Category: अपराध

  • कर्णप्रयाग हिंसा के बाद प्रशासन सख्त, चार निहंग तीर्थयात्री हिरासत में

    कर्णप्रयाग हिंसा के बाद प्रशासन सख्त, चार निहंग तीर्थयात्री हिरासत में

    चिंताजनक- चलीं तलवारें लाठी और पत्थर, पांच घायल, मुकदमा दर्ज

    हेमकुंड साहिब ट्रस्ट की अपील—शस्त्रों का दुरुपयोग न करें, यात्रा में बनाए रखें अनुशासन

    चमोली। चारधाम यात्रा के चरम पर कर्णप्रयाग में सिख तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों के विवाद में तलवारें, पत्थर और लाठियों का खुलकर प्रयोग हुआ।
    उत्तराखंड के चमोली जिले के कर्णप्रयाग में पंच पुलिया के पास एक स्थानीय होटल के बाहर पार्किंग और मामूली विवाद को लेकर सिख तीर्थयात्रियों और स्थानीय होटल कर्मचारियों के बीच हिंसक झड़प में पांच लोग घायल हो गए।
    आक्रोशित स्थानीय लोगों ने बद्रीनाथ नेशनल हाईवे को 4 घंटे तक जाम कर दिया।

    पुलिस ने चार आरोपियों को हिरासत में लेकर मुकदमा दर्ज किया है। वहीं घटना के बाद हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट ने भी श्रद्धालुओं से शांति, संयम और धार्मिक मर्यादा बनाए रखने की  अपील करते हुए यात्रा के दौरान अनावश्यक रूप से शस्त्र साथ न लाने का आग्रह किया है।

    मिली जानकारी के मुताबिक मंगलवार को कर्णप्रयाग बाजार स्थित कृष्णा पैलेस होटल के समीप हेमकुंड साहिब यात्रा से लौट रहे कुछ निहंग यात्रियों और स्थानीय व्यापारियों के बीच मामूली कहासुनी हो गई।
    विवाद बढ़ने पर प्रकाश रावत पर धारदार हथियार से हमला कर दिया गया। बीच-बचाव करने पहुंचे अन्य स्थानीय लोगों पर भी हमला हुआ, जिससे कुल चार लोग घायल हो गए। इनमें एक घायल को गंभीर हालत में एयर एम्बुलेंस से देहरादून भेजा गया, जबकि अन्य तीन का उपचार स्थानीय स्तर पर किया गया।
    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हमले में शामिल चार निहंग यात्रियों को हिरासत में ले लिया।
    गजपाल सिंह की तहरीर पर कोतवाली कर्णप्रयाग में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
    घटना के बाद कुछ समय के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात प्रभावित रहा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी गौरव कुमार और पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार स्वयं मौके पर पहुंचे और स्थानीय नागरिकों से वार्ता कर माहौल को शांत कराया। प्रशासन और पुलिस के संयुक्त प्रयासों से यातायात बहाल कर दिया गया। साथ ही चारधाम यात्रा मार्ग पर वाहनों के दबाव को नियंत्रित करने के लिए अन्य जनपदों से भी समन्वय किया गया।
    फंसे हुए यात्रियों के लिए भोजन और पेयजल की व्यवस्था भी की गई।
    जिलाधिकारी गौरव कुमार ने कहा कि चारधाम यात्रा सामान्य रूप से संचालित हो रही है और जनपद में कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है।
    वहीं एसपी सुरजीत सिंह पंवार ने कहा कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी और किसी भी कीमत पर अशांति फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

    इधर, घटना के बाद गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट, गोविंदघाट के प्रबंधक सरदार सेवा सिंह ने श्रद्धालुओं के नाम जारी अपील में कहा है कि यात्रा आस्था, अनुशासन और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है। श्रद्धालु यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार के विवाद से बचें और धार्मिक मर्यादाओं का पालन करें।

    डीएम व एसपी

    ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि सिख धर्म में शस्त्रों का महत्व धर्म और मानवता की रक्षा के लिए है, न कि उनके प्रदर्शन या दुरुपयोग के लिए। इसलिए श्रद्धालु अनावश्यक रूप से शस्त्र लेकर यात्रा पर न आएं। विशेष रूप से बच्चों को किसी भी प्रकार के शस्त्र साथ रखने से रोका जाए।
    ट्रस्ट ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि और शांतिप्रिय राज्य के रूप में देश-दुनिया में प्रतिष्ठित है। यहां आने वाले सभी श्रद्धालुओं की जिम्मेदारी है कि वे यात्रा की गरिमा बनाए रखें और किसी भी समस्या की स्थिति में कानून को अपने हाथ में लेने के बजाय प्रशासन और पुलिस की मदद लें।
    फिलहाल कर्णप्रयाग में स्थिति सामान्य बताई जा रही है तथा पुलिस-प्रशासन पूरे क्षेत्र में सतर्क निगरानी बनाए हुए है।

    हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान कर्णप्रयाग में हुई हिंसक घटना ने प्रशासन और यात्रा प्रबंधन से जुड़े संगठनों की चिंता बढ़ा दी है।

    कर्णप्रयाग हिंसा और विवाद के मुख्य बिंदु

    विवाद की वजह-  हेमकुंड साहिब जा रहे सिख तीर्थयात्रियों (निहंग) का एक जत्था रुका था, और स्थानीय होटल के बाहर वाहन पार्क करने को लेकर विवाद शुरू हुआ।

    हिंसक झड़प- बहस बढ़ने पर हाथापाई हुई और आरोप है कि तीर्थयात्रियों ने तलवारों से हमला कर दिया।

    घायल- 

    इसमें 4 स्थानीय निवासी (प्रकाश रावत, सुदर्शन कंडारी, गजपाल सिंह, और हरेंद्र सिंह) और एक तीर्थयात्री (मनप्रीत सिंह) घायल हो गए।
    प्रदर्शन और जाम- घटना से गुस्साए स्थानीय व्यापारियों और निवासियों ने बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-07) को जाम कर दिया, जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग गई।

    प्रशासनिक कार्रवाई और वर्तमान स्थिति

    चमोली के जिलाधिकारी (गौरव कुमार) और एसपी (सुरजीत सिंह पंवार) ने मौके पर पहुंचकर लोगों से बातचीत की।
    प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने हाईवे से जाम हटा लिया।
    स्थानीय लोगों ने तीर्थयात्रा के दौरान धारदार हथियार ले जाने पर प्रतिबंध लगाने की भी मांग की है।

  • अंकिता हत्याकांड में बड़ी कार्रवाई: पूर्व विधायक राठौर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल

    अंकिता हत्याकांड में बड़ी कार्रवाई: पूर्व विधायक राठौर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल

    अंकिता मर्डर केस की सीबीआई जांच चुनावी मुद्दे में तब्दील

    देखें वीडियो

    भाजपा नेता दुष्यंत गौतम को साजिशन फंसाने का आरोप

    कथित ऑडियो-वीडियो मामले में पूर्व विधायक सुरेश राठौर गिरफ्तार

    देहरादून। बीते रविवार को गिरफ्तार किए गए भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर को सोमवार को दून की कोर्ट में पेश किया गया। न्यायालय में पेश किए जाने के बाद उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जिला कारागार सुद्धोवाला भेज दिया गया है।

    उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित ऑडियो-वीडियो प्रकरण में दून पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हरिद्वार जिले के ज्वालापुर सीट के पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर को 14 जून की रात गिरफ्तार कर लिया था।

    पुलिस का आरोप है कि भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री एवं उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम तथा पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं को एक सुनियोजित साजिश के तहत संवेदनशील मामले में फंसाने और उनकी छवि धूमिल करने के उद्देश्य से सोशल मीडिया पर कथित रूप से भ्रामक एवं मनगढ़ंत ऑडियो-वीडियो सामग्री प्रसारित की गई थी। मामले की विवेचना में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की है।
    पुलिस के अनुसार, 5 जनवरी 2026 को भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री एवं उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम ने कोतवाली डालनवाला में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि पूर्व विधायक सुरेश राठौर और अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने कुछ राजनीतिक तत्वों के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र रचा।

    आरोप है कि दोनों ने फर्जी ऑडियो और वीडियो तैयार कर अथवा उनका प्रसार कर भाजपा नेताओं की छवि खराब करने, सामाजिक वैमनस्य फैलाने तथा कानून-व्यवस्था प्रभावित करने का प्रयास किया।
    तहरीर के आधार पर कोतवाली डालनवाला में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।

    जांच के दौरान पुलिस ने साक्ष्यों, डिजिटल सामग्री और गवाहों के बयानों का परीक्षण किया। विवेचना में सुरेश राठौर के खिलाफ अतिरिक्त अपराध के साक्ष्य मिलने पर बीएनएस की धारा 308(6) भी बढ़ाई गई।
    वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून के निर्देश पर गठित टीम ने 14 जून को मुखबिर की सूचना पर सुरेश राठौर को बिहारीगढ़ फ्लाईओवर के समीप से गिरफ्तार कर लिया। न्यायालय में पेश किए जाने के बाद उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जिला कारागार सुद्धोवाला भेज दिया गया है।

    अंकिता भंडारी हत्याकांड: अब तक की प्रमुख स्थिति

    सितंबर 2022 में पौड़ी जिले के यमकेश्वर स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या का मामला सामने आया था। इस मामले में रिजॉर्ट संचालक पुलकित आर्य, अंकित गुप्ता और सौरभ भास्कर को गिरफ्तार किया गया था। जांच में आरोप सामने आया कि वीआईपी मेहमानों को “विशेष सेवाएं” देने के दबाव का विरोध करने पर अंकिता की हत्या कर उसका शव चीला नहर में फेंक दिया गया।
    मामले की जांच के बाद एसआईटी ने आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। कोटद्वार स्थित विशेष अदालत में मुकदमे की सुनवाई जारी रही, जिसमें अभियोजन और बचाव पक्ष के गवाहों के बयान दर्ज किए गए। राज्यभर में इस मामले को लेकर लंबे समय तक जनआक्रोश बना रहा और अंकिता को न्याय दिलाने की मांग लगातार उठती रही। मई 2025 में तीनों अभियुक्तों को उम्र कैद की सजा हुई।

    इसी बीच, बीते कुछ महीनों में सोशल मीडिया पर अंकिता प्रकरण से जुड़े कई ऑडियो, वीडियो और कथित खुलासे वायरल हुए। इन्हीं में से कुछ सामग्रियों को लेकर भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम ने आरोप लगाया कि उन्हें और अन्य नेताओं को जानबूझकर मामले से जोड़ने तथा राजनीतिक लाभ के लिए दुष्प्रचार किया गया। इसी शिकायत के आधार पर दर्ज मुकदमे में अब पूर्व विधायक सुरेश राठौर की गिरफ्तारी हुई है।
    पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना अभी जारी है और प्रकरण में अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। वहीं सुरेश राठौर की गिरफ्तारी के बाद इस मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है।

    सीबीआई जांच के परिणाम का इंतजार

    गौरतलब है कि बीते दिसम्बर माह में उर्मिला सनावर व राठौर के ‘खुलासे’में भाजपा के नेताओं का नाम कथित वीआईपी के तौर पर सामने आया था। उर्मिला ने इस मामले को वीडियो व ऑडियो के जरिये सार्वजनिक किया। इसके बाद प्रदेश की जनता कथित वीआईपी के मुद्दे पर सड़कों पर उतर गयी। भारी जनाक्रोश के बाद सीएम धामी ने जनवरी में सीबीआई जांच की घोषणा की।
    छह महीने बीत जाने के बाद सीबीआई की जांच का कोई रिजल्ट सामने नहीं आया। लेकिन भाजपा ने संगठन महामंत्री का प्रदेश से राजस्थान ट्रांसफर कर दिया। जबकि दुष्यंत गौतम अभी प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे है।

    इधऱ, दून पुलिस ने पूर्व विधायक की गिरफ्तारी कर हलचल बढ़ा दी है। राठौर की गिरफ्तारी पर उर्मिला सनावर का कोई बयान सामने नहीं आया है। अंकिता मर्डर केस की सीबीआई जांच के मुद्दे पर विपक्षी राजनीतिक दल व सामाजिक संगठन सीबीआई कार्यालय का घेराव भी कर चुके हैं।
    लगभग चार साल बाद चुनावी साल में अंकिता मर्डर केस की हों रही सीबीआई जांच प्रमुख चुनावी मुद्दा बनती जा रही है।

  • उत्तराखंड में अवैध सट्टेबाजी के खिलाफ STF का बड़ा एक्शन

    उत्तराखंड में अवैध सट्टेबाजी के खिलाफ STF का बड़ा एक्शन

    86 अवैध वेबसाइट ब्लॉक

    नए जुआ कानून के तहत सख्ती बढ़ी, सट्टा संचालकों पर जेल

    जुर्माना और संपत्ति कुर्की का प्रावधान

    देहरादून। उत्तराखंड में ऑनलाइन सट्टेबाजी और अवैध गेमिंग के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 86 अवैध सट्टेबाजी वेबसाइटों (यूआरएल) को ब्लॉक कर दिया है। राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए उत्तराखंड जुआ कानून-2026 के तहत सट्टा और जुए के नेटवर्क पर लगातार शिकंजा कसा जा रहा है।

    एसटीएफ के अनुसार, ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से संचालित अवैध सट्टेबाजी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। इसी क्रम में अवैध बेटिंग प्लेटफॉर्मों की पहचान कर उन्हें बंद कराया गया है। इस कार्रवाई का उद्देश्य लोगों को आर्थिक नुकसान और साइबर ठगी से बचाना है।

    नए कानून के तहत ऑनलाइन सट्टा सिंडिकेट चलाने वालों को 3 से 5 वर्ष तक के कारावास तथा 2 से 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। वहीं अवैध जुआ घर संचालित करने या उन्हें वित्तीय सहायता देने वालों के लिए 5 वर्ष तक की जेल और एक लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।

