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  • बदरीनाथ धाम में शंख न बजाने की परंपरा पर छिड़ी नई बहस

    बदरीनाथ धाम में शंख न बजाने की परंपरा पर छिड़ी नई बहस

    चुनावी शक्ल अख्तियार करता जा रहा है बदरीनाथ धाम का कंसर्ट व शंख विवाद

    कंसर्ट व शंख विवाद को लेकर अलग-अलग तर्कों से माहौल गर्म

    बदरीनाथ। बदरीनाथ धाम में शंख बजाने की परंपरा को लेकर मुरली मनोहर जोशी व मंत्री सतपाल महाराज के तर्कों से उठे बवाल के बीच धाम के पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल ने इसके धार्मिक और पौराणिक कारणों की विस्तृत व्याख्या की है।
    बदरीनाथ में हाल में हुए देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल में संगीत कार्यक्रम को लेकर पर्यटन एवं धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज और भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी के अलग-अलग मत सामने आए हैं। इस बीच चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत और ज्योतिर्मठ की ओर से भी आयोजन को लेकर आपत्ति जताई गई है।

    पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल ने बताया कि बदरीनाथ धाम में भगवान विष्णु साक्षात विराजमान माने जाते हैं। इसलिए आवाहन के लिए शंख बजाने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने पौराणिक मान्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि तुलसी ने बदरीनाथ क्षेत्र में भगवान नारायण की प्राप्ति के लिए तपस्या की थी। शंखचूड़ से जुड़े प्रसंग और बाद में तुलसी-शालिग्राम विवाह की मान्यता के कारण भी बदरीनाथ में शंख वादन नहीं करने की परंपरा बताई जाती है।

    उनियाल के अनुसार, इसका अर्थ यह नहीं है कि बदरीनाथ की पूजा-पद्धति में शंख का कोई स्थान नहीं है। कपाट खुलने की तिथि की घोषणा से लेकर गाडू घड़ी यात्रा के विभिन्न पड़ावों तक शंख ध्वनि की परंपरा है। ज्योतिर्मठ स्थित नृसिंह मंदिर, पांडुकेश्वर और टिहरी राजदरबार से यात्रा प्रारंभ होने के अवसर पर शंख बजाया जाता है। हनुमान चट्टी तक भी यह परंपरा रहती है। इसके बाद धाम क्षेत्र में शंख ध्वनि नहीं की जाती। मंदिर में भगवान बदरीविशाल की नित्य पूजा, अभिषेक और महाभिषेक में शंख का प्रयोग होता है तथा भोग को भी शंख के माध्यम से पवित्र किया जाता है।

    महाराज बोले-शंख में हड्डी की मान्यता, बाहर कोई रोक नहीं

    विवाद के बीच पर्यटन एवं धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि बदरीनाथ मंदिर के अंदर शंख नहीं बजाया जाता, जबकि मंदिर परिसर के बाहर शंख बजाने पर प्रतिबंध नहीं है। उन्होंने इसके पीछे शंख में हड्डी होने की धार्मिक मान्यता का उल्लेख किया। महाराज ने यह भी कहा कि बदरीनाथ में संगीत अथवा सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर पूर्ण प्रतिबंध की बात सही नहीं है। उनके अनुसार सीमांत क्षेत्र माणा सहित पूर्व में भी धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम होते रहे हैं और संगीत के माध्यम से भगवान की स्तुति की परंपरा रही है।

    मुरली मनोहर जोशी ने कंसर्ट पर उठाए सवाल

    दूसरी ओर भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने 19-20 सितंबर को बदरीनाथ में हुए देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल में डीजे और संगीत कार्यक्रम को लेकर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस स्थान पर शंख बजाना भी वर्जित माना जाता है, वहां तेज आवाज वाले संगीत और नृत्य का आयोजन कैसे उचित हो सकता है। जोशी ने इसे बदरीनाथ की धार्मिक एवं सांस्कृतिक मर्यादा के विपरीत बताते हुए केंद्र और राज्य सरकार से ऐसे आयोजनों पर रोक लगाने का आग्रह किया। उन्होंने शंकराचार्यों और संत-महात्माओं से भी इस मुद्दे पर आवाज उठाने की अपील की।

    कंसर्ट विवाद बढ़ने के बाद चमोली प्रशासन ने आयोजन को लेकर भारतीय सेना से स्पष्टीकरण भी मांगा। प्रशासन की ओर से कहा गया कि कार्यक्रम में सांस्कृतिक गतिविधियों को लेकर जिला प्रशासन और राज्य सरकार की भूमिका नहीं थी।

    गौरतलब है कि 11 अगस्त के सेना कि ओर से आयोजन के सम्बन्ध में जिला प्रशासन चमोली को एक पत्र भेजा गया था। इस पत्र के बाद डीएम चमोली ने अपने अधिकारियों को व्यवस्था बनाएं जाने सम्बन्धी पत्र जारी किये थे।

    इस पूरे विवाद में एक ओर बदरीनाथ की प्राचीन पूजा-पद्धति और शंख वादन से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं हैं, तो दूसरी ओर धाम क्षेत्र में आयोजित आधुनिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों को लेकर परंपरा, मर्यादा और आयोजन की सीमा पर बहस तेज हो गई है। कांग्रेस, उक्रांद ,धार्मिक संस्थाएं व सामाजिक संगठन भी डीजे कंसर्ट व शंख बजाने सम्बन्धी मुद्दों पर खुलकर विरोध जता रहे है। धीरे धीरे बदरीनाथ धाम से जुड़ा यह मुद्दा चुनावी शक्ल अख्तियार करता जा रहा है।

  • वसुंधरा ताल पर लगेगा अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम

    वसुंधरा ताल पर लगेगा अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम

    उत्तराखण्ड में ग्लेशियल झीलों की निगरानी को मिलेगी नई तकनीकी ताकत

    मुख्य सचिव ने वैज्ञानिक दल को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

    सीबीआरआई और वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के विशेषज्ञ करेंगे अर्ली वार्निंग सिस्टम की स्थापना

