अब पंचायत चुनाव समयबद्ध रूप से आयोजित किए जाएंगे। हाईकोर्ट ने चुनावी प्रक्रिया में अड़चन डालने वाले सभी स्टे हटा दिए हैं और चुनाव आयोग को आगे बढ़ने की अनुमति दे दी है। इससे राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समय से संचालित करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

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