    कानून में सार्वजनिक स्थानों पर जुआ खेलने या सट्टा लगाने-खिलाने वालों की बिना वारंट गिरफ्तारी की व्यवस्था भी की गई है। इसके अलावा दोबारा अपराध करने वाले अभ्यस्त अपराधियों को दोगुनी सजा और जुर्माना भुगतना होगा।

    एसटीएफ ने बताया कि जुए और सट्टेबाजी से अर्जित अवैध आय से बनाई गई चल-अचल संपत्तियों को जब्त और कुर्क किया जा सकेगा। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि त्वरित कमाई के लालच में ऑनलाइन सट्टेबाजी और अवैध गेमिंग ऐप्स के जाल में न फंसें तथा किसी भी संदिग्ध वेबसाइट या ऐप की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

  • विजिलेंस का बड़ा एक्शन: रिश्वत लेते दो आरोपी रंगे हाथ गिरफ्तार

    विजिलेंस का बड़ा एक्शन: रिश्वत लेते दो आरोपी रंगे हाथ गिरफ्तार

    विजिलेंस ने रिश्वत लेते दारोगा को किया गिरफ्तार

    दून में सफाई नायक को घूस लेते दबोचा

    बेतालघाट,नैनीताल/देहरादून। विजिलेंस ने दो अलग अलग घटनाओं में दो घूसखोर कर्मियों को पकड़ा। सोमवार को नैनीताल व दून जिले में  जाल बिछाते हुए विजिलेंस ने एक दारोगा और एक सफाई नायक को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया।
    मिली जानकारी के मुताबिक
    खनन पट्टे से आरबीएम (RBM) निकालकर स्थानीय स्टोन क्रेशर तक परिवहन करने वाले कारोबारी से 45 हजार रुपये की रिश्वत मांगना एक दारोगा को भारी पड़ गया।
    सतर्कता अधिष्ठान की ट्रैप टीम ने आरोपी पुलिसकर्मी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
    मामले के अनुसार शिकायतकर्ता ने सतर्कता अधिष्ठान के टोल फ्री नंबर 1064 पर शिकायत दर्ज कराई थी कि वह सरकारी खनन पट्टे पर आरबीएम निकालने का कार्य करता है। आरबीएम को खनन क्षेत्र से स्थानीय स्टोन क्रेशर तक पहुंचाने के लिए वाहनों का प्रयोग किया जाता है।
    आरोप था कि कांस्टेबल दीपक सिंह, पुत्र खुशाल सिंह, निवासी बिलहरी, चकरपुर, थाना कोतवाली खटीमा, जनपद ऊधमसिंह नगर, वर्तमान तैनाती थाना बेतालघाट, जनपद नैनीताल, वाहनों के परिवहन में अनावश्यक रोकटोक कर रहा था।
    शिकायत में कहा गया कि आरोपी पुलिसकर्मी वाहन चालान कराने और वाहन सीज करने का भय दिखाकर शिकायतकर्ता से 45 हजार रुपये की अवैध रिश्वत मांग रहा था। सतर्कता टीम द्वारा शिकायत की जांच की गई, जिसमें आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए।
    इसके बाद थाना सतर्कता सेक्टर हल्द्वानी में मुकदमा दर्ज कर पुलिस अधीक्षक सतर्कता सेक्टर हल्द्वानी के निर्देशन में ट्रैप टीम गठित की गई।
    ट्रैप टीम ने रविवार 25 मई 2026 को कार्रवाई करते हुए आरोपी कांस्टेबल दीपक सिंह को शिकायतकर्ता से 45 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोपी वर्तमान में चापड़ देव सिंह के मकान में रह रहा था।

    चालान निपटाने के नाम पर रिश्वतखोर नगर निगम कर्मी गिरफ्तार

    विजिलेंस की ट्रैप कार्रवाई में 3 हजार रुपये लेते रंगे हाथ दबोचा गया सफाई नायक

    देहरादून । भ्रष्टाचार के खिलाफ सतर्कता विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नगर निगम के सुपरवाइजर/सफाई नायक को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।
    आरोपी पर 10 हजार रुपये के चालान को निपटाने के एवज में 3 हजार रुपये की अवैध धनराशि मांगने का आरोप है।
    जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता ने टोल फ्री नंबर-1064 पर शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी चांदचक रोड, बंजारावाला स्थित ऑटो पार्ट्स की दुकान के बाहर पानी फैला हुआ था। इस पर नगर निगम देहरादून में तैनात सुपरवाइजर/सफाई नायक अंकुश कुमार ने उत्तराखंड कूड़ा फेंकना एवं थूकना प्रतिषेध अधिनियम-2016 के तहत 10 हजार रुपये का चालान किया था।
    आरोप है कि चालान को निपटाने के बदले अंकुश कुमार ने शिकायतकर्ता से 3 हजार रुपये रिश्वत की मांग की। शिकायत की प्राथमिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर थाना सतर्कता सेक्टर देहरादून में मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस अधीक्षक, सतर्कता सेक्टर देहरादून ने ट्रैप टीम का गठन किया।
    विजिलेंस टीम ने रविवार को कार्रवाई करते हुए आरोपी अंकुश कुमार को शिकायतकर्ता से 3 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    सतर्कता निदेशक डॉ. वी. मुरूगेशन ने आम जनता से भ्रष्टाचार के खिलाफ आगे आने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सतर्कता अधिष्ठान के टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1064 और व्हाट्सएप हेल्पलाइन नंबर 9456592300 पर शिकायत दर्ज कर भ्रष्टाचार उन्मूलन अभियान में सहयोग किया जा सकता है।

  • जमीन घोटाले का मास्टरमाइंड दून पुलिस के शिकंजे में

    जमीन घोटाले का मास्टरमाइंड दून पुलिस के शिकंजे में

    देहरादून। फौजियों और पहाड़ के लोगों को झांसे में लेकर करोड़ों की ठगी, 20 हजार का इनामी गिरफ्तार देहरादून में जमीन के नाम पर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करने वाले शातिर जालसाज को दून पुलिस ने आखिरकार गिरफ्तार कर लिया। पहाड़ के भोले-भाले लोगों, फौजियों और दूसरे राज्यों में रहने वाले उत्तराखंड मूल के लोगों को सस्ते दामों पर जमीन दिलाने का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले 20 हजार रुपये के इनामी आरोपी प्रदीप सकलानी को उसके साथी अजय सजवाण के साथ डालनवाला क्षेत्र से दबोचा गया।
    आरोपी के खिलाफ भूमि धोखाधड़ी, जालसाजी और गैंगस्टर एक्ट समेत 27 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं।

    पुलिस के अनुसार सहस्त्रधारा रोड निवासी विक्रम सिंह ने थाना रायपुर में शिकायत दर्ज कराई थी कि प्रदीप सकलानी, अभय कुमार और अजय सजवाण ने ग्राम सौंडा सरोली स्थित भूमि को अपने परिचितों की बताकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और 30 लाख रुपये बयाने के रूप में ले लिए।