    देहरादून। उत्तराखण्ड में ग्लेशियल झीलों से उत्पन्न संभावित ग्लेशियल लेक आउटबस्र्ट फ्लड (ग्लाॅफ) के जोखिम को कम करने तथा उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर झीलों की निगरानी एवं पूर्व चेतावनी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हो गई है। चमोली जनपद स्थित वसुंधरा ताल से प्रदेश में ग्लेशियल झीलों में अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने की शुरुआत की जा रही है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने मंगलवार को सचिवालय से वसुंधरा ताल में निगरानी एवं पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित करने के लिए जा रहे वैज्ञानिक एवं तकनीकी दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा दल को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह पहल आने वाले समय में ग्लाॅफ के खतरों को कम करने तथा जोखिम को समझने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक सेंसर, उपग्रह संचार और वास्तविक समय में आंकड़ों की निगरानी से ग्लेशियल झीलों में होने वाले परिवर्तनों को बेहतर ढंग से समझने में सहायता मिलेगी।

    यह पहला वैज्ञानिक दल है, जो उत्तराखण्ड की ग्लेशियल झील में निगरानी एवं पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित करने के लिए उच्च हिमालयी क्षेत्र में जा रहा है। यह अभियान 29 सितम्बर से 15 अक्टूबर, 2026 तक प्रस्तावित है। इधर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अभियान में शामिल सभी वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों एवं सुरक्षा बलों को शुभकामनाएं दीं। अपने संदेश में मा0 मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित होने के कारण ग्लेशियल झीलों की निगरानी और उनसे जुड़े संभावित जोखिमों के प्रति सतर्कता हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। वसंुधरा ताल में अर्ली वार्निंग सिस्टम की स्थापना राज्य की आपदा तैयारियों को तकनीक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से और अधिक मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। राज्य सरकार का प्रयास है कि वैज्ञानिक संस्थानों, विशेषज्ञों और आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी विभागों के समन्वय से उच्च हिमालयी क्षेत्रों में आधुनिक निगरानी एवं पूर्व चेतावनी तंत्र को और मजबूत किया जाए।

    उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा राष्ट्रीय ग्लेशियल लेक आउटबस्र्ट फ्लड जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत यह अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान दल में केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई), रुड़की तथा वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान, देहरादून के वैज्ञानिक एवं तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं। उच्च हिमालयी एवं दुर्गम क्षेत्र में अभियान दल की सुरक्षा, आवागमन तथा फील्ड सहयोग के लिए राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) तथा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवान भी दल के साथ रहेंगे। यूएसडीएमए द्वारा अभियान के लिए आवश्यक समन्वय एवं लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। टीम को सेटेलाइट फोन तथा लो अर्थ आर्बिट डिवाइस को यूएसडीएमए द्वारा उपलब्ध कराई गई है ताकि टीम का संचार व समन्वय usdma के साथ बना रहे।

    इस अवसर पर सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन प्रकाश चंद्र, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, कमांडेंट एसडीआरएफ अर्पण यदुवंशी, निदेशक सीबीआरआई आर प्रदीप कुमार, सीबीआरआई के वैज्ञानिक डॉ. डीपी कानूनगो, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश कुमार पुनेठा, डॉ. शांतनु सरकार, एनडीआरएफ के डिप्टी कमांडेंट रोहिताश्वा मिश्रा, वाडिया के वैज्ञानिक डॉ अमित कुमार आदि उपस्थित रहे।

    इन उपकरणों से होगी वसुंधरा ताल की निगरानी
    -जलस्तर सेंसर-झील के जलस्तर में उतार-चढ़ाव एवं असामान्य परिवर्तनों की निगरानी।
    -स्वचालित मौसम केंद्र-तापमान, आर्द्रता, वर्षा, हवा की गति एवं दिशा, वायुदाब तथा प्रकाश की तीव्रता का मापन।
    -स्नो डेप्त सेंसर-झील के आसपास बर्फ की गहराई में होने वाले बदलावों की निगरानी।
    -स्नो सब सरफेस टेंपरेचर सेंसर-बर्फ की विभिन्न गहराइयों पर तापमान में होने वाले बदलावों की निगरानी के लिए आठ सेंसर।
    -टिल्ट एवं एक्सेलेरोमीटर सेंसर-चयनित स्थानों पर झुकाव, कंपन एवं हलचल की निगरानी।
    -जल प्रवाह सेंसर-जल प्रवाह में होने वाले परिवर्तनों की निगरानी।
    -सौर ऊर्जा प्रणाली-दुर्गम उच्च हिमालयी क्षेत्र में उपकरणों को विद्युत आपूर्ति।
    -उपग्रह संचार प्रणाली-मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में आंकड़ों को बेस स्टेशन तक भेजने की व्यवस्था।
    -डेटा लॉगर एवं मॉनिटरिंग डैशबोर्ड-प्राप्त आंकड़ों का रिकॉर्ड, ऑनलाइन प्रदर्शन तथा निर्धारित थ्रेशोल्ड के आधार पर अलर्ट जनरेशन।

    तकनीकी आंकड़ों के आधार पर जोखिम का आकलन
    देहरादून। इस प्रणाली के माध्यम से वसुंधरा ताल एवं उसके आसपास के पर्यावरणीय और जलवैज्ञानिक परिवर्तनों की लगातार निगरानी की जा सकेगी। सेंसरों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर संभावित असामान्य परिवर्तनों की पहचान करने और समय रहते संबंधित तंत्र को अलर्ट उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियल झीलों की वैज्ञानिक निगरानी और आधुनिक पूर्व चेतावनी प्रणालियों की स्थापना से राज्य की आपदा पूर्व तैयारी को और अधिक मजबूत किया जा सकेगा। वसुंधरा ताल में शुरू की जा रही यह पहल भविष्य में अन्य संवेदनशील ग्लेशियल झीलों में भी ऐसी प्रणालियां स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार करेगी।