    बाद में पता चला कि जमीन के वास्तविक मालिकों ने आरोपियों को बिक्री का कोई अधिकार नहीं दिया था।
    जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपियों ने फर्जी अनुबंध पत्र तैयार कर पीड़ित से धोखाधड़ी की और रकम वापस मांगने पर दिए गए चेक भी बाउंस हो गए। मुकदमा दर्ज होने के बाद मुख्य आरोपी प्रदीप सकलानी लगातार फरार चल रहा था, जिस पर एसएसपी देहरादून ने 20 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था।

    एसएसपी परमेन्द्र डोभाल के निर्देश पर चलाए जा रहे “ऑपरेशन प्रहार” के तहत गठित पुलिस टीम ने मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए एकता विहार, डालनवाला से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।

    पूछताछ में आरोपी ने बताया कि पुलिस से बचने के लिए वह लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था।
    पुलिस के मुताबिक प्रदीप सकलानी बेहद शातिर अपराधी है, जो खुद को पहाड़ी मूल का बताकर लोगों का भरोसा जीतता था। इसके बाद वह सस्ते दामों में जमीन दिलाने का लालच देकर किसी अन्य की भूमि को अपनी बताकर लोगों से मोटी रकम ठग लेता था।
    आरोपी के खिलाफ देहरादून के अलग-अलग थानों में भूमि धोखाधड़ी के 27 मुकदमे दर्ज हैं, जबकि गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई हो चुकी है। साथ ही एनआई एक्ट के तहत भी उसके खिलाफ दो दर्जन से अधिक मामले न्यायालयों में लंबित हैं।

  • चम्पावत दुष्कर्म केस : साजिश के आरोप में दो गिरफ्तार, जांच में बड़े खुलासे

    चम्पावत दुष्कर्म केस : साजिश के आरोप में दो गिरफ्तार, जांच में बड़े खुलासे

    नाबालिग से दुष्कर्म की कहानी निकली झूठी

    चम्पावत। जिले में चर्चित नाबालिग दुष्कर्म प्रकरण की जांच में पुलिस को बड़ा खुलासा हाथ लगा है। एसआईटी जांच में मामला सुनियोजित साजिश का निकला, जिसके बाद पुलिस ने कथित षड़यंत्रकर्ता कमल सिंह रावत और उसकी महिला मित्र अर्जिता राय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस के अनुसार बदले की भावना से पूरे घटनाक्रम को अंजाम दिया गया था।

    जांच में सामने आया कि कमल सिंह रावत ने अपनी महिला मित्र अर्जिता राय के साथ मिलकर बदले की भावना से यह साजिश रची थी। इसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार कमल सिंह रावत के खिलाफ पहले से महिला अपराध और आईटी एक्ट समेत कई गंभीर मामले दर्ज हैं।

    इस मुद्दे पर कांग्रेस समेत विभिन्न संगठन सड़क।पर उतर आए हैं। मामले में भाजपा से जुड़े नेताओं का नाम आने से विरोधी दलों ने प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। बाल संरक्षण आयोग ने भी मामले का संज्ञान लिया है।

    पुलिस के मुताबिक छह मई को कोतवाली चम्पावत में एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराते हुए अपनी 16 वर्षीय पुत्री के साथ तीन लोगों द्वारा दुष्कर्म किए जाने का आरोप लगाया था।

    मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तत्काल 10 सदस्यीय एसआईटी गठित कर जांच शुरू की गई।
    जांच के दौरान घटनास्थल का निरीक्षण, मेडिकल परीक्षण, एफएसएल रिपोर्ट, सीडब्ल्यूसी काउंसिलिंग और न्यायालय में बयान समेत सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गईं।

    तकनीकी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर पुलिस इस निष्कर्ष पर पहुंची कि नामजद तीनों आरोपी कथित घटना के समय घटनास्थल पर मौजूद ही नहीं थे।
    पुलिस के अनुसार न्यायालय में नाबालिग ने भी किसी प्रकार की दुष्कर्म की घटना से इंकार करते हुए पूरे मामले को मनगढ़ंत बताया।

    चम्पावत पुलिस ने कहा है कि महिला एवं बाल अपराधों के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत कार्रवाई जारी रहेगी। साथ ही कानून का दुरुपयोग कर झूठे आरोप लगाने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
    पुलिस ने आमजन और मीडिया से अपील की है कि केवल सत्यापित तथ्यों का ही प्रसारण करें तथा पोक्सो एक्ट के तहत नाबालिग की पहचान गोपनीय रखी जाए।

    अपडेट-चंपावत दुष्कर्म प्रकरण

    शुरुआती रिपोर्ट्स में इसे एक भयानक अपराध बताया गया था, लेकिन हालिया वीडियो बयानों ने मामले को पूरी तरह पलट दिया है।

    आरोप

    10वीं कक्षा की एक नाबालिग छात्रा के पिता ने शिकायत दर्ज कराई थी कि तीन युवकों (विनोद सिंह रावत, नवीन सिंह रावत और पूरन सिंह रावत) ने चाकू की नोक पर उनकी बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।

    पुलिस कार्रवाई-

    पुलिस ने बीएनएस (BNS) की धारा 70(2) और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और एसओजी (SOG) की टीमें तैनात की गई थीं।

    बड़ा खुलासा (ताजा मोड़)

    सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक नए वीडियो में नाबालिग पीड़िता ने दुष्कर्म के आरोपों से इनकार किया है। उसने बताया कि यह सब एक षड्यंत्र के तहत किया गया था और तीनों युवकों ने उसके साथ कुछ गलत नहीं किया।

    परिजनों की माफी-

    पीड़िता के भाई ने भी एक वीडियो जारी कर एसपी और जनता से माफी मांगी है। उसने स्वीकार किया कि उसने किसी और के कहने पर पुलिस को गलत पत्र भेजा था।

  • राहुल का ‘पीए’ बनकर ठग ने उत्तराखंड में किया बड़ा खेल

    राहुल का ‘पीए’ बनकर ठग ने उत्तराखंड में किया बड़ा खेल

    खेला- कांग्रेस में उलट पुलट व टिकट दिलाने के नाम पर बनाया मूरख

    गिरफ्तार ठग अन्य राज्यों के नेताओं को भी ‘लपेट’ चुका है

    देहरादून। असली खेला तो उत्तराखण्ड में हुआ। फर्जी आया और चूना लगाया। अब सलाखों के पीछे है। खुद को राहुल गांधी का पीए कनिष्क बताया और सोशल मीडिया में अति सक्रिय महिला नेत्री से लाखों लूट लिए। यही नहीं, कुछ अन्य नेत्रियों को भी झांसे में लेकर टिकट दिलवाने का भरोसा दिया।

    दून पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच के बाद पता चलेगा कि किस किस से फर्जी गैंग ने माल लूटा।
    अभी तक की जांच में सामने आया है कि इस फर्जी ने महिला नेत्री भावना पांडे और कांग्रेस नेत्री सोनिया आनंद के सम्पर्क में था।

    भावना ने बताया कि ठग ने उन्हें गणेश गोदियाल को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटवाने और प्रीतम या यशपाल को अध्यक्ष बनाने की बात भी बताई थी।