    अर्ली वार्निंग सिस्टम को मजबूत करना प्राथमिकता-कौशिक
    देहरादून। आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि उत्तराखण्ड में ग्लेशियल झीलों की वैज्ञानिक निगरानी को मजबूत करना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। वसुंधरा ताल से अर्ली वार्निंग सिस्टम की स्थापना की शुरुआत प्रदेश में ग्लेशियल झीलों से जुड़े जोखिमों की निगरानी के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली के माध्यम से जलस्तर, मौसम, हिम की स्थिति, जल प्रवाह तथा अन्य महत्वपूर्ण मानकों से संबंधित आंकड़े लगातार प्राप्त किए जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक विशेषज्ञता का उपयोग करते हुए आपदा जोखिम को न्यूनतम करना तथा उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को और मजबूत करना है। उन्होंने अभियान दल को सफल एवं सुरक्षित अभियान के लिए शुभकामनाएं दीं।

    13 झीलें संवेदनशील, 06 झीलों का बैथीमेट्री सर्वे पूरा
    देहरादून। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि उत्तराखण्ड में ग्लेशियल झीलों की स्थिति एवं उनसे उत्पन्न संभावित ग्लेशियल लेक आउटबस्र्ट फ्लड (ग्लाॅफ) के जोखिम को लेकर राज्य सरकार द्वारा निरंतर निगरानी एवं वैज्ञानिक अध्ययन किया जा रहा है।

    राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एनआरएससी) के वर्ष 2023 के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में कुल 344 ग्लेशियल झीलें चिह्नित की गई हैं।
    उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) एवं तकनीकी संस्थाओं द्वारा उत्तराखण्ड में 13 ग्लेशियल झीलों को उच्च जोखिम वाली झीलों के रूप में चिन्हित किया गया है। इनमें बागेश्वर की 01, चमोली की 04, पिथौरागढ़ की 06, टिहरी गढ़वाल की 01 तथा उत्तरकाशी की 01 झील शामिल हैं।

    सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि इन उच्च जोखिम वाली ग्लेशियल झीलों की वैज्ञानिक एवं तकनीकी जांच के तहत 06 झीलों का बाथीमेट्रिक सर्वेक्षण पूर्ण किया जा चुका है। चमोली जनपद की सरस्वती ताल एवं वसुंधरा ताल, उत्तरकाशी जनपद की केदारताल तथा पिथौरागढ़ जनपद की दारमा घाटी स्थित मबांग, प्यूनग्रू एवं स्युंक्ति यांक्ति प्रोग्लेशियल झीलों का बाथीमेट्रिक सर्वेक्षण पूर्ण कर लिया गया है। सर्वेक्षण के माध्यम से झीलों की गहराई, जलधारण क्षमता एवं अन्य महत्वपूर्ण जलवैज्ञानिक आंकड़े जुटाए गए हैं, जिनके आधार पर संभावित ग्लाॅफ जोखिम का वैज्ञानिक आकलन एवं आवश्यक आपदा प्रबंधन तैयारियों को और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ग्लेशियल झीलों की निगरानी के लिए राज्य स्तर पर संबंधित केंद्रीय एवं तकनीकी संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित किया गया है। झीलों में जलस्तर, आकार में परिवर्तन तथा अन्य संभावित जोखिमों की नियमित निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सुमन ने कहा कि ग्लाॅफ की संभावित घटनाओं से निचले क्षेत्रों में स्थित बस्तियों, सड़कों, पुलों, जलविद्युत परियोजनाओं एवं अन्य महत्वपूर्ण अवस्थापना को संभावित खतरे को देखते हुए पूर्व तैयारी और समयबद्ध चेतावनी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। राज्य सरकार का उद्देश्य वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर जोखिम की पहचान करते हुए प्रभावित क्षेत्रों में समय रहते आवश्यक सुरक्षा एवं बचाव की कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

  • सीएम की 50 फीसदी घोषणाएं पूरी, विकास कार्यों को मिली रफ्तार

    सीएम की 50 फीसदी घोषणाएं पूरी, विकास कार्यों को मिली रफ्तार

    1700 से अधिक लंबित घोषणाएं पूरी करने की चुनौती

    सीएम घोषणाओं समयसीमा में पूरी करें-सीएस

    ‘यमुनोत्री ट्रेक रूट सुधारीकरण की योजना करें तैयार’

    देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने मंगलवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री घोषणाओं की प्रगति की समीक्षा की।
    मुख्य सचिव ने अधिकारियों को मुख्यमंत्री घोषणाओं को प्राथमिकता पर लेते हुए निर्धारित समयसीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय से लम्बित घोषणाओं का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जिन घोषणाओं का विलोपन या मर्ज किया जाना है, उनके सम्बन्ध में समय से विलोपन अथवा मर्ज की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही, घोषणाओं के मर्ज अथवा अन्य विभागों को हस्तांतरण से संबंधित मामलों में भी त्वरित कार्रवाई की जाए।

    बैठक में बताया गया कि प्रदेश में कुल 4611 मुख्यमंत्री घोषणाओं में से 2852 घोषणाएं पूर्ण हो चुकी हैं, जबकि 1759 घोषणाएं लम्बित हैं और 447 का विलोपन या मर्ज किया गया है। लम्बित 1759 घोषणाओं में से 1397 पर विभिन्न स्तरों पर कार्यवाही गतिमान है, एवं इनमें से 59 आंशिक रूप से पूर्ण हो चुकी हैं। 303 घोषणाएं अभी भी लम्बित हैं।
    मुख्य सचिव द्वारा 11 अगस्त, 2026 की समीक्षा के समय 627 घोषणाएं लम्बित थी, जिनकी संख्या अब घटकर 303 रह गयी है।

    मुख्य सचिव ने लम्बित घोषणाओं के सम्बन्ध में विभागवार समीक्षा करते हुए अधिकारियों को शीघ्र कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री घोषणाओं के कार्यों में अनावश्यक विलम्ब न हो और विभिन्न स्तरों पर लम्बित प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अगली समीक्षा बैठक अक्टूबर माह के मध्य में आयोजित किए जाने के निर्देश दिए।

    मुख्य सचिव ने कहा कि विभिन्न विभागों के मध्य आपसी तालमेल की कमी के कारण लंबित घोषणाओं को सम्बन्धित विभाग आपसी समन्वय के साथ पूर्ण करें। योजनाओं को समय से पूर्ण करने के लिए भूमि हस्तांतरण सहित अन्य प्रक्रियाओं के सम्बन्ध में विभागों के बीच निरन्तर संवाद एवं समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि जहां तक संभव हो, विभिन्न कार्यों को समानांतर रूप से प्रारम्भ किया जाए, ताकि समय की बचत हो और योजनाओं को निर्धारित समय में पूरा किया जा सके। उन्होंने विभागों को मुख्यमंत्री घोषणाओं की प्रगति को लगातार पोर्टल पर अपडेट करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन विभागों के पास पोर्टल की यूजर आईडी एवं पासवर्ड उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें तत्काल उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने सचिव एवं अपर सचिव स्तर के अधिकारियों को घोषणाओं की गंभीरता से मॉनिटरिंग करते हुए कार्यों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    मुख्य सचिव ने सम्पूर्ण यमुनोत्री ट्रैक रूट के सुधारीकरण की कार्ययोजना तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने इस सम्बन्ध में अगले 15 दिनों में विस्तृत प्रस्तुतिकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने ट्रैक रूट के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं की संभावनाओं पर भी कार्य करने को कहा। उन्होंने विभिन्न स्थानों पर ईको पार्क आदि की घोषणाओं के सम्बन्ध में कहा कि परिसंपत्ति निर्माण के बाद उसके संचालन एवं रखरखाव की व्यवस्था पूर्व में ही निर्धारित की जाए, ताकि परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने पौड़ी शहर में मुख्य बाजार धारा रोड से एजेंसी चौक तक हेरिटेज स्ट्रीट के कार्य को आवास विभाग से पर्यटन विभाग को हस्तांतरित करने तथा मल्टीस्टोरी पार्किंग से सम्बन्धित आवास विभाग को भेजे गए प्रस्तावों पर शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एक ही क्षेत्र में विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे अवस्थापना विकास एवं सौन्दर्यीकरण से सम्बन्धित कार्यों को आपस में समन्वित करते हुए एकीकृत रूप से किया जाए, ताकि सभी कार्यों का बेहतर प्रभाव दिखाई दे।

    मुख्य सचिव ने फलों के भंडारण के लिए कोल्ड स्टोरेज निर्माण में भूमि की उपयुक्तता पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि अनुपयुक्त सरकारी भूमि पर कोल्ड स्टोरेज बनाने के बजाय आवश्यकता के अनुरूप उपयुक्त भूमि क्रय कर कोल्ड स्टोरेज का निर्माण किया जाए, ताकि उसका बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके। उन्होंने प्रदेश के सभी शहरों में ओपन स्पेस, सिटी पार्क अथवा ईको पार्क जैसी सुविधाओं के विकास की दिशा में कार्य किया जाए। सरकारी भूमि की अनुपलब्धता की स्थिति में निजी भूमि क्रय कर ऐसी सुविधाओं के विकास की संभावनाओं पर भी विचार किया जाए।

    बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, डॉ. आर. राजेश कुमार, विनोद कुमार सुमन, युगल किशोर पंत, धीराज सिंह गर्ब्याल, अपर सचिव रीना जोशी, मनुज गोयल, रोहित मीणा, नवनीत पाण्डेय, सम्बन्धित विभागों के सचिव, अपर सचिव एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • लाखों की ठगी का खुलासा, पंजाब से साइबर आरोपी गिरफ्तार

    लाखों की ठगी का खुलासा, पंजाब से साइबर आरोपी गिरफ्तार

    फर्जी ट्रेडिंग क्लासेज के नाम पर 55.50 लाख ठगे, एसटीएफ ने दबोचा

    देहरादून। फर्जी ट्रेडिंग क्लासेज और सेबी पंजीकृत सलाहकार बनकर 55.50 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में उत्तराखंड एसटीएफ ने पंजाब से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी के बैंक खाते में ठगी की रकम में से छह लाख रुपये जमा हुए थे। जांच में उसके खाते के खिलाफ साइबर अपराध से जुड़ी छह अन्य शिकायतें भी दर्ज मिली हैं।

    पुलिस के अनुसार पंडितवाड़ी निवासी चुन्नी लाल अग्निहोत्री ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोपियों ने उन्हें SBSBL Community/VIP Community नाम के व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर खुद को सेबी पंजीकृत सलाहकार बताया। इसके बाद फर्जी ट्रेडिंग क्लासेज, डीमैट अकाउंट और नकली CDSL/NSDL दस्तावेज दिखाकर विश्वास में लिया और अलग-अलग बैंक खातों में कुल 55.50 लाख रुपये जमा कराकर ठगी की।

    शिकायत के आधार पर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में मुकदमा अपराध संख्या 56/2025 के तहत धारा 318(4), 61(2) बीएनएस और 66(डी) आईटी एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया। विवेचना निरीक्षक अनिल कुमार को सौंपी गई।

    एसटीएफ के मुताबिक विवेचना के दौरान लाभार्थी बैंक खातों की जांच और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर ठगी की रकम की मनीट्रेल खंगाली गई। इसमें सुखवीर सिंह उर्फ सूक्कू (26), निवासी शहीद भगत सिंह नगर, चक मन्नेवाला, थाना सिटी जलालाबाद, जिला फाजिल्का, पंजाब की संलिप्तता सामने आई। उसके खाते में शिकायतकर्ता से ठगी गई रकम में से छह लाख रुपये जमा हुए थे। एसटीएफ टीम ने पंजाब में दबिश देकर फाजिल्का क्षेत्र से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

    पुलिस टीम में निरीक्षक अनिल कुमार, उपनिरीक्षक जगमोहन राणा और कांस्टेबल सोहन बडोनी शामिल रहे।
    एसटीएफ ने लोगों से अपील की है कि अज्ञात लोगों के कहने पर बैंक खाता, ओटीपी, मोबाइल या अन्य बैंकिंग संबंधी संवेदनशील जानकारी साझा न करें। निवेश के नाम पर अधिक लाभ का लालच देने वाले संदिग्ध प्रस्तावों से सावधान रहें। साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

  • SIR को लेकर राजनैतिक दलों के साथ बैठक

    SIR को लेकर राजनैतिक दलों के साथ बैठक

    अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राजनैतिक दलों को दी SIR की विस्तृत जानकारी