    खुद को कांग्रेस नेता राहुल गांधी का करीबी और निजी सचिव बताने वाले आरोपी ने न सिर्फ पार्टी में पद और टिकट दिलाने का भरोसा दिया, बल्कि फोन पर कथित तौर पर वरिष्ठ नेताओं की आवाज सुनाकर पीड़ित का विश्वास भी जीत लिया। पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले में गिरोह के सरगना को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
    मामले के अनुसार, आरोपी ने देहरादून की एक महिला नेता भावना पांडे को निशाना बनाते हुए विधानसभा चुनाव और संगठन में महत्वपूर्ण पद दिलाने का लालच दिया।
    इस पूरे खेल को विश्वसनीय बनाने के लिए आरोपी ने फोन कॉल के दौरान कई वरिष्ठ नेताओं की आवाज सुनाई, जिससे पीड़िता भावना पांडे को यकीन हो गया कि वह सीधे शीर्ष नेतृत्व से जुड़ी हुई है।
    पीड़िता के मुताबिक, आरोपी ने पहले बातचीत का दायरा बढ़ाया और फिर पार्टी कार्यक्रमों, सर्वे और संगठनात्मक खर्च के नाम पर बड़ी रकम की मांग शुरू कर दी।

    बताया गया कि आरोपी ने करीब 25 लाख रुपये ठग लिए। इतना ही नहीं, उसने होटल बुकिंग, नेताओं की मीटिंग और चुनावी तैयारी के नाम पर अतिरिक्त खर्च की बात भी कही, जिससे रकम और बढ़ती चली गई।

    जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने कई राज्यों में इसी तरह का नेटवर्क बना रखा था। वह अलग-अलग नामों और पहचान का इस्तेमाल कर नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं को फंसाता था। पुलिस को शक है कि इस गिरोह ने करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया है।
    दिलचस्प पहलू यह है कि आरोपी ने पीड़िता को भरोसा दिलाने के लिए कथित तौर पर कई बड़े नेताओं के नाम पर कॉल कराए। पीड़िता भावना पांडे ने कहा कि फोन पर सुनी गई आवाजें इतनी विश्वसनीय थीं कि उसे जरा भी संदेह नहीं हुआ। इसी भरोसे में आकर उसने बड़ी रकम दे दी।
    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, तकनीकी जांच और मोबाइल लोकेशन के आधार पर आरोपी को ट्रैक किया गया और गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में कई अहम खुलासे होने की संभावना है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और किन-किन राज्यों में इसने वारदात को अंजाम दिया।

    पीड़िता भावना पांडे

    ठग ने हरक,प्रीतम, यशपाल आर्य,हरदा समेत कई अन्य नेताओं से भी बात करने की कोशिश की।

    पुलिस ने किया गिरफ्तार

    मामले की शुरुआत 3 मई को हुई, जब वादिनी भावना पांडे ने थाना राजपुर में लिखित तहरीर दी। उन्होंने बताया कि कनिष्क सिंह नामक व्यक्ति ने खुद को एक राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी का निजी सचिव बताते हुए उनसे संपर्क किया। आरोपी ने उन्हें पार्टी में महत्वपूर्ण पद दिलाने और उत्तराखंड में सर्वे कराने का झांसा दिया तथा इसके एवज में 25 लाख रुपये की मांग की।

    एसएसपी डोभाल ने बताया कि 13 अप्रैल 2026 को आरोपी ने अपने एक सहयोगी को जाखन स्थित पीनाकिल रेजिडेंसी में उनके आवास पर भेजा, जहां से 25 लाख रुपये नकद ले लिए गए। रकम लेने के बाद आरोपी ने फोन उठाना बंद कर दिया और संपर्क से बाहर हो गया। बाद में जानकारी करने पर पता चला कि वह पहले भी कई राज्यों में इस तरह की ठगी कर चुका है।
    तहरीर के आधार पर पुलिस ने धारा 318(4) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
    मामले की गंभीरता को देखते हुए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया। पुलिस ने मोबाइल सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपी की पहचान और लोकेशन ट्रेस की।
    जांच के दौरान सूचना मिली कि आरोपी जाखन क्षेत्र में एक अन्य व्यक्ति से पैसे लेने आने वाला है। इस पर पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया।
    पूछताछ में आरोपी ने अपना असली नाम गौरव कुमार (उम्र 42 वर्ष) निवासी अमृतसर, पंजाब बताया। उसने खुलासा किया कि वह इंटरनेट और गूगल के माध्यम से राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं और उनके सहयोगियों की जानकारी जुटाता था।
    इसके बाद वह कनिष्क सिंह के नाम से ट्रूकॉलर पर फर्जी पहचान बनाकर लोगों को विश्वास में लेता था।
    आरोपी ने अपने तीन साथियों—छज्जू, रजत मदान और मनिंदर सिंह कालू—के साथ मिलकर कई राज्यों में ठगी की वारदातों को अंजाम दिया।
    वर्ष 2017 में जयपुर (राजस्थान) में दो नेताओं से विधायक का टिकट दिलाने के नाम पर 1 करोड़ 90 लाख और 12 लाख रुपये ठगे गए। वहीं, वर्ष 2025 में पटना (बिहार) में एक नेता से 3 लाख रुपये लिए गए।
    पुलिस के अनुसार आरोपी के उत्तराखंड में भी कई वरिष्ठ नेताओं से संपर्क होने की जानकारी मिली है। अन्य राज्यों में हुई ठगी की घटनाओं के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
    गिरफ्तार आरोपी के कब्जे से दो मोबाइल फोन और एक डोंगल बरामद किया गया है।

    ठगी के जाल में बड़े नामों का इस्तेमाल: भरोसा जीतने के लिए नेताओं की ‘आवाज’ बनी

    “गणेश गोदियाल से लेकर प्रीतम सिंह तक के नाम लिए, फोन कॉल ने पीड़िता का भरोसा पुख्ता किया

    हाई-प्रोफाइल ठगी के इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि आरोपी ने पीड़िता का भरोसा जीतने के लिए प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के कई बड़े नेताओं के नाम और कथित आवाज का सहारा लिया। यही वजह रही कि पूरा मामला लंबे समय तक संदेह से परे रहा और पीड़िता ठगी के जाल में फंसती चली गई।
    आरोपी ने बातचीत के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के नाम लेकर अपनी पहुंच का दावा किया। पीड़िता भावना पांडे को विश्वास दिलाने के लिए जिन नेताओं का जिक्र किया गया, उनमें कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत, वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह और नेता प्रदीप टम्टा जैसे नाम शामिल बताए गए हैं।
    पीड़िता का कहना है कि आरोपी ने फोन कॉल के दौरान इन नेताओं की आवाज सुनवाई, जिससे उसे लगा कि वह वास्तव में शीर्ष नेतृत्व से सीधे जुड़ी बातचीत कर रही है। यही वह बिंदु था, जहां से उसका भरोसा पूरी तरह मजबूत हो गया।