    3 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची का होगा प्रकाशन

    देहरादून। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ.बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम के निर्देशों पर अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे की अध्यक्षता में सोमवार को मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम को लेकर राजनैतिक दलों को जानकारी दी गई।

    अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने बैठक में बताया कि प्रदेश में दावे एवं आपत्तियों का निस्तारण आज यानी 28 सितंबर तक पूर्ण कर लिया जाएगा। अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि आगामी 3 अक्टूबर 2026 को प्रदेश में मतदाता सूची का अन्तिम प्रकाशन किया जाएगा। अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया जो नागरिक किसी कारणवश मतदाता सूची ने नाम शामिल करने से रह गए हैं वे ऑनलाइन ईसीआई-नेट अथवा बीएलओ के माध्यम से भी फार्म-6 भरकर मतदाता सूची में अपना नाम शामिल करा सकते हैं।

    बैठक में उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी,सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास सहित भारतीय जनता पार्टी से राजकुमार पुरोहित, इंडियन नेशनल कांग्रेस सेराजेंद्र सिंह भंडारी, प्रशांत खंण्डूरी, बीएसपी से सत्यपाल, सतेंद्र चोपड़ा, आम आदमी पार्टी से शअशोक सेमवाल,सीपीआई (एम) अनंत आकाश उपस्थित रहे।

  • हिमालयी चोटियों की चुनौती के लिए तैयार उत्तराखण्ड के युवा पर्वतारोही

    हिमालयी चोटियों की चुनौती के लिए तैयार उत्तराखण्ड के युवा पर्वतारोही

    रोमांचकारी पर्यटन-शिखर की ओर

    पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने तीन पर्वतारोहण अभियानों को किया Flag-Off

    माउंट स्वर्गारोहिणी-1 पर पूर्णतः महिला दल रोमांचकारी पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की उत्तराखण्ड पर्यटन की समग्र पहल का अगला पड़ाव

    देहरादून। दस दिन पहले जहाँ उत्तराखण्ड पर्यटन ने प्रदेश के 100 ट्रैकिंग रूट्स की GPS Mapping के लिए दल रवाना किए थे, वहीं आज हिमालय की तीन प्रतिष्ठित चोटियों की ओर प्रदेश के 36 युवा पर्वतारोहियों के कदम बढ़ चले।

    उत्तराखण्ड पर्यटन विकास परिषद् एवं भारतीय पर्वतारोहण संघ (Indian Mountaineering Foundation), नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन पर्वतारोहण अभियानों को आज हिमालयन कल्चर सेंटर, देहरादून से Flag-Off किया गया। मुख्य अतिथि माननीय पर्यटन मंत्री श्री सतपाल महाराज ने हरी झण्डी दिखाकर अभियान दलों को रवाना किया।

    समारोह में सचिव पर्यटन एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, उत्तराखण्ड पर्यटन विकास परिषद श्री धीराज सिंह गर्ज्याल एवं भारतीय पर्वतारोहण संघ के अध्यक्ष कर्नल विजय सिंह, VSM विशेष रूप से उपस्थित रहे।

    तीन चोटियाँ, 36 युवा, एक संकल्प

    प्रदेश के विभिन्न जनपदों से चयन समिति द्वारा चयनित 36 युवा पर्वतारोही, 12-12 सदस्यीय तीन दलों में, गढ़वाल एवं कुमाऊँ की तीन प्रतिष्ठित चोटियों का आरोहण करेंगे:

    माउंट भागीरथी-II (6,512 मीटर): Team Leader श्री दशरथ सिंह रावत

    माउंट पंचाचूली-1 (6,355 मीटर): Team Leader श्री विजय सिंह रौतेला

    माउंट स्वर्गारोहिणी-1 (6,252 मीटर): Team Leader श्रीमती लता बिष्ट

    स्वर्गारोहिणी की ओर प्रदेश की बेटियाँ

    इस आयोजन का सबसे प्रेरक पक्ष माउंट स्वर्गारोहिणी । का पूर्णतः महिला दल है। अनुभवी पर्वतारोही श्रीमती लता बिष्ट के नेतृत्व में नैनीताल, पिथौरागढ़, चमोली, उत्तरकाशी, देहरादून, पौड़ी, रुद्रप्रयाग एवं टिहरी की 12 महिला पर्वतारोही इस दल में सम्मिलित हैं। यह दल दर्शाता है कि हिमालय की ऊंचाइयों पर अब उत्तराखण्ड की बेटियाँ भी नेतृत्व कर रही हैं।

    एक आयोजन नहीं, एक समग्र यात्रा

    ये अभियान उत्तराखण्ड पर्यटन की उस समग्र योजना का हिस्सा हैं, जिसका लक्ष्य प्रदेश को देश का अग्रणी Adventure Tourism Destination बनाना है। इस दिशा में परिषद् एक साथ कई मोर्चों पर कार्य कर रही है:

    GPS Mapping कार्यक्रमः 18 सितम्बर को गढ़वाल के 50 एवं कुमाऊँ के 50, कुल 100 Trekking Routes की GPS Mapping के लिए दल रवाना किए गए। इससे पहली बार इन मार्गों का सटीक Digital Data, एक Mobile Trekking Navigation App एवं ‘The Treks of Uttarakhand’ Coffee Table Book तैयार होगी।

    आदि कैलाश परिक्रमा 2.0: 24-26 अक्टूबर 2026, जनपद पिथौरागढ़ ।

    Ultimate Uttarakhand MTB Challenge (5th Edition): 20-26 नवम्बर

    2026, मुक्तेश्वर से मसूरी तक लगभग 700 किमी ।

    Himalayan Car Rally: 19-21 नवम्बर 2026, 1980-90 के दशक की प्रसिद्ध Ultimate Himalayan Car Rally के पुनरुत्थान की दिशा में पहला कदम।

    मार्गों का वैज्ञानिक नक्शा, प्रशिक्षित युवा पर्वतारोही एवं राष्ट्रीय स्तर के साहसिक आयोजन, तीनों मिलकर Adventure Tourism का एक सुरक्षित एवं सतत तंत्र तैयार कर रहे हैं।

    पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा, “पर्वतारोहण केवल शिखर तक पहुँचने का नाम नहीं, यह अनुशासन, धैर्य एवं नेतृत्व की परीक्षा है। हमारा प्रयास है कि प्रदेश के युवा हिमालय को केवल निहारें नहीं, बल्कि प्रशिक्षित पर्वतारोही, Guide एवं Adventure Professionals बनकर अपने क्षेत्र में आजीविका के नए अवसर सृजित करें।” उन्होंने महिला दल को प्रदेश की बेटियों के साहस का प्रेरक उदाहरण बताया।
    पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ज्याल ने कहा, “GPS Mapping से हम मार्गों को सुरक्षित बना रहे हैं और इन अभियानों से उन मार्गों पर चलने वाले प्रशिक्षित युवा तैयार कर रहे हैं। आने वाले महीनों में आदि कैलाश परिक्रमा, MTB Challenge एवं Himalayan Car Rally इस यात्रा को आगे बढ़ाएँगे।” उन्होंने सभी दलों से Safety First एवं Leave No Trace के सिद्धान्तों का पालन करने की अपेक्षा की।

    भारतीय पर्वतारोहण संघ के अध्यक्ष कर्नल विजय सिंह, VSM ने इस संयुक्त पहल की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार के सहयोग से उत्तराखण्ड के युवा राष्ट्रीय स्तर पर पर्वतारोहण में नई पहचान बनाएँगे। उन्होंने सभी दलों को सुरक्षित एवं सफल आरोहण की शुभकामनाएँ दीं।

    समारोह में पर्यटन विभाग एवं परिषद् के अधिकारीगण, अभियान दलों के सदस्य एवं उनके परिजन उपस्थित रहे।

  • वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता में उत्तराखंड ने बढ़ाया देश का मान

    वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता में उत्तराखंड ने बढ़ाया देश का मान

    सानिया जोशी एवं पार्थ वोहरा ने भारत के लिए जीते रजत पदक

    देहरादून। चीन के शंघाई में 22 से 27 सितंबर तक आयोजित 48वीं वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता-2026 में भारत ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 6 रजत पदक एवं 20 मेडलियन फॉर एक्सीलेंस प्राप्त किए तथा वैश्विक स्तर पर 10वां स्थान हासिल किया। यह वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ वैश्विक प्रदर्शन है।

    भारत की इस गौरवपूर्ण उपलब्धि में उत्तराखंड के प्रतिभाशाली युवाओं ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उत्तराखंड की सानिया जोशी ने Retail Sales कौशल तथा पार्थ वोहरा ने Industrial Design Technology कौशल में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए रजत पदक अर्जित किया।

    विश्वस्तरीय मंच पर उत्तराखंड के युवाओं का परचम

    वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता विश्व का प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कौशल मंच है, जहां विभिन्न देशों के युवा प्रतिभागी अपने तकनीकी कौशल, दक्षता, नवाचार, सृजनात्मकता एवं व्यावसायिक उत्कृष्टता का प्रदर्शन करते हैं। वर्ष 2026 की प्रतियोगिता में विश्वभर से लगभग 1,400 प्रतिभागियों ने 64 विभिन्न कौशल विधाओं में प्रतिभाग किया। ऐसे प्रतिष्ठित वैश्विक मंच पर उत्तराखंड के दो युवाओं की उपलब्धि प्रदेश के लिए गौरव का विषय है।

    इंडिया स्किल्स से वर्ल्डस्किल्स के वैश्विक मंच तक

    उत्तराखंड के इन प्रतिभागियों की सफलता की महत्वपूर्ण कड़ी इंडिया स्किल्स 2025-26 की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता एवं चयन प्रक्रिया रही। कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग तथा उत्तराखंड कौशल विकास समिति (UKSDS) द्वारा प्रदेश के युवाओं को विभिन्न कौशल विधाओं में प्रतिभाग करने तथा अपनी दक्षता प्रदर्शित करने के अवसर प्रदान किए गए।

    इंडिया स्किल्स की राज्य, क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के माध्यम से उत्कृष्ट प्रतिभागियों को अगले स्तर पर आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। इसी प्रक्रिया के माध्यम से चयनित प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने तथा अंतरराष्ट्रीय कौशल प्रतियोगिताओं के लिए आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त होता है।

    इसी क्रम में सानिया जोशी एवं पार्थ वोहरा ने अपनी-अपनी कौशल विधाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए वर्ल्डस्किल्स के वैश्विक मंच तक पहुंच बनाई और भारत के लिए रजत पदक अर्जित कर उत्तराखंड का गौरव बढ़ाया।

    यह उपलब्धि कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग तथा UKSDS द्वारा प्रदेश के युवाओं में कौशल उत्कृष्टता को बढ़ावा देने और उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अवसरों से जोड़ने के लिए किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है।

  • माणा में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की प्रगति की समीक्षा

    माणा में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की प्रगति की समीक्षा

    लोकसभा प्राक्कलन समिति का दौरा

    सीमावर्ती गांवों के विकास को मिलेगी नई दिशा

    चमोली। भारत के प्रथम गांव माणा में लोकसभा की प्राक्कलन समिति ने राज्य में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत किए जा रहे विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की।

    समिति की अध्यक्षता सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने की। बैठक में केंद्र और राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारियों, स्थानीय प्रशासन, ग्रामीणों तथा संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

    माणा पहुंचने पर स्थानीय ग्रामीणों ने समिति के अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल और सभी सांसदों का पारंपरिक रीति-रिवाजों, स्थानीय संस्कृति और लोकगीतों के साथ स्वागत किया। ग्रामीणों ने अपनी लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत करते हुए अतिथियों का अभिनंदन किया।

    स्वागत के बाद समिति के अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने स्थानीय ग्रामीणों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के अंतर्गत आने वाले गांवों के विकास से संबंधित अपनी सभी आवश्यकताओं और मांगों को ग्रामीण सीधे उनके समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत मांगों और सुझावों का गंभीरता से परीक्षण किया जाएगा तथा आवश्यकतानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।

    समिति ने कहा कि विकास योजनाओं की सफलता के लिए स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। ग्रामीण अपने क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं और प्राथमिकताओं से सबसे अच्छी तरह परिचित होते हैं। इसलिए वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के अंतर्गत आने वाले गांवों में विकास कार्यों की योजना तैयार करते समय स्थानीय लोगों की आवश्यकताओं और सुझावों को विशेष महत्व दिया जाना चाहिए।

    समिति के अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने ग्रामीणों से आग्रह किया कि वे सड़क, दूरसंचार, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पर्यटन और अन्य मूलभूत सुविधाओं से संबंधित अपनी आवश्यकताओं को अधिकारियों और समिति के समक्ष रखें। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की सहभागिता से विकास योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सकता है और योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से गांव के प्रत्येक परिवार तक पहुंचाया जा सकता है।

    समिति अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम अभी अपने प्रारंभिक चरण में है, लेकिन आने वाले वर्षों में यह कार्यक्रम सीमावर्ती गांवों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में व्यापक परिवर्तन लाने में सक्षम होगा। उन्होंने कहा कि योजना का उद्देश्य केवल आधारभूत संरचनाओं का निर्माण करना नहीं है, बल्कि सीमावर्ती गांवों को मजबूत, आत्मनिर्भर और विकास की मुख्यधारा से जोड़ना भी है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती गांवों का विकास राष्ट्रीय प्राथमिकता का विषय है और इन गांवों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होने से स्थानीय लोगों को पलायन के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।

    समिति अध्यक्ष ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री का संकल्प है कि देश के सीमावर्ती और दूरस्थ गांवों में सड़क संपर्क, दूरसंचार सुविधा और सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हों। वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम इसी संकल्प को धरातल पर उतारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। उन्होंने कहा कि सड़क संपर्क बेहतर होने से ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। दूरसंचार और इंटरनेट कनेक्टिविटी के विस्तार से ग्रामीण शिक्षा, डिजिटल सेवाओं, बैंकिंग और रोजगार से संबंधित अवसरों का लाभ उठा सकेंगे।

    समिति के समक्ष राज्य की ओर से वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के सहायक नोडल अधिकारी डॉ. प्रभाकर बेबनी ने राज्य के सभी वाइब्रेंट विलेज गांवों में अब तक हुई प्रगति पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित विकास कार्यों, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार, स्थानीय गतिविधियों को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी समिति के समक्ष रखी।
    डॉ. बेबनी ने समिति को बताया कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के अंतर्गत गांवों में आधारभूत सुविधाओं के विकास के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की गति बढ़ाने, स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और लोगों को योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

    राज्य की ओर से दिए गए प्रस्तुतीकरण में आदि कैलाश और नीति क्षेत्र में राज्य पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित उच्च हिमालयी मैराथन का विशेष रूप से उल्लेख किया गया। डॉ0 प्रभाकर बेबनी ने समिति को बताया कि इन आयोजनों से वाइब्रेंट गांवों में स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से इन क्षेत्रों में सामाजिक गतिविधियों को गति मिली है और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ ग्रामीणों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

    प्रस्तुतीकरण में वाइब्रेंट गांवों में पर्यटन विभाग द्वारा विकसित किए जा रहे आधारभूत ढांचे की जानकारी भी समिति के समक्ष रखी गई। बताया गया कि इन गांवों में पर्यटन सुविधाओं संपर्क व्यवस्था और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए विभिन्न परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य सीमावर्ती गांवों को पर्यटन के प्रमुख केंद्रों के रूप में विकसित करना, स्थानीय लोगों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना और वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के माध्यम से गांवों के समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देना है।

    बैठक के दौरान समिति ने विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली। अधिकारियों से विकास कार्यों की वर्तमान स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और भविष्य की कार्ययोजनाओं के बारे में चर्चा की गई। समिति ने निर्देश दिया कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों में विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए। विकास योजनाओं का लाभ गांव के प्रत्येक परिवार तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

    समिति ने स्थानीय परिस्थितियों, भौगोलिक कठिनाइयों और मौसम की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विकास कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने पर भी जोर दिया। अधिकारियों से कहा गया कि विकास कार्यों की नियमित निगरानी की जाए और योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए।

    बैठक में गृह मंत्रालय के निदेशक मनीष श्रीवास्तव, गृह मंत्रालय के अवर सचिव विकास कुमार, लोकसभा की अवर सचिव सुश्री शीतल कपूर, चमोली के मुख्य विकास अधिकारी, परियोजना निदेशक चमोली, विभिन्न रेखीय विभागों के अधिकारी और स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन जोशीमठ के खंड विकास अधिकारी श्री मोहन जोशी ने किया।

  • पहल: कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने मदद के लिए बढ़ाया हाथ

    पहल: कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने मदद के लिए बढ़ाया हाथ

    सेना भर्ती की तैयारी में जुटी एकेडमी को निजी तौर पर आर्थिक मदद दी

    एकेडमी ने रखी भवन व संसाधनों की मांग

    उत्तरकाशी। भारतीय सेना और विभिन्न सुरक्षा बलों में भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच तिलोथ स्थित गंगोत्री फिजिकल एकेडमी पहुंचे कैबिनेट मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री सौरभ बहुगुणा युवाओं की मेहनत, अनुशासन और एकेडमी की गतिविधियों से प्रभावित हुए। उन्होंने अपने निजी स्तर से एकेडमी को पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। एकेडमी के अनुसार, घोषणा के करीब चार घंटे के भीतर यह राशि उसके खाते में हस्तांतरित भी हो गई।
    एकेडमी के कार्यक्रम में युवाओं से संवाद करते हुए बहुगुणा ने उनकी तैयारियों, प्रशिक्षण व्यवस्था और अनुभवों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि सीमांत जिले के युवाओं में प्रतिभा और जज्बे की कमी नहीं है। सरकार का प्रयास है कि उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और अवसर उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने युवाओं को लक्ष्य के प्रति निरंतर मेहनत करने के लिए प्रेरित किया।
    कार्यक्रम में गंगोत्री विधायक सुरेश चौहान, जिला पंचायत अध्यक्ष रमेश चौहान, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष दीपक बिजल्वाण, जिला समन्वयक प्रताप रावत समेत अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे। एकेडमी अध्यक्ष चंद्रमोहन सिंह पंवार ने अतिथियों का स्वागत किया और एकेडमी की गतिविधियों व प्रशिक्षण व्यवस्था की जानकारी दी।