    पीड़िता भावना पांडे ने बताया कि आरोपी कांग्रेस नेत्री सोनिया आनंद के संपर्क में था और दोनों की लंबी बातचीत होती रही है।
    भावना से भी ठग ने कई बड़े-बड़े दावे किए। भावना ने बताया कि ठग से उनकी गणेश गोदियाल को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटवाने और प्रीतम या यशपाल को अध्यक्ष बनाने की बात बताई थी।

    खबर में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने केवल नाम लेने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि उसने इन नेताओं से बातचीत कराने का आभास पैदा किया। कुछ मामलों में स्क्रीनशॉट भेजे गए, जिनमें नेताओं के नाम से कथित मैसेज दिखाए गए। हालांकि, बाद में जांच में यह सब फर्जी साबित हुआ।

    इतना ही नहीं, आरोपी ने संगठनात्मक गतिविधियों और टिकट वितरण के नाम पर यह भी कहा कि “ऊपर तक बात हो चुकी है” और “नेताओं की सहमति मिल चुकी है।” इस तरह के दावों ने पीड़िता को पूरी तरह आश्वस्त कर दिया कि मामला असली है और उसे जल्द ही पार्टी में बड़ा पद मिल सकता है।

    पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने कई अन्य लोगों को भी इसी तरह नेताओं के नाम और प्रभाव का डर या लालच दिखाकर ठगा। वह अलग-अलग राज्यों में अलग पहचान बनाकर काम करता था और हर जगह स्थानीय व राष्ट्रीय नेताओं के नामों का इस्तेमाल करता था।

    फिलहाल,पुलिस इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं इस गिरोह ने और भी नेताओं के नाम का दुरुपयोग तो नहीं किया। साथ ही, जिन नेताओं के नाम सामने आए हैं, उनकी ओर से भी इस मामले में स्पष्टीकरण आने की संभावना है।

    इस घटना ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। यह मामला न सिर्फ ठगी का है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह फर्जी पहचान और तकनीक का इस्तेमाल कर बड़े स्तर पर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। पुलिस ने आम लोगों और खासतौर पर राजनीतिक कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने की सलाह दी है कि किसी भी प्रकार के पद, टिकट या सिफारिश के नाम पर पैसे मांगने वालों से सावधान रहें।

    पुलिस टीम:
    उपनिरीक्षक सूरज कंडारी (चौकी प्रभारी जाखन), कांस्टेबल मुकेश, कांस्टेबल ललित
    एसओजी टीम:
    उपनिरीक्षक संदीप कुमार, कांस्टेबल ललित, कांस्टेबल देवेंद्र

  • पुलिस के व्यवहार से दुखी होकर  युवक ने दी जान

    पुलिस के व्यवहार से दुखी होकर युवक ने दी जान

    सतपुली थाना प्रभारी लाइन हाजिर

    बाइक सीज होने पर था परेशान,पुलिस को कोसा

    इंस्टाग्राम पर वीडियो डालकर दी जान, जांच शुरू

    सतपुली/ पौड़ी। पुलिस के व्यवहार से दुखी होकर एक युवक ने जान दे दी। उत्तराखंड के सतपुली क्षेत्र में 20 वर्षीय युवक की आत्महत्या का मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है।
    युवक ने आत्महत्या से पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर स्थानीय पुलिस, विशेष रूप से थानाध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
    इस घटना के बाद सतपुली के थाना प्रभारी को लाइन हाजिर कर दिया ।

    मृतक की पहचान सतपुली के रेतपुर क्षेत्र निवासी पंकज कुमार (20) के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि युवक ने आत्महत्या से पहले Instagram पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उसने पुलिस पर अभद्र व्यवहार और मारपीट के आरोप लगाए। वीडियो में युवक ने कहा कि उसकी बात बिना सुने कार्रवाई की गई और उसके साथ ही नहीं, बल्कि उसके परिवार के साथ भी थाने में गलत भाषा का इस्तेमाल किया गया।

    गौरतलब है कि शुक्रवार की शाम पंकज की बाइक से एक व्यक्ति को टक्कर लग गयी थी। सतपुली थाने में शिकायत दर्ज होने के बाद बाइक सीज कर दी गयी थी। इससे पंकज मानसिक तौर पर परेशान हो गया था। पंकज की बहन की शादी 24 अप्रैल को हुई थी। और वह बहन के ससुराल अगरोडा से लौट रहा था। इसी बीच बाइक से एक व्यक्ति को टक्कर लग गयी।

    बताया जा रहा है कि युवक ने अपने सुसाइड नोट में भी पुलिस को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है और लिखा कि “पुलिस में इंसानियत नहीं है।” यह भी लिखा कि मैं सतपुली पुलिस से नफरत करता हूँ।

    जानकारी के अनुसार, युवक को अपनी बाइक से गहरा लगाव था। पुलिस द्वारा बाइक सीज किए जाने के बाद वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगा था। परिजनों का कहना है कि वह इस घटना के बाद खुद को अपमानित महसूस कर रहा था और अक्सर इसी बात को लेकर दुखी रहता था।

    शनिवार सुबह रेतपुर-भिताड़ा पुल के पास युवक का शव फंदे से लटका मिला। सूचना मिलने पर उत्तराखंड पुलिस मौके पर पहुंची और शव को नीचे उतारा। परिजनों के अनुसार युवक सुबह बिना बताए घर से निकल गया था और बाद में तलाश के दौरान उसका शव पुल के पास मिला।

    घटना के बाद क्षेत्र में लोगों की भीड़ जुट गई। पुलिस और SDRF टीम ने मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई की। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि युवक द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच की जा रही है और इंस्टाग्राम वीडियो व सुसाइड नोट को जांच का अहम आधार बनाया गया है।

    उधर, एसएसपी सर्वेश पंवार ने मामले की जांच अपर पुलिसअधीक्षक कोटद्वार को सौंपी है। गौरतलब है कि इससे
    यह घटना जहां एक ओर परिवार के लिए गहरा सदमा है, वहीं दूसरी ओर पुलिस के व्यवहार और संवेदनशीलता को लेकर भी कई सवाल खड़े कर रही है। अब नजर जांच के नतीजों पर टिकी है, जिससे पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके। इस प्रकरण से क्षेत्र में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

    प्रमुख आत्महत्या के मामले

    (2025-2026):काशीपुर किसान आत्महत्या मामला (जनवरी 2026): उधम सिंह नगर के पैगा गांव के किसान सुखवंत सिंह ने हल्द्वानी के एक होटल में खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। मरने से पहले उन्होंने एक वीडियो में प्रॉपर्टी डीलरों द्वारा ₹4 करोड़ की ठगी और पुलिस की निष्क्रियता का आरोप लगाया था। इस मामले में कई पुलिसकर्मियों को निलंबित और स्थानांतरित किया गया है, और SIT जांच जारी है।

    सतपुली (पौड़ी गढ़वाल) युवक आत्महत्या

    मामला (2 मई 2026): सतपुली में 20 वर्षीय पंकज कुमार ने पुल से लटककर आत्महत्या कर ली। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर स्थानीय पुलिस पर मोटरसाइकिल जब्त करने और उत्पीड़न का आरोप लगाया था।

    2 मई 2026 को एनडीए की तैयारी कर रहे झारखंड निवासी युवा आर्यन राज ने आत्महत्या कर ली।

    देहरादून बिल्डर सुसाइड मामला

    (मई 2024-2025 के दौरान): बिल्डर राजेश साहनी के आत्महत्या मामले में पुलिस ने गुप्ता बंधुओं को गिरफ्तार किया था। इस मामले में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी है। यह मामला भी चर्चा के केंद्र में है।

    उत्तरकाशी में अधिकारी की आत्महत्या

    (फरवरी 2025): मोरी ब्लॉक में ग्राम विकास अधिकारी निशु कुमार (29) ने किराए के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

    देहरादून में छात्राओं की आत्महत्या (जुलाई 2025):

    देहरादून में दो अलग-अलग घटनाओं में छात्राओं ने मानसिक अवसाद के कारण आत्महत्या की, जिसमें एक बीटेक छात्रा भी शामिल थी।पौड़ी में दिल दहलाने वाली घटना (अक्टूबर 2025): एक व्यक्ति ने शराब के नशे में अपने तीन महीने के बेटे को खाई में फेंकने के बाद खुद भी आत्महत्या कर ली।

    जितेंद्र नेगी आत्महत्या प्रकरण

    जितेंद्र सिंह नेगी ने 21 अगस्त 2025 की सुबह पौड़ी के तलसारी गांव में अपनी कार के अंदर खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली।सुसाइड वीडियो/नोट: आत्महत्या से पहले जितेंद्र ने एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया था, जिसमें उन्होंने हिमांशु चमोली पर जमीन सौदे के बहाने ₹35 लाख से ₹50 लाख से अधिक की धोखाधड़ी करने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था।

    आरोप और गिरफ्तारी-

    वीडियो में नाम सामने आने के बाद पुलिस ने हिमांशु चमोली और कुछ अन्य लोगों को हिरासत में लिया और गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। घटना के बाद भारतीय जनता पार्टी ने हिमांशु चमोली को पद से हटा दिया था।  इस मामले ने विपक्ष ने भाजपा को खूब घेरा था।

  • हत्या कांड में क्षेत्र पंचायत सदस्य गिरफ्तार

    हत्या कांड में क्षेत्र पंचायत सदस्य गिरफ्तार

    चमोली पुलिस ने “ब्लाइंड मर्डर” का किया खुलासा

    प्रतिष्ठा व उधारी बनी मौत की वजह

    कर्णप्रयाग। स्थानीय पुलिस ने एक माह पूर्व अलकनंदा नदी किनारे मिले अज्ञात शव की गुत्थी को सुलझाते हुए हत्यारोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अधीक्षक चमोली सुरजीत सिंह पँवार के कुशल निर्देशन में गठित एसआईटी और एसओजी टीम की वैज्ञानिक जांच व तकनीकी दक्षता से इस सनसनीखेज अंधे हत्याकांड का सफल अनावरण हुआ है।
    बीते 10 मार्च 2026 को पुलिस को सूचना प्राप्त हुई कि लंगासू क्षेत्र में चण्डिका माता मंदिर के नीचे अलकनंदा नदी के किनारे एक अज्ञात शव पड़ा है।

    सूचना पर पहुंची पुलिस टीम ने देखा कि मृतक के हाथ-पैर प्लास्टिक की रस्सी से बंधे हुए थे, जिससे मामला प्रथम दृष्टया हत्या का प्रतीत हो रहा था। मृतक के दाहिने हाथ पर अंग्रेजी में “SOORAJ PUROHIT” लिखा हुआ था, किंतु कोई आधिकारिक दस्तावेज न मिलने के कारण तत्काल पहचान संभव नहीं हो सकी।
    मौके पर आसपास के गांवों के स्थानीय व्यक्तियों को भी शव की शिनाख्त हेतु बुलाया गया, किन्तु किसी द्वारा मृतक की पहचान नहीं हो सकी।

    इस पर पुलिस द्वारा मौके पर ही पंचायतनामा की कार्यवाही संपन्न की गई। साथ ही, मृतक की पहचान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से फील्ड यूनिट टीम द्वारा उसके हाथों के फिंगरप्रिंट भी लिए गए। 72 घंटे तक शिनाख्त के प्रयास करने के उपरांत नियमानुसार पोस्टमार्टम कर शव का हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार कर दिया गया।

    मृतक के दाहिने हाथ पर अंग्रेजी में “SOORAJ PUROHIT” अंकित होना ही जांच की सबसे अहम कड़ी साबित हुई। इसी आधार पर पुलिस टीम ने जांच को आगे बढ़ाते हुए ‘पुरोहित’ सरनेम वाले गांवों में छानबीन शुरू की।
    इस क्रम में गौचर के सामने स्थित बमोथ गांव में उक्त नाम का व्यक्ति गांव के व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ा हुआ है। इसके बाद प्राप्त मोबाइल नंबर के आधार पर सर्विलांस किया गया, जिसमें उसकी अंतिम लोकेशन नन्दप्रयाग क्षेत्र में पाई गई।
    इस प्रकार विभिन्न कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस टीम ने जांच को सही दिशा में आगे बढ़ाया।

    हत्याकांड में नया मोड़ तब आया जब 23 मार्च को मृतक की पत्नी मंजू देवी ने सोशल मीडिया पर प्रसारित तस्वीरों को देखकर शव की पहचान अपने पति सूरज पुरोहित के रूप में की।

    परिजनों ने बताया कि सूरज 15 फरवरी के बाद से अचानक लापता हो गया था। 24 मार्च को मृतक सूरज पुरोहित की पत्नी श्रीमती मंजू देवी द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर कोतवाली कर्णप्रयाग में मु0अ0सं0 13/2026, धारा 103(1) बीएनएस बनाम अज्ञात पंजीकृत किया गया।
    पुलिस अधीक्षक चमोली सुरजीत सिंह पँवार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल पुलिस उपाधीक्षक कर्णप्रयाग त्रिवेन्द्र सिंह राणा के पर्यवेक्षण में एसआईटी (SIT) और एसओजी (SOG) की संयुक्त टीम का गठन किया और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने के निर्देश दिए।

    जांच के दौरान यह तथ्य प्रकाश में आया कि मृतक सूरज पुरोहित नन्दप्रयाग स्थित नन्दाकिनी होटल में ठहरा हुआ था तथा नरेन्द्र तोपाल के माध्यम से मधुबन ढाबे में कार्य कर रहा था।
    पूछताछ में नरेन्द्र तोपाल ने प्रारंभ में बताया कि सूरज 15 फरवरी को काम छोड़कर चला गया था, किन्तु स्थानीय स्तर पर जानकारी एकत्र करने पर यह सामने आया कि उसने मृतक से ₹10,000 उधार लिए थे।