    चार साल में 310 युवाओं के सेना में चयन का दावा

    गंगोत्री फिजिकल एकेडमी के संस्थापक चंद्रमोहन सिंह पंवार ने 25 सितंबर को प्रभारी मंत्री को दिए पत्र में बताया कि तिलोथ स्थित एकेडमी आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं, विशेषकर बालक-बालिकाओं को सेना व अन्य सेवाओं के लिए निःशुल्क प्रशिक्षण दे रही है। पत्र के अनुसार, पिछले चार वर्षों में एकेडमी से प्रशिक्षित 310 युवा भारतीय सेना में सेवा दे रहे हैं। वहीं कार्यक्रम की समाचार रिपोर्ट में यह संख्या करीब 380 बताई गई है। दोनों आंकड़ों में अंतर होने के कारण एकेडमी के आधिकारिक रिकॉर्ड से इसकी पुष्टि अपेक्षित है।
    पत्र में कहा गया है कि युवाओं की बढ़ती संख्या और सीमित संसाधनों को देखते हुए एकेडमी को कई सुविधाओं की आवश्यकता है। इनमें भवन का जीर्णोद्धार, विस्तार, मरम्मत व सौंदर्यीकरण, निःशुल्क ऑनलाइन कक्षाओं के लिए बड़ी टीवी/डिस्प्ले स्क्रीन, पर्याप्त शौचालय-बाथरूम और रंग-रोगन, तथा करीब 30 बालिकाओं के लिए अलग भवन/कक्ष शामिल हैं।
    एकेडमी ने सीएसआर और जनसहयोग के माध्यम से आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि ये सुविधाएं किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि देशसेवा का सपना देख रहे युवाओं को बेहतर प्रशिक्षण वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मांगी गई हैं।

    एकेडमी का कहना है कि वह निजी प्रयासों से निःशुल्क प्रशिक्षण संचालित कर रही है और सीमित संसाधनों के बावजूद युवाओं को सेना व अन्य सुरक्षा सेवाओं में जाने के लिए तैयार कर रही है। प्रभारी मंत्री की ओर से मिली पांच लाख रुपये की सहायता से प्रशिक्षण सुविधाओं को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद जताई गई है।

  • अल्मोड़ा डीसीबी की चैयरमैन बनी मिली लटवाल

    अल्मोड़ा डीसीबी की चैयरमैन बनी मिली लटवाल

    अध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचित, भावना जोशी बनी उपाध्यक्ष

    सहकारिता चुनावों में भाजपा की ऐतिहासिक जीत, सभी डीसीबी में निर्विरोध बोर्ड गठित

    सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को दी बधाई

    देहरादून। उत्तराखंड में संपन्न सहकारिता चुनावों में भारतीय जनता पार्टी समर्थित प्रत्याशियों का सभी 10 जिला सहकारी बैंकों (डीसीबी) में निर्विरोध निर्वाचन हुआ है। अल्मोड़ा जिला सहकारी बैंक में मिली लटवाल अध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचित हुईं, जबकि भावना जोशी उपाध्यक्ष चुनी गईं। प्रदेश में यह पहली बार है जब सभी जिला सहकारी बैंकों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं निदेशक पदों पर निर्विरोध निर्वाचन के साथ बोर्ड का गठन हुआ है।

    अल्मोड़ा डीसीबी के अध्यक्ष पद पर मिली लटवाल का निर्वाचन महिला आरक्षण के तहत हुआ है। सहकारी संस्थाओं के चुनाव में पहली बार महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया है। प्रदेश के 10 जिला सहकारी बैंकों में तीन अध्यक्ष पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।

    अल्मोड़ा से विभिन्न सहकारी संस्थाओं के लिए प्रतिनिधि चयनित

    उत्तराखंड राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड, हल्द्वानी के सामान्य निकाय के गठन के लिए अल्मोड़ा जनपद से नरेंद्र राम, विमला देवी, महेश चंद्र सिंह एवं ललित मोहन सिंह लटवाल का चयन किया गया है। वहीं, उत्तराखंड प्रादेशिक कोऑपरेटिव यूनियन के सामान्य निकाय के लिए पुष्पा भाकुनी एवं गणेश सिंह चयनित हुए हैं।

    सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने सभी निर्विरोध निर्वाचित अध्यक्षों, उपाध्यक्षों, निदेशकों एवं विभिन्न सहकारी संस्थाओं के लिए चयनित प्रतिनिधियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। डॉ. रावत ने कहा कि सभी जिला सहकारी बैंकों में निर्विरोध निर्वाचन सहकारिता क्षेत्र में आपसी विश्वास, समन्वय और संगठनात्मक एकजुटता का परिचायक है। सहकारी संस्थाएं प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के साथ किसानों, महिलाओं और युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

    उन्होंने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों से सहकारी संस्थाओं को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह एवं प्रभावी बनाने तथा सरकार की सहकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का आह्वान किया।

    महिला भागीदारी को मिला नया आयाम

    डॉ. रावत ने कहा कि सहकारिता क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से पहली बार 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया है। इससे सहकारी संस्थाओं के संचालन में महिलाओं की भागीदारी को संस्थागत रूप से बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तीकरण को नई गति मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सहकारिता क्षेत्र में नीतिगत सुधार, डिजिटलीकरण, महिला भागीदारी और सहकारी संस्थाओं के सशक्तीकरण पर लगातार कार्य कर रही है। नवनिर्वाचित पदाधिकारी इन प्रयासों को धरातल पर प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाएं।

    उल्लेखनीय है कि प्रदेश में जिला सहकारी बैंक चुनाव चरणबद्ध तरीके से संपन्न हुए। गढ़वाल मंडल के सभी छह जिला सहकारी बैंकों में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पदों पर भाजपा समर्थित प्रत्याशियों का निर्विरोध निर्वाचन हुआ है, जबकि कुमाऊं मंडल के चारों जिला सहकारी बैंकों में भी निर्विरोध बोर्ड का गठन हुआ है।