    पुलिस टीम द्वारा नन्दप्रयाग क्षेत्र के सीसीटीवी कैमरों का गहन अवलोकन किया गया। घटना को समय बीत जाने के कारण अधिकांश फुटेज उपलब्ध नहीं हो पाई, फिर भी अथक प्रयासों से कुछ महत्वपूर्ण फुटेज प्राप्त हुई। इन फुटेज में 16 फरवरी की रात्रि को नरेन्द्र तोपाल मृतक के शव को एक प्लास्टिक के कट्टे में अपनी अल्टो कार (UK12A 3212) की डिग्गी में रखकर झूलाबगड़ पुल की ओर ले जाता हुआ दिखाई दिया ।
    कुछ समय बाद वापस लौटकर वाहन धोता हुआ भी नजर आया।

    उक्त साक्ष्यों के आधार पर जब नरेन्द्र तोपाल से सख्ती से पूछताछ की गई तो उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। उसने बताया कि 16 फरवरी को उसने सूरज पुरोहित की हत्या कर दी और शव के हाथ-पैर बांधकर रात के समय सैकोट मार्ग स्थित झूलाबगड़ पुल से अलकनंदा नदी में फेंक दिया। साथ ही, साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से मृतक का मोबाइल फोन एवं अन्य सामान भी नदी में बहा दिया।

    हत्या का कारण पूछने पर नरेन्द्र तोपाल नेबताया कि वह एक सामाजिक एवं प्रतिष्ठित व्यक्ति है तथा वर्तमान में क्षेत्र पंचायत सदस्य सरतोली है। उसने माह जनवरी में मृतक सूरज पुरोहित से ₹10,000 उधार लिए थे। उसके अनुसार, सूरज पुरोहित शराब का सेवन करता था और नशे की हालत में उसे सार्वजनिक स्थानों पर अपशब्द कहकर अपमानित करता था तथा उधारी को लेकर बार-बार बेइज्जत करता था।

    करीब एक महीने पुराने इस अंधे हत्याकांड का खुलासा कर कर्णप्रयाग पुलिस ने अपनी सूझबूझ, तकनीकी जांच और निरंतर प्रयासों का बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। आरोपी को गिरफ्तार कर विधिक कार्रवाई की जा रही है।

    एफएसएल टीम द्वारा उसके वाहन से भी महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्रित करते हुए आवश्यक नमूने सुरक्षित किए गए, जिन्हें वैज्ञानिक जांच हेतु भेजा गया।

    अपर पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) ने पुलिस टीम के उत्कृष्ट कार्य की प्रशंसा करते हुए इस अनावरण को पुलिस की तत्परता एवं पेशेवर दक्षता का बेहतर उदाहरण बताया है साथ ही उक्त प्रकरण के सफल अनावरण पर पुलिस महानिरीक्षक गढवाल परिक्षेत्र द्वारा पुलिस टीम के उत्कृष्ट कार्य की प्रशंसा करते हुए टीम को उत्साहवर्धन स्वरूप ₹5,000/- का पारितोषिक प्रदान किया गया।

    बरामदगी-

    1. घटना में प्रयुक्त कार अल्टो UK12A-3212
    2. अभियुक्त द्वारा हाथ पैर बांधने में प्रयुक्त रस्सी आदि

    नाम पता अभियुक्त- नरेन्द्र सिंह तोपाल पुत्र भोला सिंह निवासी ग्राम धारकोट थाना व जिला चमोली उम्र 47 वर्ष

    पुलिस टीम

    1. प्रभारी निरीक्षक विनोद थपलियाल थाना कर्णप्रयाग
    2. वरिष्ठ उपनिरीक्षक संजय नेगी थाना कर्णप्रयाग
    3. उपनिरीक्षक देवेन्द्र पंत थानाध्यक्ष पोखरी
    4. उपनिरीक्षक मानवेन्द्र सिंह गुसाँई चौकी प्रभारी गौचर
    5. उपनिरीक्षक अमनदीप सिंह चौकी प्रभारी लंगासू
    6. उ0नि0 सतेन्द्र बुटोला व एसओजी टीम
    7. हे0का0 देवेन्द्र बिष्ट
    8. हे0का0 प्रदीप बहुखण्डी
    9. का0 सतीश गुसाँई
    10. का0 चालक सन्तोष चौहान
  • लूट के बाद पुलिस मुठभेड़ में एक बदमाश ढेर

    लूट के बाद पुलिस मुठभेड़ में एक बदमाश ढेर

    इंस्पेक्टर समेत तीन घायल, फरार आरोपियों की तलाश में सर्च ऑपरेशन तेज

    देहरादून।  29/30 अप्रैल की रात्रि पुलिस से हुई मुठभेड़ में एक बदमाश की मौत हो गयी। जबकि क्रॉस फायरिंग में एसएचओ नरेश राठौर समेत तीन पुलिस कर्मी घायल हो हो गए।

    देर रात हुई वारदात के बारे में एसएसपी प्रेमेंदर डोभाल ने बताया कि  थाना प्रेमनगर में कंट्रोल रूम/एमडीटी के माध्यम से सूचना प्राप्त हुई थी कि अज्ञात बदमाशों द्वारा एक व्यक्ति के साथ लूट की घटना की गई है ।  घटना के दौरान शिकायतकर्ता को गोली मार दी गई है। सूचना पर प्रभारी निरीक्षक प्रेमनगर मय पुलिस बल के मौके पर पहुंचे।

    मौके पर घायल व्यक्ति ने अपना नाम देवराज बताया। उसने बताया कि काले रंग की गुजरात नंबर की कार में सवार कुछ बदमाशों ने उसके साथ लूटपाट की और उसे गोली मारकर विश्रांति की ओर फरार हो गए। उसने यह भी बताया कि उसके नीले रंग के बैग में रखे लगभग दो लाख रुपये, एक मोबाइल फोन, हिसाब-किताब की डायरी, आईडी और अन्य दस्तावेज तमंचे के बल पर लूट लिए गए।

    घायल को प्राथमिक उपचार देने के बाद पुलिस ने बताए गए मार्ग पर बदमाशों का पीछा किया। कुछ दूरी पर जंगल की ओर जाती संदिग्ध कार दिखाई दी। पीछा करने पर बदमाशों ने पुलिस पार्टी पर फायरिंग कर दी और गाड़ी छोड़कर जंगल की ओर भाग गए। पुलिस ने उनका पीछा जारी रखा, इस दौरान बदमाशों ने पुनः फायरिंग की।

    फायरिंग के दौरान एक गोली प्रभारी निरीक्षक नरेश राठौर को लगी। आत्मरक्षा में पुलिस द्वारा जवाबी कार्रवाई की गई, जिसमें एक बदमाश गोली लगने से घायल हो गया, जबकि अन्य बदमाश अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए।

    घायल बदमाश, पीड़ित देवराज तथा घायल प्रभारी निरीक्षक को उपचार के लिए प्राथमिक चिकित्सालय प्रेमनगर लाया गया, जहां से तीनों को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। उपचार के दौरान घायल बदमाश की कोरोनेशन अस्पताल में मृत्यु हो गई।

    घटना की सूचना पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और पुलिस अधीक्षक नगर मौके तथा चिकित्सालय पहुंचे और स्थिति की जानकारी ली। फरार बदमाशों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन जारी है। जनपद के सभी नाकों और बैरियर पर सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है तथा सीमाओं पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। मामले में आवश्यक विधिक कार्रवाई और पूछताछ जारी है।